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Sunday, 12 April, 2026
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खरपतवार: अच्छा, बुरा, और कभी-कभी सुंदर

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(बारबरा बराइबर पाड्रो और जोर्डी रिकासेन्स गुइनजुआन, यूनिवर्सिटैट डी लेलिडा) कैटलोनिया (स्पेन), 14 अप्रैल (द कन्वरसेशन) वसंत आ गया है और कई खेतों में फसलों के बीच खसखस के लाल पौधे बिंदियों की तरह दिखाई दे रहे हैं। किसान जानते हैं कि यह एक अच्छा संकेत नहीं है, भले ही सैकड़ों लोग हाथ में मोबाइल फोन लेकर इनकी एक अच्छी तस्वीर लेते दिखाई दें।

खसखस, खेतों में उगने वाली खरपतवार की अन्य प्रजातियों के साथ, बड़ी संख्या में दिखाई देने पर फसलों के लिए एक समस्या हो सकती है। हम अनौपचारिक रूप से उन्हें खरपतवार कहते हैं, लेकिन वे वास्तव में क्या हैं और कितने बुरे हैं?

खेती वाले पौधों जैसे

खरपतवार आम तौर पर वार्षिक या बहु-वार्षिक जड़ी-बूटी वाले पौधों की प्रजातियाँ होती हैं जो अकसर विपरीत परिस्थितियों में अपना अस्तित्व बनाए रखने के अनुकूल होती हैं जैसे कि फसलों के खेत। उनकी उत्तरजीविता रणनीति यह होती है कि जितना संभव हो सके फसल से मिलती जुलती हों, ताकि उन्हें उखाड़ फेंकना संभव न हो।

इसके लिए, वे फसल के समान समय पर अंकुरित, फूल या परिपक्व होते हैं, या उनके पास समान विकास रणनीति होती है।

ऐसी प्रजातियाँ हैं जो सर्दियों के अनाज चक्र के लिए अत्यधिक अनुकूलित हैं, जैसे कि पोस्ता (पापावर रोहिस) और वार्षिक राईग्रास (लोलियम रिगिडम)। अन्य, जैसे लैंब क्वार्टर (चेनोपोडियम एल्बम) और रेडरूट पिगवीड (ऐमारैंथस रेट्रोफ्लेक्सस), गर्मियों की फसलों (उदाहरण के लिए, मकई) के अनुकूल होते हैं, जिनमें वर्षा जल या सिंचाई उपलब्ध होती है।

मोटे तने वाली फसलों के खेतों जैसे कि जैतून के पेड़ों और अंगूर के बागों की भी अपनी प्रजातियाँ होती हैं जैसे वॉल-रॉकेट (डिप्लोटैक्सिस एसपीपी।)

इन मामलों में, पौधे प्रबंधन (कटाई, जुताई) के लिए अधिक अनुकूलित होते हैं और फसल के समय के लिए नहीं।

उनकी अनुकूलन रणनीति के दृष्टिकोण से, खरपतवार ऐसे पौधे हैं जो उपजाऊ वातावरण में पनपते हैं, जहां नियमित रूप से कटाई, गुड़ाई होती रहती है। फसलों के खेत उन प्राथमिक स्थानों में से एक हैं जहाँ ये स्थितियाँ होती हैं।

खेतों में फसलों के लिए उच्च स्तर की खाद डाली जाती है और मिट्टी में बुआई, गुड़ाई के साथ ही शाकनाशियों का उपयोग शामिल है।

खरपतवार : क्या वे हमेशा खराब होते हैं?

क्योंकि वे उसी स्थान पर उगते हैं, जहां फसलें उगाई जाती हैं इसलिए खरपतवार स्थान, प्रकाश और पानी और पोषक तत्वों जैसे संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। यह अनुमान लगाया गया है कि, दुनिया भर में, ये पौधे फसल को 30 प्रतिशत तक कम कर सकते हैं। ये ऐसे पौधे हैं जो फसल को सबसे अधिक हानि पहुँचाते हैं, यहाँ तक कि कीट और फसल रोगों से भी अधिक।

फसल के नुकसान के अलावा, खरपतवार काटे गए उत्पाद (अनाज या चारा संदूषण) की गुणवत्ता को कम कर सकते हैं, फसलों तक रोग पहुंचा सकते हैं और कृषि कार्यों को और अधिक कठिन बना सकते हैं।

हालाँकि, कुछ प्रजातियाँ और उनके बीज भी पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएँ प्रदान करने में योगदान करते हैं। उदाहरण के लिए, वे जैव विविधता में योगदान करते हैं, लाभकारी कीड़ों और परागणकों की मेजबानी करते हैं, पक्षियों को खिलाते हैं, और वर्ष के निश्चित समय पर क्षरण को कम करते हैं।

तो फिर, क्या निर्धारित करता है कि एक पौधा एक खरपतवार है?

यद्यपि यह एक जटिल प्रश्न है, जिसका उत्तर पौधे के घनत्व और वृद्धि के समय, संबंधित फसल के साथ इसकी प्रतिस्पर्धात्मकता और इसके बीज उत्पादन में निहित है।

यह सच है कि कुछ बहुत प्रतिस्पर्धी प्रजातियां (जैसे क्लीवर, गैलियम अपरीन) बदले में लाभकारी कीड़ों की एक विशाल सरणी को आश्रय देकर पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं को बढ़ावा दे सकती हैं। हालांकि, अधिक आक्रामक और प्रमुख प्रजातियां आमतौर पर वे नहीं होती हैं जो इन सकारात्मक प्रभावों को प्रदान करने में सर्वश्रेष्ठ होती हैं।

अनुचित हैंडलिंग के परिणाम

एक पौधा ‘‘खरपतवार’’ तभी बनता है, जब वह फसलों के खेतों में पनपता है, और यहीं पर विरोधाभास आता है: अनुचित प्रबंधन के कारण कई सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी और आक्रामक खरपतवार पनपने लगते हैं।

उदाहरण के लिए, खराब फसल रोटेशन के साथ-साथ शाकनाशियों के अत्यधिक उपयोग ने कई प्रजातियों में, इन रासायनिक उत्पादों के प्रतिरोधी बायोटाइप के चयन को बढ़ावा दिया है। इससे फसलों पर उनका प्रभाव बढ़ जाता है और यह नियंत्रण विकल्पों को और अधिक कठिन बना देता है।

इसी तरह, उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग ने, कुछ मामलों में, ऐसे परिदृश्यों के अनुकूल बहुत प्रतिस्पर्धी प्रजातियों के विकास को बढ़ावा दिया है।

ज्यादातर मामलों में जहां खरपतवार बड़ी उपज हानि का कारण बनते हैं, एक या कुछ प्रजातियां जो कार्यात्मक रूप से एक-दूसरे के समान होती हैं, इसके लिए जिम्मेदार होती हैं।

इसका मतलब यह है कि इन प्रजातियों में समान अंकुरण समय या समान विकास रणनीति और संसाधनों का समावेश होता है। उदाहरण के लिए, अनाज के खेतों में, हम वार्षिक राईग्रास, जंगली जई (एवेना स्टेरिलिस) और पोस्ता देख सकते हैं।

इसी तरह, मकई के खेतों में, लैंब क्वार्टर, ब्लैक नाइटशेड (सोलनम नाइग्रम), और फॉक्सटेल (सेटेरिया एसपीपी) उल्लेखनीय हैं।

ये प्रजातियां वे हैं जो पर्यावरण (तापमान, वर्षा/सिंचाई, आदि) और फसल प्रबंधन (खेतों में काम करना, शाकनाशी, आदि) द्वारा लगाए गए सभी उपायों में अपना अस्तित्व बनाए रखने का प्रबंधन करती हैं। वे सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी प्रजातियां हैं और दूसरों को विस्थापित करती हैं।

उन्हें नियंत्रित करने की कोशिश करने के लिए, हम कभी-कभी उन्हीं साधनो (शाकनाशियों की अधिक खुराक, सामान्य रूप से अधिक काम) का उपयोग करते हुए उनके खिलाफ दबाव बढ़ाने के चक्कर में पड़ जाते हैं और उस प्रणाली को नहीं छोड़ते हैं, जिसकी वजह से ही उनकी बढ़वार होती है।

किसानों के इस तरह से व्यवहार करने के कई अच्छे कारण हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि कभी-कभी यह मानसिकता समस्या को और भी बदतर बना देती है।

क्या हम खरपतवार के साथ रह सकते हैं?

इस दुष्चक्र से बाहर निकलने के लिए विविधता लाना आवश्यक है – न केवल फसलें, बल्कि मृदा-प्रबंधन रणनीति, खरपतवार नियंत्रण उपकरण, फसल के समय और मानसिकता भी।

मध्यम और लंबी अवधि में, एग्रोइकोसिस्टम के विविधीकरण के परिणामस्वरूप खरपतवार समुदायों का विविधीकरण भी होता है।

कुछ हालिया अध्ययन इस बात की पुष्टि करते हैं कि खरपतवारों की विविधता जितनी अधिक होगी, परिणामी समुदाय की फसल के साथ उतनी ही कम प्रतिस्पर्धा होगी।

जितनी अधिक प्रजातियाँ एक स्थान पर सह-अस्तित्व में होती हैं, वहाँ एक प्रमुख प्रजाति होने की संभावना उतनी ही कम होती है।

यह अपने आप से पूछने योग्य है कि क्या हम ऐसे खरपतवार समुदायों को डिजाइन कर सकते हैं जो कम प्रतिस्पर्धी हैं। यही वह काम है जो हम कर रहे हैं: उत्पादक एग्रोइकोसिस्टम को डिजाइन करने की कोशिश कर रहे हैं जिसमें फसलों (और खरपतवारों) के जीवन को नियंत्रित करने वाली पारिस्थितिक प्रक्रियाओं के साथ प्रबंधन हो।

द कन्वरसेशन एकता एकता

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यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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