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Tuesday, 10 March, 2026
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बर्मिंघम में नहीं दिख रहा राष्ट्रमंडल खेलों का जोश

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बर्मिंघम, 26 जुलाई (भाषा) लंदन ओलंपिक (2012) के बाद इंग्लैंड अपने सबसे बड़े खेल आयोजन राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी के लिए तैयार है लेकिन स्थानीय लोगों में इसे लेकर जोश और जुनून की कमी दिख रही है।

बर्मिंघम को उसके ‘बुल्स रिंग’ के लिए जाना जाता है इसलिए राष्ट्रमंडल खेलों का शुभंकर ‘पैरी’ भी बुल (सांड) की तरह दिखता है।

बर्मिंघम पहुंचने पर इधर-उधर राष्ट्रमंडल खेलों से जुड़े पोस्टर और कुछ बोर्ड जरूर दिखते हैं लेकिन इंग्लैंड के दूसरे सबसे बड़े शहर और वह भी एशियाई लोगों की अधिक आबादी वाले शहर के हिसाब से यह नाकाफी है।

राष्ट्रमंडल के 72 देशों के 5000 से अधिक खिलाड़ी इस बहु-खेल प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए तैयार हैं, लेकिन यहां की आम जनता में इसे लेकर कोई खास रोमांच नहीं है।

ऐसा लग रहा है कि लोग इन खेलों से ज्यादा दिलचस्पी महिला यूरो फुटबॉल चैम्पियनशिप में ले रहे है। स्थानीय अखबारों में राष्ट्रमंडल खेलों की जगह यूरो को तवज्जो मिल रही है।

भाषा आनन्द सुधीर

सुधीर

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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