(अदिति खन्ना)
लंदन, 27 अगस्त (भाषा) ब्रिटिश सरकार के आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, ब्रिटेन में यौन अपराधों के लिए सजा पाने वाले विदेशियों की संख्या में पिछले चार वर्षों में काफी वृद्धि हुई है और इनमें भारतीय नागरिकों की संख्या सबसे अधिक है।
वर्ष 2021 और 2024 के बीच यौन अपराधों के लिए दोषी करार दिये गए विदेशी नागरिकों में भारतीयों की संख्या में 257 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि इस अवधि के दौरान यौन अपराधों के लिए दोषी करार दिये गए विदेशी नागरिकों की संख्या में कुल 62 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
ये आंकड़े ब्रिटेन के न्याय मंत्रालय के पुलिस राष्ट्रीय कंप्यूटर से प्राप्त आंकड़ों पर आधारित हैं। इसके बाद, आव्रजन रोधी थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर माइग्रेशन कंट्रोल’ (सीएमसी) द्वारा इनका विश्लेषण किया गया।
सीएमसी ने इस सप्ताह अपने विश्लेषण में कहा, ‘‘यौन अपराधों के लिए दोषी करार दिये गए विदेशी नागरिकों की संख्या 2021 और 2024 के बीच 62 प्रतिशत बढ़कर 687 से 1,114 हो गई। इस अवधि के दौरान, इन अपराधों के लिए ब्रिटिश दोषसिद्धि दर में 39.31 प्रतिशत की वृद्धि हुई।’’
थिंक टैंक के आंकड़ों के अनुसार, 2021 से भारतीय इस चार्ट में सबसे ऊपर बने हुए हैं, जब ऐसे 28 आपराधिक मामले दर्ज किये गए थे। इसके बाद, 2022 में 53, 2023 में 67 और पिछले साल 100 आपराधिक मामले दर्ज किये गए।
वर्ष 2021 और 2024 के बीच, यौन अपराध चार्ट में शीर्ष पांच देशों में, नाइजीरियाई नागरिकों के मामले 166 प्रतिशत, इराकियों के 160 प्रतिशत, सूडानी के 117 प्रतिशत और अफगान के 115 प्रतिशत बढ़े हैं।
विश्लेषण में जिन अन्य दक्षिण एशियाई देशों को चिह्नित किया गया है, उनमें बांग्लादेशी शामिल हैं, जो उक्त चार वर्ष की अवधि में 100 प्रतिशत वृद्धि के साथ छठे स्थान पर हैं। वहीं, पाकिस्तानी नागरिक 47 प्रतिशत वृद्धि के साथ 11वें स्थान पर हैं।
इस महीने की शुरुआत में, भारत को ब्रिटेन सरकार की उस विस्तारित सूची में शामिल किया गया था, जिसमें विदेशी अपराधियों को सजा सुनाये जाने पर उनकी अपील पर सुनवाई से पहले ही उन्हें निर्वासित कर दिया जाएगा। यह कदम ब्रिटेन में बढ़ते प्रवासन पर रोक लगाने के उपायों के तहत उठाया गया है।
भाषा सुभाष मनीषा
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