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Wednesday, 25 March, 2026
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बलोच स्टूडेंट्स एक्शन कमेटी ने संस्थानों के बंद होने पर सवाल उठाए, शैक्षणिक संकट पर चिंता जताई

बलूचिस्तान में "शैक्षणिक आपातकाल" होने के बार-बार किए जाने वाले दावों के बावजूद, ज़मीनी हकीकत कुछ और ही है.

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बलूचिस्तान: बलूच स्टूडेंट्स एक्शन कमेटी (BSAC) ने बलूचिस्तान में शिक्षण संस्थानों के लगातार बंद रहने पर गहरी चिंता जताई है. कमेटी का कहना है कि इस लंबे समय से चले आ रहे बंद के कारण छात्रों का शैक्षणिक भविष्य खतरे में पड़ गया है.

X (पहले ट्विटर) पर जारी एक बयान में, संगठन ने इस स्थिति को क्षेत्र के छात्र समुदाय के लिए बेहद अनिश्चित और नुकसानदायक बताया है.

संगठन के केंद्रीय प्रवक्ता द्वारा जारी बयान के अनुसार, बलूचिस्तान में शिक्षण संस्थानों को पिछले कई सालों से बार-बार और बिना किसी स्पष्ट कारण के बंद किया जाता रहा है.

BSAC ने आरोप लगाया कि कई बार फंड की कमी या शिक्षकों के वेतन से जुड़े मुद्दों का हवाला देकर विश्वविद्यालयों को बंद कर दिया जाता है, जबकि अन्य मामलों में, मरम्मत और रखरखाव के काम के बहाने लंबे समय तक शैक्षणिक गतिविधियां रोक दी जाती हैं.

संगठन ने कहा कि इस तरह की रुकावटों ने लगातार छात्रों को शिक्षा के उनके मौलिक अधिकार से वंचित रखा है.

बयान में आगे कहा गया है कि ये बहाने जनता को समझाने में नाकाम रहे हैं; कई लोग इन्हें वास्तविक प्रशासनिक चुनौतियों के बजाय व्यवस्थागत उपेक्षा के संकेत के रूप में देखते हैं.

X पर की गई पोस्ट में प्रवक्ता के हवाले से कहा गया है, “ये कदम शैक्षणिक सद्भावना को नहीं, बल्कि शैक्षणिक शत्रुता को दर्शाते हैं.”

मौजूदा हालात पर प्रकाश डालते हुए, BSAC ने दावा किया कि ‘ग्रीष्मकालीन क्षेत्र’ के संस्थान एक महीने से अधिक समय से बंद हैं, जबकि ‘शीतकालीन क्षेत्र’ के संस्थानों में शैक्षणिक गतिविधियां लगभग चार महीनों से ठप पड़ी हैं.

समूह ने कहा कि इस रुकावट ने शैक्षणिक कैलेंडर को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे छात्रों का पाठ्यक्रम अधूरा रह गया है और उनके बीच अनिश्चितता बढ़ती जा रही है.

संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि बलूचिस्तान में “शैक्षणिक आपातकाल” होने के बार-बार किए जाने वाले दावों के बावजूद, ज़मीनी हकीकत कुछ और ही है. यह हकीकत भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद जैसी गहरी समस्याओं को दर्शाती है, जिन्होंने शिक्षा व्यवस्था को कमज़ोर कर दिया है.

संगठन ने बताया कि जहां एक ओर डिजिटल प्रगति को लेकर चर्चाएं जारी हैं, वहीं दूसरी ओर इस क्षेत्र के कई स्कूल या तो केवल कागज़ों पर ही मौजूद हैं, या फिर उनमें बुनियादी ढांचे का भी अभाव है; ये स्कूल देखने में किसी वीरान या परित्यक्त इमारत जैसे लगते हैं.

BSAC ने कहा कि पिछले एक महीने के दौरान बिना किसी स्पष्ट औचित्य के बार-बार संस्थान बंद करने के आदेश जारी किए गए हैं, जिससे छात्रों में मानसिक तनाव और चिंता बढ़ रही है.

समूह ने आरोप लगाया कि इस तरह के कदम एक सोची-समझी साज़िश का हिस्सा प्रतीत होते हैं, जिसका मकसद बलूचिस्तान के युवाओं को शैक्षणिक रूप से पिछड़ा रखना और उनकी बौद्धिक प्रगति में बाधा डालना है.

BSAC ने उच्च अधिकारियों और शिक्षा विभाग से आग्रह किया है कि वे तत्काल कार्रवाई करते हुए शिक्षण संस्थानों को फिर से खोलें, शैक्षणिक गतिविधियों को बहाल करें, और यह सुनिश्चित करें कि छात्रों का भविष्य अब और अधिक खतरे में न पड़े.


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