इस्लामाबाद, 30 सितंबर (भाषा) पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में संचार सेवाएं ठप रहने के बीच सोमवार को ‘शटर डाउन’ और ‘चक्का जाम’ हड़ताल के दौरान कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई और एक पुलिसकर्मी सहित एक दर्जन से ज्यादा लोग घायल हो गए। यह जानकारी मंगलवार को मीडिया में आयी खबर में दी गई।
जम्मू-कश्मीर संयुक्त आवामी एक्शन कमेटी (जेकेजेएएसी) द्वारा अपनी अधूरी मांगों को लेकर आहूत हड़ताल में प्रतिद्वंद्वी समूहों ने एक समय पर अलग-अलग विरोध प्रदर्शन किया। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है।
पाकिस्तान के ‘द डॉन’ अखबार की खबर के अनुसार, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में रविवार दोपहर से मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं निलंबित हैं और सूत्रों के मुताबिक, यह प्रतिबंध बुधवार तक जारी रह सकते हैं।
यह घटना नीलम ब्रिज के पास सोमवार को दोपहर के बाद हुई, जब मुस्लिम कॉन्फ्रेंस के नेता राजा साकिब मजीद की ‘शांति रैली’ जेकेजेएएसी के प्रदर्शनकारियों के सामने आ गई।’
संयुक्त सैन्य अस्पताल के एक अधिकारी के हवाले से खबर में कहा गया है कि प्रदर्शनों के दौरान गोली लगने से एक क्रॉकरी दुकान के मालिक की इलाज के दौरान मौत हो गई।
छर्रे लगने से घायल हुए एक अन्य दुकानदार ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों ने मजीद के काफिले को रास्ता देने के लिए जगह बनाने की कोशिश की थी लेकिन उसके साथियों ने अपने वाहनों से बाहर आकर उन पर हमला कर दिया।
एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार, शांति रैली को पुलिस और अर्धसैनिक बलों की सुरक्षा प्राप्त थी। पुलिस ने जेएसी के प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले दागे और गोलियां भी चलाईं।
अस्पताल में मौजूद लोगों ने गोलियों के खाली कारतूस दिखाए, जिन्हें उन्होंने घायल लोगों को बचाने के प्रयास के दौरान जमीन से इकट्ठा किया था।
यह विरोध प्रदर्शन दो साल पहले क्षेत्र में आटे और बिजली की नियमित और रियायती आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए शुरू हुआ था लेकिन अब इसमें अतिरिक्त मांगें भी जुड़ गई हैं, जैसे कश्मीरी अभिजात वर्ग के विशेषाधिकारों में कटौती, आरक्षित विधानसभा सीटों का उन्मूलन और मुफ्त शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाएं।
जेकेजेएएसी का आरोप है कि इस बार का विरोध प्रदर्शन इसलिये किया जा रहा है क्योंकि सरकार दो साल पहले हुए समझौते को पूरी तरह से लागू करने में विफल रही है।
प्रदर्शनकारियों ने 38 सूत्री मांगपत्र प्रस्तुत किया, जिसमें प्रमुख मांगें शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों की समाप्ति और अभिजात वर्ग के विशेषाधिकारों की वापसी शामिल हैं।
अन्य मांगों में कई सड़क परियोजनाओं का निर्माण, करों में राहत, आटे और बिजली पर सब्सिडी, शरणार्थियों के लिए नौकरी कोटा समाप्त करना, न्यायपालिका में सुधार और अन्य स्थानीय मांगें शामिल हैं।
शाम को सैकड़ों लोग मुजफ्फराबाद के लाल चौक पर एकत्र हुए, जहां शौकत नवाज मीर समेत कई जेएसी नेताओं ने भाषण दिए।
मीर ने लोगों से अगले कदम के बारे में फैसला करने के लिए मंगलवार को पूर्वाह्न 11 बजे उसी स्थान पर पुनः एकत्रित होने का आह्वान किया।
सभी व्यवसाय और दुकानें बंद रहीं और लगभग पूरे पीओके में सड़क विक्रेता अनुपस्थित रहे जबकि सड़कें भी सुनसान रहीं।
खबरों के अनुसार, रावलकोट और सुधनोती में भी इसी तरह की सभाएं आयोजित की गईं जबकि भीमबेर में क्षेत्र के ‘प्रधानमंत्री’ चौधरी अनवारुल हक के भाई एहसानुल हक ने एक रैली का नेतृत्व किया। खबर में यह भी कहा गया है कि एहसानुल जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) से जुड़ा है।
भाषा सुमित माधव
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