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Saturday, 31 January, 2026
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नेपाल के प्रधानमंत्री के रूप में ओली की नियुक्ति के खिलाफ दायर याचिका संविधान पीठ को सौंपी

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काठमांडू, 21 जुलाई (भाषा) नेपाल के उच्चतम न्यायालय ने रविवार को ‘गंभीर संवैधानिक व्याख्या’ की जरूरत का हवाला देकर उस याचिका को एक संविधान पीठ को सौंप दिया जिसमें देश के प्रधानमंत्री के रूप में केपी शार्मा ओली की नियुक्ति को चुनौती दी गई है।

इस सप्ताह की शुरुआत में 72 वर्षीय ओली ने चौथी बार हिमालयी राष्ट्र के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद रविवार को संसद में विश्वास मत जीता।

अनुभवी वामपंथी नेता के सोमवार को शपथ ग्रहण करने के कुछ ही घंटों के भीतर तीन अधिवक्ताओं – दीपक अधिकारी, खगेंद्र प्रसाद चपागेन और शैलेन्द्र कुमार गुप्ता ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर करके दलील दी कि ओली की नियुक्ति असंवैधानिक थी। याचिका में ओली की नियुक्ति को रद्द करने के लिए परमादेश आदेश जारी करने का अनुरोध किया गया है।

‘द काठमांडू पोस्ट’ अखबार की खबर के अनुसार, न्यायमूर्ति बाल कृष्ण ढकाल की एकल पीठ ने रविवार को ‘गंभीर संवैधानिक व्याख्या’ की आवश्यकता का हवाला देते हुए मामले को उच्चतम न्यायालय की संवैधानिक पीठ को भेज दिया।

याचिका में कहा गया है कि यदि अनुच्छेद 76 (2) के अनुसार बनी सरकार प्रतिनिधि सभा में शक्ति परीक्षण में विफल रहती है तो राष्ट्रपति को अनुच्छेद 76 (3) के तहत नई सरकार के गठन के लिए किसी दल को बुलाना चाहिए।

अनुच्छेद 76(3) के अनुसार, राष्ट्रपति को सबसे बड़ी पार्टी के संसदीय दल के नेता को प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त करने की अनुमति है जिसे 30 दिनों के भीतर विश्वास मत हासिल करना होता है।

खबर में कहा गया है कि ऐसी स्थिति में नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा प्रतिनिधि सभा में सबसे बड़ी पार्टी के संसदीय दल के नेता के रूप में प्रधानमंत्री बनेंगे।

नेपाल को लगातार राजनीतिक उथल-पुथल का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि गणतांत्रिक प्रणाली लागू होने के बाद से पिछले 16 सालों में देश ने 14 सरकारें देखी हैं।

भाषा संतोष नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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