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Saturday, 25 April, 2026
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सिडनी ओलंपिक में पदक चूकना सबसे बड़ा मलाल, लेकिन खुशी है कि भारतीय हॉकी सही राह पर : रियाज

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(मोना पार्थसारथी)

चेन्नई, 17 दिसंबर (भाषा) सिडनी ओलंपिक में पदक के करीब पहुंचकर चूकने का मलाल मोहम्मद रियाज को दो दशक बाद भी है लेकिन पिछले दो ओलंपिक में भारतीय टीम के कांस्य पदक जीतने से उनका दुख जरूर कम हुआ है ।

तमिलनाडु के 53 वर्ष के पूर्व मिडफील्डर रियाज 1998 एशियाई खेलों में 32 साल बाद स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम का हिस्सा थे लेकिन सिडनी ओलंपिक 2000 में उस कामयाबी को नहीं दोहरा सके और क्वार्टर फाइनल से बाहर हो गए ।

रियाज ने भाषा को दिये इंटरव्यू में कहा ,‘‘ ओलंपिक खेलना सबसे बड़ी बात है और पदक के इतने करीब पहुंचकर चूक जाना सबसे बड़ा मलाल है । मुझे पूरी जिंदगी यह मलाल रहेगा लेकिन मुझे खुशी है कि भारत ने लगातार दो कांस्य (तोक्यो ओलंपिक 2021 और पेरिस 2024) जीतकर लंबा इंतजार खत्म किया ।’’

भारतीय टीम 2000 में सेमीफाइनल में पहुंचने से 106 सेकंड दूर थी लेकिन पोलैंड ने आखिरी पलों में बराबरी का गोल दागकर उसकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया । उसके बाद एथेंस में 2004 में प्रदर्शन निराशाजनक रहा और 2008 बीजिंग ओलंपिक के लिये टीम क्वालीफाई ही नहीं कर पाई ।

हॉकी विशेषज्ञों का मानना है कि 2000 की टीम सबसे संतुलित और 1980 मॉस्को ओलंपिक में मिले आठवें और आखिरी स्वर्ण के बाद खिताब की सबसे प्रबल दावेदार थी । उस टीम में धनराज पिल्लै, दिलीप टिर्की, मुकेश कुमार, बलजीत सैनी और रियाज जैसे दिग्गज थे ।

रियाज का मानना है कि लगातार दो ओलंपिक पदक जीतने के बाद भारत हॉकी में पुराना गौरव लौटाने की ओर है । उन्होंने कहा कि आगामी खेलों में पदक का रंग बदलने पर फोकस होना चाहिये ।

रियाज ने कहा ,‘‘ भारतीय हॉकी ने सौ साल पूरे कर लिये हैं और यह लंबा सफर रहा है । लगातार दो ओलंपिक पदक जीतकर अच्छा लग रहा है । हमारे पास जमीनी स्तर पर मजबूत दीर्घकालिक कार्यक्रम है ।’’

उन्होंने कहा ,‘‘ पहले हम रैंकिंग में सातवें आठवें स्थान पर रहते थे लेकिन अब शीर्ष पांच में है लिहाजा ग्राफ तो ऊपर जा रहा है । हमें अब विश्व कप, एशियाई खेल और ओलंपिक पर फोकस करना है ।’’

उन्होंने कहा ,‘‘ हमारे भीतर दुनिया की किसी भी टीम से खेलने का भरोसा है । हम ओलंपिक में शीर्ष तीन में रह सकते हैं लेकिन हमें कड़ी मेहनत करनी होगी । युवा और अनुभवी खिलाड़ियों के साथ हमें लॉस एंजिलिस ओलंपिक 2028 में फाइनल में पहुंचने का लक्ष्य रखना होगा ।’’

उन्होंने कुछ जूनियर खिलाड़ियों को अगले साल नीदरलैंड और बेल्जियम में होने वाले विश्व कप से पहले सीनियर टीम में जगह मिलने की भी उम्मीद जताई ।

उन्होंने कहा ,‘‘हमारे पास बेहतरीन सीनियर टीम है लेकिन कुछ खिलाड़ी लंबे समय से खेल रहे हैं । हमें कुछ जूनियर खिलाड़ियों को मौका देना होगा ।’’

रियाज का मानना है कि शीर्ष टीमों के खिलाफ खेलते समय भारत को घबराना नहीं चाहिये बल्कि सर्कल के भीतर मौकों को भुनाने पर फोकस करना चाहिये ।’’

उन्होंने कहा ,‘‘ जर्मनी जैसी टीमों के खिलाफ खेलते हुए हमे उसकी साख से खौफ में नहीं आना चाहिये । हम किसी मानसिक अवरोध के बिना खेलें तो दुनिया में किसी भी टीम को हरा सकते हैं । हम शीर्ष लीग में हैं और यूरोपीय टीमों से इतना ही अंतर है कि वे सर्कल के भीतर मौके भुनाते हैं जबकि हम गंवा देते हैं ।’’

उन्होंने कहा ,‘‘ कठिन मैचों में आपको दो या तीन मौके ही मिलते हैं जिन्हें गंवाना नहीं चाहिये ।’’

भाषा

मोना पंत

पंत

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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