कोलंबो, 18 मई (भाषा) दक्षिण श्रीलंका से देश के बहुसंख्यक सिंहल समुदाय के सैकड़ों सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने 13 साल पहले समाप्त हुए गृहयुद्ध के अंतिम चरण में मारे गए तमिल नागरिकों, विद्रोहियों और सरकारी सैनिकों के प्रति पहली बार बुधवार को शोक व्यक्त किया।
द्वीपीय राष्ट्र के उत्तरी और पूर्वी प्रांत में एक अलग तमिल राज्य स्थापित करने की मांग को लेकर लिबरेशन टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम (लिट्टे) के नेतृत्व में तीन दशक लंबे खूनी अलगाववादी आंदोलन का अंत 18 मई 2009 को लिट्टे सुप्रीमो वी. प्रभाकरण के मारे जाने के साथ ही समाप्त हो गया था।
हर साल 18 मई को, जहां सशस्त्र बल युद्ध की जीत का जश्न मनाते हैं, वहीं, तमिल संघर्ष के अंतिम चरण के दौरान मारे गए व्यक्तियों के लिए शोक मनाते हैं।
सरकार विरोधी प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के कार्यालय के बाहर एकत्र हुए और गृहयुद्ध में मारे गए सभी लोगों के लिए प्रार्थना की। इनमें तमिल नागरिक, तमिल विद्रोही और सरकारी सैनिक शामिल थे।
आयोजकों ने एक बयान में कहा, ‘‘18 मई को हम उन सभी लोगों को याद करते और उनके प्रति शोक जताते के लिए इकट्ठा हुए हैं, जो युद्ध में मारे गए थे या लापता हो गए थे।’’
भाषा अमित दिलीप
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