(जी उन्नीकृष्णन)
चेन्नई, आठ फरवरी (भाषा) ‘चलो! हम हिंदी में बात करेंगे।’ इटली के एक क्रिकेटर के साक्षात्कार से पहले आपको यह पंक्ति अक्सर सुनने को नहीं मिलेगी।
लेकिन जसप्रीत सिंह ने 22 साल पहले 10 साल की उम्र में अपने माता-पिता के साथ बर्गमो जाने के बावजूद ना तो अपनी भाषा और ना ही पंजाब के अपने गृहनगर फगवाड़ा से अपना जुड़ाव भुलाया है।
इटली में शुरुआती दिन आसान नहीं थे क्योंकि उनके पिता तीरथ सिंह और मां जसवीर कौर को एक अनजान शहर में फैक्ट्री मजदूर के तौर पर काम करना पड़ा।
जसप्रीत ने पीटीआई को बताया, ‘‘जब हमें इटली जाने का मौका मिला तो यह मेरे परिवार के लिए एक बड़ा दिन था। लेकिन हम थोड़े चिंतित भी थे क्योंकि यह एक नया देश, नई भाषा और नई संस्कृति थी। सब कुछ हमारे लिए नया था। लेकिन मैं सोच रहा था कि क्रिकेट कैसे खेलूं जो मैं अपने शहर में बचपन में खेला करता था।’’
क्रिकेट के मामले में इटली जैसे देश में जाना मुश्किल था क्योंकि इस यूरोपीय देश में शायद ही कोई उचित बुनियादी ढांचा था।
वह स्थानीय बर्गमो क्रिकेट क्लब से जुड़ गए जो अधिक से अधिक एक मामूली सुविधा थी लेकिन उन्होंने अपने पिता के काम में मदद करने के लिए दो साल का इलेक्ट्रीशियन का कोर्स भी पूरा किया।
हालांकि जसप्रीत को जल्द ही स्थानीय गुरुद्वारे में मिले कुछ भारतीय प्रवासियों की मदद से अपने क्रिकेट कौशल को बेहतर बनाने का एक तरीका मिल गया।
उन्होंने उसे टर्फ विकेट पर क्रिकेट खेलने के लिए इंग्लैंड जाने को कहा और बर्मिंघम में रहते हुए अपने खर्चों को पूरा करने के लिए उसे उबर ड्राइवर के तौर पर भी काम करना पड़ा।
जसप्रीत ने कहा, ‘‘जब मैं बच्चा था तो भारत में क्रिकेट खेलता था और जब मैं इटली गया तो मैं वही करना चाहता था। लेकिन जब मैं इटली गया तो वहां क्रिकेट नहीं था, कोई असली स्टेडियम या ग्राउंड नहीं थे, जैसे मैंने पंजाब में देखे थे।’’
बर्मिंघम एवं जिला प्रीमियर लीग में खेलने वाले 32 वर्षीय जसप्रीत ने कहा, ‘‘जब मुझे इसके बारे में पता चला तो मैं इंग्लैंड जाकर वहां खेलने लगा क्योंकि वहां टर्फ विकेट थे और खर्चों को पूरा करने के लिए मैंने उबर कार चलाना शुरू किया जिससे मुझे समय में भी काफी लचीलापन मिला।’’
मेहनत का फल मिला और दाएं हाथ के तेज गेंदबाज जसप्रीत ने 2019 में नॉर्वे के खिलाफ इटली के लिए पदार्पण किया।
इटली 2024 टी20 विश्व कप के लिए क्वालीफाई करने के भी करीब पहुंच गया था लेकिन आयरलैंड से करीबी हार ने उनकी उम्मीदें खत्म कर दीं।
हालांकि टीम ने एक साल बाद जून 2025 में यूरोपीय क्षेत्रीय क्वालीफायर में शीर्ष पर रहकर अपना सपना पूरा किया।
जसप्रीत ने कहा, ‘‘यह हमारे लिए गर्व की बात है। हम लंबे समय से क्वालीफाई करने की कोशिश कर रहे थे। और हमारी टीम पिछले तीन वर्षों से बहुत कड़ी मेहनत कर रही है। और हम भगवान के शुक्रगुजार हैं कि हम इस बार विश्व कप के लिए क्वालीफाई कर पाए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम सिर्फ विश्व कप में हिस्सा लेने नहीं आए हैं, हम मुकाबला करने भी आए हैं।’’
जसप्रीत के लिए भारत की यात्रा सिर्फ अपनी मातृभूमि में वापसी नहीं है बल्कि देश में विश्व स्तरीय क्रिकेट सुविधाओं का अनुभव करने का भी एक मौका है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह हमारे लिए एक अद्भुत एहसास है। मैं बचपन से इन मैदान को देखता आ रहा हूं। हमारे महान दिग्गज जैसे कपिल देव, सुनील गावस्कर, सचिन तेंदुलकर, महेंद्र सिंह धोनी और विराट कोहली इन मैदान में खेले हैं।’’
जसप्रीत ने कहा, ‘‘यहां आकर उस माहौल में खेलना… चिदंबरम स्टेडियम (अभ्यास मैच), ईडन गार्डन्स, वानखेड़े। यह हम सभी के लिए एक सपने के सच होने जैसा है। हमें बहुत गर्व महसूस हो रहा है कि हम यहां तक पहुंचे हैं।’’
भाषा सुधीर
सुधीर
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