(अमित कुमार दास)
नयी दिल्ली, 20 जनवरी (भाषा) बैडमिंटन इंडोनेशियाई के लोगों के खून में दौड़ता है और चीन के अलावा कोई अन्य देश इंडोनेशिया की तरह इस खेल पर दबदबा नहीं बना पाया है।
इसके बावजूद वे पिछले दो दशकों में केवल एक थॉमस कप खिताब जीतने में सफल रहे हैं।
इस 14 बार के चैंपियन को भारत ने पिछले टूर्नामेंट में फाइनल में 3-0 से हराकर खिताब से वंचित किया और पहली बार टूर्नामेंट जीता।
दुनिया के तीसरे नंबर के खिलाड़ी इंडोनेशिया एंथोनी सिनिसुका गिनटिंग ने कहा, ‘‘भारत के पास कई अच्छे खिलाड़ी हैं, खासकर पुरुष एकल में। मुझे लगता है कि जब भारत ने थॉमस कप जीता था तो मुझे महसूस हुआ कि यह उनका समय था।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इंडोनेशिया के खिलाड़ी रैंकिंग में अच्छे हैं लेकिन यह महत्वपूर्ण नहीं है क्योंकि कोर्ट पर कुछ भी हो सकता है, यह भारत के लिए अच्छा था।’’
लेकिन खिताब इंडोनेशिया से दूर क्यों है? गिनटिंग ने कहा, ‘‘मुझे नहीं पता, हो सकता है अभी समय नहीं आया है। थॉमस कप व्यक्तिगत स्पर्धाओं से अलग है। हर मैच, हर अंक, सब कुछ महत्वपूर्ण है। यह एक परिवार की तरह है, हमें ठोस होने की जरूरत है।’’
फाइनल में पहले एकल में लक्ष्य सेन से हारने वाले इस 26 वर्षीय खिलाड़ी ने कहा, ‘‘थॉमस कप के दौरान मैंने पहले दौर से लेकर अंतिम दौर तक बहुत कुछ सीखा, मुझे लगा कि शायद मैं वापसी कर सकूं।’’
एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता जोनाथन क्रिस्टी को लगता है कि विश्व नंबर एक विक्टर एक्सेलसन के दबदबे का मुख्य कारण उनकी मानसिक मजबूती है।
उन्होंने कहा, ‘‘अंतर उसकी मानसिकता है। मुझे लगता है कि दो या तीन साल पहले केंटो मोमोटा ऊपर था। मुझे लगता है कि विक्टर की मानसिकता अलग है। अभी वह इसे संभाल सकता है और एक बुरी स्थिति को अच्छी स्थिति में बदल सकता है। मुझे लगता है कि मुझे उससे सीखना चाहिए।’’
क्रिस्टी ने कहा, ‘‘अगर हम रणनीति और स्ट्रोक की गुणवत्ता के बारे में बात करते हैं तो इस स्तर पर सभी खिलाड़ी समान हैं। अंतर इसमें है कि आपकी मानसिकता कैसी है और आप अपनी प्रेरणा को कैसे आगे बढ़ाते हैं।’’
भाषा सुधीर पंत
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