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Friday, 8 May, 2026
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चीन ने पहली बार माना, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को दी थी मदद

गुरुवार को इंजीनियर झांग हेंग ने बताया कि चार दिन के संघर्ष के दौरान वह पाकिस्तान में मौजूद थे, ताकि जे-10 और उससे जुड़े सिस्टम अपनी पूरी लड़ाकू क्षमता के साथ काम कर सकें.

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नई दिल्ली: ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद और भारत के इस दावे के बाद कि मई 2025 के संघर्ष में चीन ने पाकिस्तान को ज़मीनी मदद दी थी, चीन ने गुरुवार को पहली बार माना कि उसने पाकिस्तान को मौके पर तकनीकी सहायता दी थी.

चीन के सरकारी टीवी नेटवर्क सीसीटीवी पर गुरुवार को प्रसारित एक इंटरव्यू में, एविएशन इंडस्ट्री कॉरपोरेशन ऑफ चाइना के चेंगदू एयरक्राफ्ट डिजाइन एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के इंजीनियर झांग हेंग ने चार दिन के संघर्ष के दौरान पाकिस्तानी सेना के साथ काम करने का अनुभव बताया.

झांग ने कहा, “सपोर्ट बेस पर हम लगातार लड़ाकू विमानों के उड़ान भरने की आवाज़ और एयर रेड सायरन की आवाज़ सुनते थे. सुबह होते-होते तापमान करीब 50 डिग्री सेल्सियस पहुंच जाता था. मानसिक और शारीरिक रूप से यह हमारे लिए बहुत कठिन समय था.”

उनकी टिप्पणी पहली आधिकारिक पुष्टि मानी जा रही है कि संघर्ष के दौरान चीनी कर्मचारी सीधे तौर पर पाकिस्तान के सैन्य अभियान को समर्थन दे रहे थे.

झांग ने कहा कि उनकी टीम का मकसद यह सुनिश्चित करना था कि विमान और उससे जुड़े सिस्टम “अपनी पूरी लड़ाकू क्षमता के साथ काम करें.” पाकिस्तान की वायुसेना चीन में बने जे-10सीई लड़ाकू विमान का इस्तेमाल करती है, जो चीन के जे-10सी मल्टीरोल एयरक्राफ्ट का एक्सपोर्ट वर्जन है.

उन्होंने कहा, “यह सिर्फ जे-10सीई की तारीफ नहीं थी, बल्कि साथ मिलकर काम करने से बने गहरे रिश्ते का भी सबूत था.”

इंस्टीट्यूट के एक दूसरे इंजीनियर शू दा ने इस विमान की तुलना “एक बच्चे” से की, जिसे डिजाइनरों ने तैयार किया और बाद में सेना को सौंप दिया.

शू दा ने कहा, “हमने इसे तैयार किया, इसकी देखभाल की और फिर इसे यूज़र को सौंप दिया. अब यह एक बड़े टेस्ट का सामना कर रहा था.”

उन्होंने कहा, “जे-10सीई ने जो शानदार प्रदर्शन किया, उससे हमें ज्यादा हैरानी नहीं हुई. यह अचानक नहीं लगा. हमें लगता था कि यह होना ही था. विमान को सिर्फ सही मौके का इंतजार था. और जब वह मौका आया, तो उसने वही किया जिसकी हमें उम्मीद थी.”

इन टिप्पणियों को चीन की सैन्य तकनीक की ताकत और पाकिस्तान के रक्षा ढांचे में उसकी बढ़ती रणनीतिक भूमिका को दिखाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

पाकिस्तान फिलहाल जे-10C सीरीज का इस्तेमाल करने वाला इकलौता विदेशी देश है.

2020 में पाकिस्तान ने ऐसे 36 विमान और सैकड़ों पीएल-15 लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलें खरीदी थीं.

बाद में पेंटागन की 2025 चाइना मिलिट्री पावर रिपोर्ट में भी पुष्टि हुई थी कि चीन ने पाकिस्तान को 36 जे-10सी लड़ाकू विमान दिए थे.

हाल के वर्षों में चीन पाकिस्तान का सबसे बड़ा हथियार सप्लायर बन गया है. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट के आंकड़ों के मुताबिक, 2021 से 2025 के बीच पाकिस्तान के करीब 80 प्रतिशत हथियार आयात चीन से हुए.

पाकिस्तान की वायुसेना काफी हद तक जेएफ-17 लड़ाकू विमान पर निर्भर है, जिसे चीनी और पाकिस्तानी इंजीनियरों ने मिलकर तैयार किया है.

डिप्टी चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (कैपेबिलिटी डेवलपमेंट एंड सस्टेनेंस) लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने जुलाई 2025 में कहा था कि मई ऑपरेशन से भारत को सबसे बड़ा सबक यह मिला कि भले ही भारत की एक सीमा हो, लेकिन उसके सामने कम से कम तीन दुश्मन हैं.

उन्होंने कहा था, “पाकिस्तान सामने था. चीन हर संभव मदद दे रहा था. चीन पुराने तरीके पर काम कर रहा था—उधार की छुरी से वार करना. वह खुद सीधे शामिल होने के बजाय पड़ोसी का इस्तेमाल करना चाहता है.”

उस समय उन्होंने यह भी कहा था कि चीन अपने हथियारों का परीक्षण दूसरों के खिलाफ कर सकता है. साथ ही उन्होंने रक्षा और सुरक्षा व्यवस्था की एक बड़ी चिंता का भी जिक्र किया था—चीन अपने सैटेलाइट के जरिए भारतीय सैन्य गतिविधियों पर नज़र रख रहा है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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