शिलांग, 28 अक्टूबर (भाषा) मेघालय के शिक्षा मंत्री लखमेन रिम्बुई ने मंगलवार को कहा कि राज्य सरकार उच्चतम न्यायालय के एक सितंबर के आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करेगी, जिसमें सभी सेवारत शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य कर दी गई है। इस फैसले से राज्य भर में 32,000 से अधिक शिक्षकों के प्रभावित होने की आशंका है।
मंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के क्रियान्वयन से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए छूट का अनुरोध करेगी, क्योंकि उच्चतम न्यायालय के फैसले का प्रभाव पूर्वव्यापी है।
रिम्बुई ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘हमारी दलील है कि उच्चतम न्यायालय का यह फैसला पूर्व प्रभाव से लागू होगा। हम चाहते हैं कि सरकार उन सभी शिक्षकों को छूट दे, जिनकी नियुक्ति आरटीई अधिनियम लागू होने से पहले हुई थी।’
उन्होंने कहा कि आरटीई अधिनियम के कार्यान्वयन के बाद, प्रारंभिक और प्राथमिक शिक्षा के लिए नियामक प्राधिकरण, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने शिक्षकों के लिए न्यूनतम मानक और योग्यता निर्धारित करने वाली अधिसूचनाएं जारी की थीं, जिनका राज्य ने पालन किया है।
मंत्री ने कहा, ‘आरटीई के आने और उसके बाद एनसीटीई की अधिसूचना जारी होने के बाद शिक्षक भर्ती के मानक स्पष्ट कर दिए गए थे और राज्य सरकार ने उनका अनुपालन किया है। इसलिए अनुपालन न करने का कोई सवाल ही नहीं उठता।’
रिम्बुई ने कहा कि राज्य सरकार की चिंता मुख्य रूप से उन शिक्षकों के लिए है जिनकी भर्ती आरटीई अधिनियम से पहले हुई थी और जो वर्तमान टीईटी आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर सकते। उन्होंने कहा, ‘इस फैसले से लगभग 32,000 से ज़्यादा शिक्षक प्रभावित होंगे, यानी उन्हें दो साल के भीतर टीईटी पास करना होगा।’
हालांकि, उन्होंने आशंका जताई कि ये सभी शिक्षक निर्धारित समय सीमा के भीतर परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर पाएंगे।
शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि जो शिक्षक पहले ही मेघालय शिक्षक पात्रता परीक्षा (एमटीईटी) या केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) उत्तीर्ण कर चुके हैं, उन्हें किसी अन्य टीईटी में बैठने से छूट दी गई है और उनकी सेवाएं सुरक्षित रहेंगी।
भाषा आशीष पवनेश
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