(शिरीष बी प्रधान)
काठमांडू, पांच सितंबर (भाषा) भारत के प्रधान न्यायाधीश बी.आर गवई ने भगवान बुद्ध के जन्म स्थान नेपाल को शुक्रवार को ‘विचारकों और सुधारकों का उद्गम स्थल’ बताया, जिन्होंने विद्मान मानदंडों को चुनौती दी, नैतिक चिंतन को प्रेरित किया और समाज को बेहतर बनाने का प्रयास किया।
सीजेआई गवई यहां नेपाल के उच्चतम न्यायालय द्वारा न्यायशास्त्र और न्याय क्षेत्र सुधारों पर आयोजित नेपाल-भारत न्यायिक वार्ता 2025 को संबोधित कर रहे थे।
सीजेआई गवई ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने संबोधन में कहा, ‘भगवान बुद्ध की जन्मस्थली होने के नाते नेपाल उन विचारकों और सुधारकों का उद्गम स्थल रहा है, जिन्होंने मौजूदा मानदंडों को चुनौती दी, नैतिक चिंतन को प्रेरित किया और समाज को बेहतर बनाने का प्रयास किया।’
उन्होंने नेपाल के संविधान की इस आधार पर सराहना की कि इसमें संसद में महिला प्रतिनिधियों के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की गारंटी दी गई है।
नेपाल के प्रधान न्यायाधीश प्रकाश मान सिंह रावत ने कहा, ‘पिछले दो दशकों में, नेपाल ने मानव संसाधन विकास, सूचना प्रौद्योगिकी के उपयोग और बुनियादी ढांचे के विकास के माध्यम से न्याय वितरण में महत्वपूर्ण सुधार हासिल किया है।’
उन्होंने कहा, ‘न्यायपालिका में हाल के संस्थागत सुधारों से नेपाल को विधि शासन सूचकांक में बेहतर स्थान प्राप्त करने में मदद मिली है, जो न्यायपालिका की स्वतंत्रता और शुचिता के प्रति हमारी प्रतिबद्धता में एक मील का पत्थर है।’
बृहस्पतिवार को काठमांडू पहुंचे सीजेआई गवई ने कहा कि भारत का उच्चतम न्यायालय लगातार यह रेखांकित करता रहा है कि लैंगिक न्याय, समानता का अनिवार्य हिस्सा है और वास्तविक समानता तभी संभव है, जब महिलाओं के सामने मौजूद ऐतिहासिक और संरचनात्मक बाधाओं को दूर किया जाए और उनके सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक जीवन में पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
उच्चतम न्यायालय द्वारा हाल में दिए गए एक फैसले का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, ‘अदालत ने हाथ से खींचे जाने वाले रिक्शा के प्रचलन पर प्रतिबंध लगा दिया है, क्योंकि यह रिक्शा चालकों की गरिमा का उल्लंघन करता है।’
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘इस मामले में न्यायालय ने इस निर्णय से रिक्शा चालकों पर पड़ने वाले वित्तीय प्रभाव का संज्ञान लिया और उनके पुनर्वास का आदेश दिया।’
उन्होंने कहा, ‘आज की वैश्वीकृत दुनिया में न्यायपालिकाएं तेजी से एक-दूसरे से जुड़ रही हैं, जिससे उनके लिए एक-दूसरे के अनुभवों से सीखना आवश्यक हो गया है।’
इससे पहले, नेपाल की चार दिवसीय यात्रा पर आए भारतीय प्रधान न्यायाधीश ने अपने नेपाली समकक्ष रावत से यहां मुलाकात की। उच्चतम न्यायालय के सूत्रों के अनुसार, उन्होंने एक-दूसरे के न्यायिक अनुभवों को साझा किया और विचारों का आदान-प्रदान किया।
न्यायमूर्ति गवई शुक्रवार को काठमांडू में पशुपतिनाथ मंदिर गए और उन्होंने बौद्धनाथ स्तूप का दौरा भी किया और पूजा-अर्चना की।
गवई शनिवार को भगवान बुद्ध की जन्मस्थली लुम्बिनी की यात्रा पर जाएंगे।
वह नेपाल की चार दिवसीय यात्रा पूरी करके रविवार को भारत लौटेंगे।
भाषा नोमान दिलीप
दिलीप
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