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Tuesday, 18 June, 2024
होमविदेशG20 वर्ल्ड रिलीजन समिट में भारतीय संत ने कहा- 'विज्ञान-तकनीक युवाओं को शारीरिक सुख की ओर ले जाती है'

G20 वर्ल्ड रिलीजन समिट में भारतीय संत ने कहा- ‘विज्ञान-तकनीक युवाओं को शारीरिक सुख की ओर ले जाती है’

इंडोनेशिया में आयोजित वैश्विक धार्मिक शिखर सम्मेलन के पहले दिन, बुधवार को, इस्लामिक फतवे और विश्व भर के नेताओं द्वारा 'जलवायु परिवर्तन मंचों को संबोधित करके सिर्फ राजनीतिक रूप से सही' दिखने के मुद्दे उठाए गए.

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नई दिल्ली: जहां एक भारतीय संत ने जी-20 धर्म मंच (आर- 20 शिखर सम्मेलन) के पहले दिन, बुधवार को, कहा कि वैज्ञानिक और तकनीकी विकास ने युवाओं को ‘शारीरिक सुख’ वाले जीवन की ओर अग्रसर किया है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता स्वप्न दासगुप्ता ने बाबरी मस्जिद के विध्वंस का उल्लेख करते हुए ‘इतिहास के ‘विवादित मुद्दों’ को का हल निकालने के लिए ‘ट्रुथ एंड रिकंसिलिएशन (सच जानने और सुलह करने)’ का आह्वान किया.

इस बीच, मिस्र के ग्रैंड मुफ्ती ने इस्लामिक फतवे का विषय उठाते हुए उन्हें उग्रवाद से जोड़ा, जबकि नाइजीरिया के एंग्लिकन चर्च के प्राइमेट (अग्रणी बिशप) ने कहा कि विश्व के नेता जलवायु परिवर्तन मंचों को संबोधित करके सिर्फ ‘राजनीतिक रूप से सही’ होने की कोशिश कर रहे हैं.

धार्मिक नेताओं का यह वैश्विक शिखर सम्मेलन, जी-20 अंतर-सरकारी मंचों के संदर्भ में पहली बार हो रहा है और इंडोनेशिया जैसे एक मुस्लिम-बहुल राष्ट्र द्वारा जी-20 के 17वें शिखर सम्मलेन हेतु भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री ऋषि सुनक सहित जी-20 देशों के राष्ट्राध्यक्षों और सरकार के प्रमुखों की अपनी राजधानी बाली में मेजबानी करने से एक सप्ताह पहले शुरू हुआ है. यह शिखर सम्मेलन 15 से 16 नवंबर के बीच होगा.

इंडोनेशिया के सबसे प्रभावशाली इस्लामी संगठन नहदलातुल उलमा (एनयू) द्वारा ‘उदारवादी इस्लाम और वैश्विक शांति’ का प्रचार करने के उद्देश्य से आयोजित इस आर-20 शिखर सम्मेलन को न केवल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की तरफ से खुला समर्थन मिला है, बल्कि इसके राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य राम माधव भारत की तरफ से इस आयोजन के प्रमुख प्रस्तावकों में से एक थे.


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‘भारत को परास्त करने की कोशिश कर रहा है टुकड़े-टुकड़े गैंग’

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि बुधवार को इस शिखर सम्मेलन को संबोधित करने वाले पहले भारतीय वक्ता थे.

उन्होंने कहा, ‘वैज्ञानिक विकास और तकनीकी प्रगति ने युवाओं को भौतिकवाद और शारीरिक सुख के जीवन की ओर अग्रसर किया है, जिसने उन्हें आत्म-केंद्रित बना दिया है. यही कारण है कि युवा पीढ़ी के मन से धर्म के नेक विचार गायब हो रहे हैं.’

उन्होंने आगे कहा कि सभी उपस्थित लोगों का उद्देश्य एक साथ काम करना है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि युवा दिमाग दुनिया भर के धर्मों द्वारा पेश किए जाने वाले नैतिक मूल्यों को आत्मसात करें.

उन्होंने कहा, ‘यह एक मिशन और एक महती कार्य है. वैज्ञानिक विकास ने पूरे पर्यावरण को प्रदूषित कर दिया है. धर्म का प्रयोग समस्याओं के समाधान के लिए करना चाहिए. लेकिन समस्याएं धर्म के नाम पर पैदा की गई हैं, धर्म द्वारा नहीं. आर-20 सभी धर्मों के लिए एक ‘मेल्टिंग पॉट’ (एक विषम समाज को अधिक एकरूप बनने के लिए प्रयुक्त रूपक) है. हम दुनिया के धार्मिक विचारों और अंतरराष्ट्रीय भावनाओं को संतुलित करने के लिए एक साथ आए हैं.’

इस कार्यक्रम के दौरान दिप्रिंट से बात करते हुए गिरी ने कहा कि ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) हिंदुत्व के लिए काम कर रहा है, और हिंदुत्व पूरी दुनिया के लिए काम कर रहा है. हम किसी के भी विरूद्ध नहीं हैं. हमारा उद्देश्य वैश्विक शांति कायम करना है.’ यह कहते हुए कि संघ ‘हिंदुत्व की रक्षा के लिए बना है’, उन्होंने कहा कि ‘विदेशी ताकतों द्वारा वित्त पोषित टुकड़े-टुकड़े गैंग भारत को परास्त करने लिए कड़ी मेहनत कर रहा है.’

गिरी ने कहा, ‘भगवान राम स्वयं भाई-चारे की मिसाल रहे हैं. राम मंदिर उसी का प्रतीक है. जो मुसलमान हिंदू मानस (जीवन के तरीके) से जुड़े हुए हैं, वे डरे हुए या चिंतित नहीं हैं. यह कट्टरपंथी और मौलवी लोग ही हैं जो उन्हें गुमराह कर रहे हैं और भारत की ख़राब छवि दिखाने के लिए उन्हें डराने के साथ-साथ आरएसएस को मुस्लिम विरोधी ताकत के रूप में चिह्नित कर रहे हैं.‘


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‘आधिकारिक नैरेटिव और लोकप्रिय धारणाएं’

भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य स्वपन दासगुप्ता ने अपने संबोधन में आधिकारिक नैरेटिव (आख्यानों) और अतीत के बारे में लोकप्रिय धारणाओं के बीच की ‘फाल्ट लाइन (तनाव रेखा)’ के विषय के बारे में बात की और कहा कि ये भारत सहित कई देशों में मौजूद है.

पूर्व राज्यसभा सांसद ने रहे दासगुप्ता कहा, ‘आधिकारिक आख्यान, जो अक्सर इतिहास के कुरूप तथ्यों के बारे में अतिसंवेदनशील होते हैं, सद्भाव के नाम पर इन तथ्यों को छिपाते हैं, लेकिन ऐसा करने से स्थिति और खराब हो जाती है. जब आधिकारिक आख्यानों और लोकप्रिय धारणा के बीच अंतर होता है, तो यह लोकप्रिय धारणा है जो अक्सर खुद को प्रकट करती है और समस्याओं का कारण बनती है, जैसा कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद विवाद से स्पष्ट रूप से प्रदर्शित हुआ था.’

दासगुप्ता ने आर-20 सम्मलेन के सभी प्रतिभागियों से ‘इतिहास के विवादित मुद्दों को हल करने के बारे में सोचने का आग्रह किया, बशर्ते हम एक ऐसी स्वस्थ समग्र राजनीति प्राप्त करना चाहते हैं जो सद्भाव और राष्ट्र निर्माण में विश्वास करती है. उनका कहना था कि सबको साथ लेकर चलते हुए ‘ट्रुथ एंड रिकंसिलिएशन’ का कोई न कोई रूप होना चाहिए’.

उन्होंने कहा, ‘आधिकारिक मानस में ऐतिहासिक निरंतरता के एक निश्चित स्तर को बढ़ावा देने की आवश्यकता है.’


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‘सभ्यताओं के बीच गठबंधन को प्रोत्साहित करता है इस्लाम’

आर- 20 शिखर सम्मेलन के पहले दिन, दुनिया भर के अन्य धार्मिक नेताओं ने भी फतवे- इस्लामी कानून के अहम् बिंदुओं पर धार्मिक विद्वानों द्वारा जारी फैसले- के मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त की.

मिस्र के ग्रैंड मुफ्ती शकी इब्राहिम अब्देल-करीम आलम ने कहा, ‘हमें एक साथ आने और फतवे के मुद्दे पर तनाव को कम करने की जरूरत है. अगर ऐसा होता है तो उग्रवाद भी कम हो जाएगा, क्योंकि यह कुछ हद तक फतवों से जुड़ा है.’

सऊदी अरब स्थित गैर-लाभकारी संस्था मुस्लिम वर्ल्ड लीग के महासचिव शेख मोहम्मद बिन अब्दुलकरीम अल-इसा ने कहा कि सभी धर्म ‘नेक काम’ सिखाते हैं और अपने अनुयायियों को ‘नेकी की राह’ पर पर ले जाते हैं. उन्होंने कहा कि धर्म के बारे में गलतफहमी ने कई लोगों को यह यकीन दिलाया हुआ है कि धार्मिक पहचान राष्ट्रीय पहचान के साथ टकराती है.

उन्होंने कहा, ‘सभ्यताओं का संघर्ष, चाहे वह प्राचीन काल में हो या आधुनिक काल में, के लिए उन मूल जड़ों को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, जो यह दिखावा करती हैं कि वे धर्मों पर आधारित हैं. सच्चे मुसलमान अपने धार्मिक ग्रंथों के माध्यम से जानते हैं कि धर्म सभ्यताओं के टकराव को खारिज करता है और इसके बजाय सभ्यताओं के बीच के गठबंधन को प्रोत्साहित करता है.’

इस्लामिक समूहों द्वारा ‘निशाना बना कर की जा रही हत्याओं’ के मुद्दे पर रौशनी डालते हुए, नाइजीरिया के चर्च (एंग्लिकन कम्युनियन) के प्राइमेट हेनरी नदुकुबा ने कहा, ‘हमारे समुदायों के खिलाफ जघन्य अपराध किए गए हैं, और विश्व के नेता केवल जलवायु परिवर्तन मंचों को संबोधित करके सिर्फ राजनीतिक रूप से सही दिखने की कोशिश कर रहे हैं. असली मुद्दों पर चर्चा होती ही नहीं है. कई समुदाय पूरी तरह असुरक्षा और भय में जी रहे हैं. हमें उन पर और ध्यान देने की जरूरत है.’

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़नें के लिए यहां क्लिक करें)


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