ढाका, 11 अक्टूबर (भाषा) बांग्लादेश की एक अदालत गर्भवती भारतीय महिला और तीन अन्य लोगों पर देश में अवैध रूप से प्रवेश करने के मामले में इस माह चौथे सप्ताह में आरोप तय करेगी। इस कदम से उनके स्वदेश लौटने का रास्ता साफ हो सकता है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
कुछ महीने पहले कथित तौर पर भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने इन सभी पर बांग्लादेशी नागरिक होने का संदेह जताते हुए उन्हें बांग्लादेश भेज दिया था।
मुख्य लोक अभियोजक (उत्तर-पश्चिमी) चपाई नवाबगंज एम अब्दुल वदूद ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘वरिष्ठ न्यायिक मजिस्ट्रेट अशरफुल हक ने सोनाली खातून और तीन अन्य लोगों के खिलाफ आरोप तय करने के लिए 23 अक्टूबर की तिथि निर्धारित की है। वे पिछले चार महीनों से जेल में बंद हैं।’’
वदूद ने कहा कि यदि वे सुनवाई के दौरान अपने आरोपों को स्वीकार कर लेते हैं, तो उनके स्वदेश लौटने का रास्ता साफ हो जाएगा। उन्होंने कहा कि उनके अपराध स्वीकार करने की ‘‘संभावना’’ है।
भारत की सीमा से लगे जिले के शीर्ष अभियोजन पक्ष के वकील ने भारतीय मीडिया की उन खबरों का खंडन किया है, जिनमें कहा गया है कि अदालत ने कोलकाता स्थित बांग्लादेश के उप उच्चायोग को उन्हें स्वदेश भेजने की व्यवस्था करने को कहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने हाल में जेल अधिकारियों से भी बात की है, जिन्होंने बताया कि सोनाली गर्भावस्था के अंतिम चरण में है।’’
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब पिछले महीने कलकत्ता उच्च न्यायालय ने छह लोगों को ‘‘अवैध प्रवासी’’ करार देते हुए उन्हें बांग्लादेश वापस भेजने संबंधी केंद्र के फैसले को रद्द कर दिया था।
इसने केंद्र को यह भी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि उन्हें एक महीने के भीतर भारत वापस लाया जाये।
न्यायालय ने आदेश पर अस्थायी रोक लगाने के अनुरोध संबंधी केंद्र सरकार की अपील को भी खारिज कर दिया था।
भाषा
देवेंद्र पवनेश
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