(सज्जाद हुसैन)
इस्लामाबाद, एक अक्टूबर (भाषा) अफगानिस्तान के विपक्षी नेताओं और नागरिक संगठनों के कार्यकर्ताओं ने अफगानिस्तान की अंतरिम सरकार पर दबाव बढ़ाने के लिए इस्लामाबाद में एक पूर्ण राजनीतिक कार्यालय की स्थापना की मांग की है।
यहां 29-30 सितंबर को बंद कमरे में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में उन्होंने तर्क दिया कि तालिबान का इस्लामिक अमीरात अफगान लोगों का प्रतिनिधित्व नहीं करता है।
‘एकता और विश्वास की ओर’ नामक इस सम्मेलन का आयोजन ‘साउथ एशियन स्ट्रेटजिक स्टेबलिटी इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी’ (एसएएसएसआई) द्वारा किया गया। इसे जिनेवा स्थित ‘वुमेन फॉर अफ़ग़ानिस्तान’ (डब्ल्यूएफए) का समर्थन प्राप्त था और इसमें महिलाओं सहित कम से कम 37 अफ़ग़ान नेताओं ने भाग लिया।
इस कार्यक्रम में शामिल होने वाले प्रमुख अफगान राजनीतिक और सामाजिक हस्तियों में पूर्व सांसद और महिला अधिकार कार्यकर्ता फौजिया कूफी, काबुल के पूर्व गवर्नर अहमद उल्लाह अलीजई, बदख्शां के नेता अमन उल्लाह पैमन और कार्यकर्ता राहील तलाश शामिल थे।
संयुक्त राष्ट्र महिला, अमेरिका स्थित नेशनल एंडोमेंट फॉर डेमोक्रेसी (एनईडी) और स्विस फेडरल फॉरेन अफेयर्स (एफडीएफए) द्वारा वित्त पोषित इस सम्मेलन को शांतिपूर्ण अफगानिस्तान के लिए एक सामूहिक दृष्टिकोण बनाने के प्रयास के रूप में तैयार किया गया।
‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की खबर के अनुसार, प्रतिभागियों ने तालिबान शासन को स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के प्रतिभागियों ने पहले चरण में ‘शांतिपूर्ण दबाव रणनीति’ का आह्वान किया।
कुछ प्रतिभागियों ने यह मांग भी की कि पाकिस्तान अफगान विपक्षी समूहों के लिए तब तक औपचारिक रूप से राजनीतिक कार्यालय खोले जब तक कि उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं।
फौजिया कूफी ने पाकिस्तान की क्षेत्रीय भूमिका पर जोर देते हुए कहा, ‘पाकिस्तान सबसे बड़ा क्षेत्रीय खिलाड़ी है और उसकी नीतियां उसके पड़ोसियों को प्रभावित करती हैं। इसीलिए हमने इस सत्र का पहला चरण इस्लामाबाद में आयोजित किया, और आगे भी ऐसे सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।’
उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में 1.8 करोड़ महिलाएं रहती हैं, जिनका तालिबान शासन में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। उन्होंने कहा, ‘एक समूह देश के 90 प्रतिशत लोगों के लिए फैसले नहीं ले सकता।’
भाषा आशीष पवनेश
पवनेश
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