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Monday, 7 September, 2026
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मरियम नवाज़ की आतंकवाद को लेकर चेतावनी से पाकिस्तान के पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा के बीच विवाद बढ़ा

उनका कहना है कि पंजाब को पड़ोसी देशों से कम और पड़ोसी राज्यों से ज़्यादा खतरा है.

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नई दिल्ली: पाकिस्तान के पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने कहा कि देश के सबसे ज्यादा आबादी वाले प्रांत पंजाब को आतंकवाद से खतरा पड़ोसी देशों की तुलना में अपनी अंदरूनी सीमाओं से ज्यादा है.

उन्होंने शनिवार को लाहौर में एक कार्यक्रम में कहा, “दुर्भाग्य से, 13 करोड़ की आबादी वाले पंजाब को जिस खतरे का सामना करना पड़ रहा है, वह मेरे पड़ोसी देशों से कम और मेरे पड़ोसी प्रांतों से ज्यादा है.”

हालांकि, उन्होंने पंजाब की प्रांतीय सीमाओं की सामान्य तौर पर बात की, लेकिन उनकी टिप्पणी खैबर पख्तूनख्वा की तरफ इशारा करती हुई नजर आई, जहां हाल के वर्षों में आतंकी हिंसा तेजी से बढ़ी है. पंजाब की सीमा इस प्रांत से लगती है और साथ ही भारत के साथ इसकी अंतरराष्ट्रीय सीमा भी है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि नदी के किनारे वाले इलाकों, जिन्हें कच्चा इलाके कहा जाता है, में कभी आतंकवाद और अपराध के अड्डे हुआ करते थे, लेकिन अब राज्य ने वहां फिर से अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है.

उन्होंने कहा, “आतंकवाद वहीं से पंजाब में आता है. सभी की नजर पंजाब पर है, लेकिन भगवान का शुक्र है कि पंजाब एक सुरक्षित प्रांत है. हमें जिस तरह के खतरों का सामना करना पड़ता है, वे हमारी सभी प्रांतीय सीमाओं से आते हैं.” उन्होंने कहा कि पंजाब को तीन सीमाओं वाले इलाके के साथ-साथ पड़ोसी प्रांतों से भी खतरा है.

उनकी इस टिप्पणी पर पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के नेताओं ने आलोचना की, जो खैबर पख्तूनख्वा में सरकार चला रही है. नेशनल असेंबली के स्पीकर और PTI के वरिष्ठ नेता असद कैसर ने कहा कि ये “अपमानजनक टिप्पणियां” उनके प्रांत के लोगों और सुरक्षा बलों द्वारा दिए गए बलिदानों को नजरअंदाज करती हैं.

पूर्व सांसद और नेशनल डेमोक्रेटिक मूवमेंट के अध्यक्ष मोहसिन दावर ने भी खतरे को लेकर नवाज के बयान को चुनौती दी. दावर ने कहा, “जिस आतंकवाद को आप अब पंजाब के लिए खतरा बता रही हैं, वह असल में आपके अपने पंजाबी अभिजात वर्ग द्वारा तैयार किया गया था.”

हालांकि, उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब पाकिस्तान को कैसे चलाया जाना चाहिए और क्या देश को नए प्रांतों या प्रशासनिक क्षेत्रों की जरूरत है, इस पर बहस बढ़ रही है. इसी दिन पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने अलग-अलग प्रांत बनाने की अपनी मांग दोहराई.

विश्वविद्यालय ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी में ‘पाकिस्तान में शक्तियों का विकेंद्रीकरण और सुशासन’ पर आयोजित नेशनल पॉलिसी डायलॉग में नकवी ने देश की शासन व्यवस्था में बदलाव की अपनी मांग दोहराई. उन्होंने इसे देश की शासन व्यवस्था का “रीसेट” बताया.

नकवी, जिन्हें सेना प्रमुख असीम मुनीर का करीबी माना जाता है, ने जोर देकर कहा कि “रीसेट” का मतलब सरकार या किसी राजनीतिक पार्टी को बदलना नहीं है. इसके बजाय, उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को उस प्रशासनिक व्यवस्था पर दोबारा विचार करने और उसमें बदलाव करने की जरूरत है, जो दशकों से लोगों को बुनियादी सेवाएं ठीक से देने में नाकाम रही है.

उन्होंने कहा, “आखिरकार नई प्रशासनिक इकाइयां बनानी ही होंगी, क्योंकि पाकिस्तान की बढ़ती आबादी और बदलती जरूरतों को मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था के जरिए अब प्रभावी तरीके से संभाला नहीं जा सकता.”

उन्होंने कहा कि करीब आठ दशक बाद भी पाकिस्तान बुनियादी शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, साफ पीने का पानी और साफ-सफाई जैसी सुविधाएं देने के लिए संघर्ष कर रहा है. उनके मुताबिक, आखिरकार देश को अपनी प्रशासनिक सीमाओं को फिर से तय करना ही होगा.

उन्होंने कहा, “नई प्रशासनिक इकाइयां बनानी होंगी. कोई भी इसे रोक नहीं सकता.”

लेकिन नकवी ने चेतावनी दी कि यह प्रक्रिया किसी एक नेता या पार्टी के इशारे पर नहीं चल सकती.

उन्होंने कहा, “इतना बड़ा फैसला किसी एक व्यक्ति या एक राजनीतिक पार्टी पर थोपा नहीं जा सकता और इसे लोगों की इच्छा के मुताबिक किया जाना चाहिए. अगर लोग नई प्रशासनिक इकाइयां चाहते हैं, तो उन्हें बनाया जाना चाहिए.”

उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी बदलाव को पाकिस्तान के संविधान और कानूनों के मुताबिक होना चाहिए और यह राजनीतिक सहमति के जरिए होना चाहिए.

नकवी ने इस प्रक्रिया की तुलना एक ऐसे परिवार से की जो समय के साथ बढ़ता जाता है और आखिरकार एक ही घर उसके लिए छोटा पड़ जाता है. उन्होंने कहा, “इसी तरह, जैसे-जैसे आबादी बढ़ती है और उसकी जरूरतें बढ़ती हैं, प्रशासनिक व्यवस्था और ढांचे में भी बदलाव होना चाहिए.”

उन्होंने आगे कहा कि संविधान का उल्लंघन किए बिना सत्ता का ज्यादा विकेंद्रीकरण किया जा सकता है. उन्होंने कहा, “संविधान के दायरे में रहते हुए निचले स्तरों तक शक्तियां पहुंचाई जा सकती हैं. किसी भी गैरकानूनी या असंवैधानिक कदम की अनुमति नहीं दी जाएगी.”

उनके प्रस्तावों में से एक इस बात पर विचार करना था कि इस्लामाबाद को प्रांत का दर्जा दिया जाए. गृह मंत्री ने तर्क दिया कि संघीय राजधानी के लोगों को नेशनल फाइनेंस कमीशन अवॉर्ड के तहत हिस्सा नहीं मिलता, जिसके जरिए पाकिस्तान के प्रांतों के बीच केंद्र के संसाधनों का बंटवारा किया जाता है.

उन्होंने कहा, “अगर नए प्रांत बनाए जाने हैं, तो इस्लामाबाद को भी प्रांत का दर्जा दिया जाना चाहिए.”

रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने शुक्रवार को कहा कि सत्ता का विकेंद्रीकरण होना तय है. साथ ही उन्होंने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) पर नए प्रांतों के मुद्दे पर अलग-अलग मापदंड अपनाने का आरोप लगाया.

आसिफ ने X पर लिखा, “जब पंजाब में सरायकी प्रांत बनाने की बात होती है, तो PPP इसका समर्थन करती है या इस मुद्दे पर नरम रुख दिखाती है. और जब चार प्रांतों की जगह कई प्रांतों या प्रशासनिक इकाइयों की बात होती है, तो ‘सिंधुदेश’ की बात शुरू हो जाती है.”

उन्होंने कहा, “सबसे पहले और सबसे बढ़कर हम पाकिस्तानी हैं. 18वें संशोधन के जरिए सत्ता के विकेंद्रीकरण को संवैधानिक सिद्धांत के रूप में तय किया गया था, जिसका सम्मान नहीं किया गया. समय और परिस्थितियों की मांग है कि इसे ईमानदारी के साथ लागू किया जाए.”

उन्होंने कहा, “प्रांत हों या प्रशासनिक इकाइयां, आप इसे जो भी नाम देना चाहते हैं. सत्ता का विकेंद्रीकरण होना तय है.”

इस प्रस्ताव का सिंध में खास तौर पर कड़ा विरोध हुआ है, जहां PPP ने प्रांत को बांटने की संभावना को अपनी स्वायत्तता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए खतरा बताया है. पार्टी ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को ऐसे बयानों को जारी रहने देने के खिलाफ चेतावनी दी और कहा कि वह इसे “सिंध की एकता, प्रांतीय स्वायत्तता और 18वें संशोधन के खिलाफ साजिश” का हिस्सा मान सकती है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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