बैडमिंटन
पुरुष एकल:
एचएस प्रणय: स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से पार पाने के बाद एचएस प्रणय ने जब कोर्ट पर वापसी की तो उन्होंने पहले से बेहतर प्रदर्शन किया जिसके दम पर पिछले साल दिसंबर में वह विश्व रैंकिंग में शीर्ष 10 में शामिल हो गए। पिछले 12 महीनों में उन्होंने निरंतरता बनाए रखी। उन्होंने मई में मलेशिया मास्टर्स का खिताब जीता और फिर विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक हासिल किया जिसके दम पर वह अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ छठी रैंकिंग पर पहुंचने में सफल रहे।
पुरुष युगल:
सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी: सात्विक और चिराग ने इस साल अभी तक बेहतरीन प्रदर्शन किया है। वह एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय जोड़ी बनी। पिछले साल उन्होंने इंडियन ओपन सुपर 500 और राष्ट्रमंडल खेलों में खिताब जीता था और फिर बाद में तोक्यो में विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक हासिल किया था।
पुरुष टीम चैंपियनशिप: भारत ने पुरुष टीम स्पर्धाओं में अब तक तीन कांस्य पदक जीते हैं लेकिन एशियाई खेलों में वह थॉमस कप की ऐतिहासिक जीत से बड़े मनोबल के साथ उतरेगा। भारतीय टीम में वही खिलाड़ी शामिल है जिन्होंने थॉमस कप जीता था। इनमें प्रणय, किदांबी श्रीकांत, लक्ष्य सेन तथा सात्विक और चिराग की जोड़ी शामिल है। इन खिलाड़ियों की फॉर्म को देखते हुए भारत स्वर्ण पदक के प्रबल दावेदार के रूप में शुरुआत करेगा।
क्रिकेट:
पुरुष और महिला टीम: भारत की पुरुष क्रिकेट टीम रुतुराज गायकवाड़ की अगुवाई में स्वर्ण पदक के प्रबल दावेदार के रूप में उतरेगी क्योंकि टीम में अधिकतर ऐसे खिलाड़ी हैं जो आईपीएल में खेलते रहे हैं। एशियाई खेलों में क्रिकेट टी20 प्रारूप में ही खेला जाएगा।
महिला टीम भी खिताब की प्रबल दावेदार है लेकिन बांग्लादेश के खिलाफ हाल के खराब प्रदर्शन और कप्तान हरमनप्रीत कौर के पहले दो मैचों से बाहर रहने के कारण टीम की योजनाओं को नुकसान पहुंचा है। इसके बावजूद टीम को स्वर्ण पदक का दावेदार माना जा रहा है।
हॉकी:
पुरुष: तोक्यो ओलंपिक खेलों की कांस्य पदक विजेता भारतीय पुरुष हॉकी टीम एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक का प्रबल दावेदार है। भारतीय टीम अभी विश्व में तीसरे नंबर पर है तथा उसकी फॉर्म और फिटनेस को देखते हुए अगर हरमनप्रीत सिंह की अगुवाई वाली टीम स्वर्ण पदक जीतने में नाकाम रहती है तो यह उसके लिए करारा झटका होगा।
महिला: पुरुष टीम की तरह है भारतीय महिला हॉकी टीम पदक जीतने की प्रबल दावेदार है। सविता पूनिया की अगुवाई वाली टीम विश्व रैंकिंग में सातवें स्थान पर है लेकिन एशियाई देशों में वह शीर्ष पर काबिज है। भारतीय महिला टीम एशियाई खेलों में केवल एक बार 1982 में स्वर्ण पदक जीत पाई थी। उसके पास इस बार यह कारनामा दोहराने का सुनहरा अवसर है।
निशानेबाजी:
रुद्रांक्ष पाटिल (पुरुष 10 मीटर एयर राइफल) : इस 19 वर्षीय खिलाड़ी ने 2022 में काहिरा में विश्व चैंपियनशिप ने जीत दर्ज की थी और पेरिस ओलंपिक के लिए कोटा हासिल किया था। अपने इस प्रदर्शन के कारण हुआ एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक के प्रबल दावेदार बन गए हैं।
मनु भाकर (महिला 25 मीटर पिस्टल): तोक्यो ओलंपिक खेलों में निराशाजनक प्रदर्शन करने वाली मनु भाकर स्वर्ण पदक की प्रबल दावेदार है। वह जकार्ता एशियाई खेलों में भी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई थी जिसकी भरपाई वह हांगझोउ में करना चाहेगी।
स्क्वाश:
सौरव घोषाल: भारत के नंबर एक पुरुष खिलाड़ी घोषाल 2014 के एशियाई खेलों में फाइनल में हार गए थे। इस बार भी वह खिताब के दावेदार के रूप में शुरुआत करेंगे। इस भारतीय खिलाड़ी को एकल में दूसरी वरीयता प्राप्त है। उन्हें मलेशिया की इयन यो के अलावा पाकिस्तान, कुवैत और ईरान के खिलाड़ियों से भी कड़ी चुनौती मिलने की संभावना है।
जोशना चिनप्पा: रिकॉर्ड 19 बार की राष्ट्रीय चैंपियन जोशना इस साल चोटों से जूझती रही। इससे वह विश्व रैंकिंग में 71वें वह स्थान पर खिसक गई। इसके बावजूद महिला एकल में वह भारत की तरफ से पदक की प्रबल दावेदार है।
मिश्रित युगल-दीपिका पल्लीकल और हरिंदरपाल संधू: दीपिका और मिश्रित युगल के उनके साथी हरिंदर पाल को तीन महीने पहले हांगझोउ में एशियाई खेलों की परीक्षण प्रतियोगिता में भाग लेने का मौका मिला था जिसमें उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था। इस परिणाम के बाद उनसे पदक की उम्मीद बढ़ गई है।
टेबल टेनिस
पुरुष टीम: भारतीय पुरुष टीम में अपना पांचवें और अंतिम एशियाई खेलों में भाग ले रहे शरत कमल, जी साथियान और हरमीत देसाई शामिल हैं। उन्होंने जकार्ता एशियाई खेलों में क्वार्टर फाइनल में जापान की मजबूत टीम को हराकर ऐतिहासिक कांस्य पदक जीता था। इस बार वह अपने इस प्रदर्शन में सुधार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
मिश्रित युगल: शरत कमल और मनिका बत्रा ने जकार्ता में मिश्रित युगल का कांस्य पदक जीतकर सभी को हैरान कर दिया था। बत्रा इस साल साथियान के साथ जोड़ी बनाएगी। ये दोनों पेरिस ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेंगे।
टेनिस:
पुरुष युगल- रोहन बोपन्ना और युकी भांबरी: बोपन्ना 43 साल के हो गए हैं लेकिन अभी बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं। वह हाल में अमेरिकी ओपन के पुरुष युगल के फाइनल में पहुंचे थे। बोपन्ना एशियाई खेलों के पुरुष युगल में अपने खिताब का बचाव करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। पिछली बार उन्होंने दिविज शरण के साथ मिलकर स्वर्ण पदक जीता था। हांगझोउ में उनकी युकी भांबरी के साथ जोड़ी बनाने की संभावना है।
कुश्ती:
पुरुष- अमन सहरावत (57 किग्रा): अमन ने पिछले दो वर्षों में अपने खेल में काफी प्रगति की है। उन्होंने पिछले साल अंडर 23 विश्व और एशियाई चैंपियनशिप जीती थी। सीनियर सर्किट पर भी उन्होंने अपनी छाप छोड़ी है। उन्होंने इस साल एशियाई चैंपियनशिप जीती। वह हमवतन और ओलंपिक के पदक विजेता रवि दहिया को कड़ी चुनौती देंगे।
महिला- अंतिम पंघाल (57 किग्रा): अंतिम पंघाल अपने भार वर्ग में पदक की प्रबल दावेदार हैं। उन्होंने एशियाई खेलों और विश्व चैंपियनशिप के ट्रायल्स में शानदार प्रदर्शन किया था। वह जूनियर विश्व चैंपियनशिप में लगातार दो खिताब जीतने वाली देश की पहली महिला पहलवान हैं।
भारोत्तोलन:
महिला- मीराबाई चानू: तोक्यो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता मीराबाई चानू एशियाई खेलों में पदक जीतने के लिए बेताब है। वह अभी तक इन खेलों में पदक नहीं जीत पाई हैं और इसलिए इस बार उन्होंने एशियाई खेलों को अपनी प्राथमिकता में सबसे आगे रखा है। उन्हें चीन की होउ झीहुइ और जियांग हुइहुआ से कड़ी चुनौती मिल सकती है।
भाषा पंत नमिता
नमिता
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