नई दिल्ली: बलूचिस्तान के अशांत इलाके मस्तुंग के पास गुरुवार को एक सुरक्षा काफिले पर घात लगाकर हमला किया गया. बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हमले में 45 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए. बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है. पिछले दो हफ्तों से भी कम समय में बलूचिस्तान में सुरक्षा बलों पर यह तीसरा बड़ा हमला है.
पाकिस्तानी सेना ने हमले की पुष्टि की है, लेकिन अभी तक आधिकारिक तौर पर मारे गए सैनिकों की संख्या नहीं बताई है.
BLA के प्रवक्ता जीयंद बलोच ने मीडिया को जारी बयान में कहा कि उनके लड़ाकों ने सुरक्षा काफिले, उसकी सुरक्षा में चल रहे जवानों और हमले के बाद मौके पर पहुंची अतिरिक्त सैन्य टुकड़ियों को निशाना बनाया. उन्होंने कहा कि यह हमला संगठन की फतेह स्क्वाड ने मिलकर किया.
प्रवक्ता ने यह भी दावा किया कि बयान जारी होने तक BLA और पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ जारी थी और मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है.
इस हफ्ते पाकिस्तानी सेना ने ऑपरेशन शाबान शुरू किया है. इससे पहले जियारत जिले के मंगी डैम इलाके में हुए हमलों में 27 पुलिसकर्मी और लसबेला में 11 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे. रिपोर्टों के अनुसार, यह अभियान सेना, फ्रंटियर कॉर्प्स और बलूचिस्तान पुलिस मिलकर चला रही हैं. इसमें खुफिया एजेंसियों और वायुसेना की भी मदद ली जा रही है.
हमलों पर प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने कहा कि सेना हमले के जिम्मेदार लोगों का पीछा करेगी. उन्होंने चेतावनी दी कि जवाबी कार्रवाई में उग्रवादियों को किसी तरह की नरमी की उम्मीद नहीं करनी चाहिए.
बलूचिस्तान, पाकिस्तान का सबसे बड़ा लेकिन सबसे कम आबादी वाला प्रांत है. यहां लंबे समय से अलगाववादी आंदोलन चल रहा है. आंदोलनकारी ज्यादा राजनीतिक अधिकार और प्रांत के प्राकृतिक संसाधनों में बड़ा हिस्सा मांगते रहे हैं.
यह प्रांत ईरान और अफगानिस्तान की सीमा से लगा हुआ है और यहां ग्वादर बंदरगाह भी है, जिसे चीन ने अपनी बेल्ट एंड रोड परियोजना के तहत विकसित किया है.
बलूचिस्तान के खनिज संसाधन और रणनीतिक स्थिति इसे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण बनाते हैं, लेकिन यही वजह इसे सुरक्षा चुनौतियों का भी बड़ा केंद्र बनाती है.
पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, सरकार ने चार सदस्यीय समिति बनाई है. यह समिति हमलों की पूरी घटनाक्रम की जांच करेगी, सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करेगी और यह पता लगाएगी कि क्या कानून-व्यवस्था से जुड़ी एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी की वजह से यह हमला हुआ.
इससे पहले 6 से 9 जुलाई के बीच भी तीन बड़े हमले हुए थे. इनमें एक हमला BLA और दो हमले तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने किए थे. 7 जुलाई के टीटीपी हमले के बाद बंधक संकट पैदा हो गया था.
उस समय सेना के प्रवक्ता अहमद शरीफ चौधरी ने बताया था कि टीटीपी के लड़ाकों ने एक चौकी पर कब्जा करने के बाद 18 पुलिसकर्मियों का अपहरण कर लिया था. सेना के अनुसार, बाद में सभी बंधकों की हत्या कर दी गई. यह हाल के वर्षों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर सबसे घातक हमलों में से एक था.
8 जुलाई को लसबेला जिले के बेला-विंडर इलाके में N-25 हाईवे के पास सेना के काफिले पर भी घात लगाकर हमला किया गया था. पाकिस्तानी सेना ने इसका आरोप BLA पर लगाया और कहा कि इसमें 11 सैनिक मारे गए.
हालांकि, BLA ने दावा किया कि उसने 17 सैनिकों को मार गिराया और सेना के काफिले से हथियार और सैन्य उपकरण भी कब्जे में लिए. इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)