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तोक्यो, 29 जुलाई (भाषा) ‘क्वाड’ समूह ने एक महत्वपूर्ण कदम के तहत, सोमवार को अपने महत्वाकांक्षी हिंद-प्रशांत समुद्री क्षेत्र जागरूकता (आईपीएमडीए) कार्यक्रम को हिंद महासागर क्षेत्र तक विस्तारित करने की योजना की घोषणा की।
इससे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जल क्षेत्र की बेहतर निगरानी हो सकेगी।
चार देशों के समूह ‘क्वाड’ की विदेश मंत्रिस्तरीय बैठक के बाद यह घोषणा हिंद महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर नयी दिल्ली की चिंताओं के बीच की गई।
क्वाड ने यह भी कहा कि वह हिंद महासागर क्षेत्र के लिए भारत के सूचना केंद्र के माध्यम से अपने दक्षिण एशिया कार्यक्रम के शीघ्र संचालन के लिए काम कर रहा है।
बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर, अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन, जापान की विदेश मंत्री योको कामिकावा और ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने भाग लिया।
एक संयुक्त बयान में, विदेश मंत्रियों ने कहा कि क्वाड हिंद और प्रशांत महासागरों में समुद्र कानून पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (यूएनसीएलओएस) के अनुरूप एक स्वतंत्र एवं मुक्त समुद्री व्यवस्था विकसित करने के लिए कटिबद्ध है।
बयान में कहा गया, ‘‘ऐसे प्रयासों के अनुरूप, हम आईपीएमडीए को भौगोलिक दृष्टि से हिंद महासागर क्षेत्र तक विस्तारित करने का इरादा रखते हैं।’’
प्रेसवार्ता के दौरान जयशंकर ने कहा कि क्वाड केवल कोई ‘‘बातचीत का मंच’’ नहीं है, बल्कि एक ऐसा मंच है जो सार्थक परिणाम देने की बात करता है।
उन्होंने कहा, ‘‘क्वाड से आज जो हिंद-प्रशांत समुद्री क्षेत्र जागरूकता कार्यक्रम की पहल की गई है, वह सूचना केंद्रों को जोड़ने में भूमिका निभाती है।’’
जयशंकर ने कहा, ‘‘मॉरीशस में जल्द ही अंतरिक्ष आधारित जलवायु चेतावनी प्रणाली शुरू की जाएगी।’’
चीन का सीधे नाम लिए बिना क्वाड के विदेश मंत्रियों ने पूर्वी और दक्षिण चीन सागर की स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की और किसी भी ‘‘ऐसी एकतरफा कार्रवाई के प्रति क्वाड के कड़े विरोध को दोहराया, जो दबाव बनाकर यथास्थिति को बदलने की कोशिश करती है।’’
भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान ‘क्वाड’ समूह का हिस्सा हैं।
भाषा शफीक सुभाष
सुभाष
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