(शिरीष बी प्रधान)
काठमांडू, 26 अगस्त (भाषा) नेपाल की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने लिपुलेख दर्रे के माध्यम से व्यापार फिर से शुरू करने के लिए नयी दिल्ली और बीजिंग के बीच हाल में हुए समझौते पर मंगलवार को चिंता व्यक्त की और प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली से भारत व चीन की अपनी आगामी यात्राओं के दौरान इस मुद्दे को उठाने का आग्रह किया।
नेपाल इस क्षेत्र को अपना क्षेत्र बताता है, जिसे भारत ने स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है और कहा है कि यह ‘न तो उचित है और न ही ऐतिहासिक तथ्यों और साक्ष्यों पर आधारित है।’
हिमालयी राष्ट्र की चौथी सबसे बड़ी पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने एक बयान में सरकार से लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी की रक्षा के लिए कड़ा रुख अपनाने का आह्वान किया और दावा किया कि ये क्षेत्र नेपाल का ‘अभिन्न अंग’ हैं।
पार्टी के विदेश संबंध विभाग के प्रमुख शिशिर खनाल द्वारा जारी बयान में कहा गया है, ‘नेपाली भूमि पर किसी भी देश की कोई भी गतिविधि या समझौता नेपाल की सहमति के बिना वैध नहीं है।’
पार्टी ने प्रधानमंत्री ओली से आग्रह किया कि वह भारत और चीन की अपनी आगामी यात्राओं के दौरान इन क्षेत्रों का मुद्दा उठाएं।
प्रधानमंत्री ओली इस महीने के अंत में शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन की यात्रा पर जाएंगे तथा संभवतः 16 सितंबर को भारत की यात्रा भी करेंगे।
आरएसपी ने कहा कि विवाद का समाधान कूटनीतिक और शांतिपूर्ण तरीके से किया जाना चाहिए।
पिछले मंगलवार को भारत और चीन लिपुलेख दर्रे और दो अन्य व्यापारिक बिंदुओं के माध्यम से सीमा व्यापार फिर से शुरू करने पर सहमत हुए।
भाषा नोमान दिलीप
दिलीप
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