नयी दिल्ली, 10 नवंबर (भाषा) ट्रैक एवं फील्ड की डोपिंग रोधी निगरानी संस्था एथलेटिक्स इंटीग्रिटी यूनिट (एआईयू) ने सोमवार को भारतीय लंबी दूरी की धाविका वर्षा टेकम के तीन साल के डोपिंग प्रतिबंध मामले की फिर से समीक्षा की ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि किसी एथलीट को डोपिंग जांच कराने के लिए सूचित किये जाने के बाद उसे उसका पालन करना अनिवार्य है।
पिछले साल पुणे हाफ मैराथन में तीसरे स्थान पर रही वर्षा को एआईयू ने डोप जांच से बचने पर पांच जून को तीन साल के निलंबन की सजा सुनाई थी। उन्हें इससे पहले 26 मई को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया था।
पिछले साल 15 दिसंबर को आयोजित हाफ मैराथन में तीसरे स्थान पर रहने के बाद वर्षा से प्रतियोगिता के दौरान परीक्षण के लिए संपर्क किया गया था। उन्हें डोपिंग नियंत्रण अधिकारी (डीसीओ) द्वारा सूचित किया गया और निगरानी में रखा गया।
एआईयू ने ‘एक्स’ पर लिखा कि विजय समारोह की प्रतीक्षा करते समय उन्होंने कहा कि वह पानी लेने जा रही हैं लेकिन वह भीड़ में गायब हो गईं और फिर वापस नहीं लौटीं। बार-बार घोषणाओं और कॉल के बावजूद उनका पता नहीं लगाया जा सका। इससे उनका नमूना एकत्र नहीं किया जा सका।
तकनीकी प्रतिनिधि ने उस होटल से भी संपर्क किया जहां यह खिलाड़ी पिछली शाम रुकी थीं, लेकिन होटल ने पुष्टि की कि वह उस दिन पहले ही अपने कमरे से चेक आउट कर चुकी थीं।
एआईयू ने कहा कि परीक्षण से बचना एक गंभीर उल्लंघन था और वर्षा को ‘किसी खिलाड़ी द्वारा नमूना संग्रह से बचने, इनकार करने या उसे प्रस्तुत करने में विफल रहने’ से संबंधित नियम 2.3 का उल्लंघन करते पाया गया।
इस अपराध के लिए सामान्यतः चार साल का प्रतिबंध लगाया जाता है, लेकिन उसने उल्लंघन जल्दी स्वीकार कर लिया था, इसलिए प्रतिबंध को घटाकर तीन साल कर दिया गया।
उसका प्रतिबंध 20 मई से शुरू हुआ, जो कि अस्थाई निलंबन की तारीख है और 15 दिसंबर, 2024 के बाद के उसके परिणामों को अयोग्य घोषित कर दिया गया।
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