… फिलेम दीपक सिंह …
नयी दिल्ली, 12 मार्च (भाषा) भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) चाहता है कि देश के शीर्ष एथलीट राष्ट्रीय खेलों में भाग लें ताकि इस बहु-खेल आयोजन की ‘ब्रांड वैल्यू (महत्व)’ बढ़ाकर प्रायोजकों से धन-राशि को आकर्षित किया जा सके। दो साल में आयोजित होने वाले इन खेलों की मेजबानी में लगातार विलंब हो रहा है। केरल में 2015 में 35वें सत्र के आयोजन के बाद गोवा को इसकी मेजबानी सौंपी गयी थी लेकिन वह इसके आयोजन में अब तक विफल रहा और पिछले साल गुजरात में इन खेलों के 36 वें सत्र की मेजबानी की। इसमें नीरज चोपड़ा और पीवी सिंधू जैसे ओलंपिक पदक विजेता चोट या विदेश में अपने निर्धारित प्रशिक्षण के कारण भाग नहीं ले सके थे। गोवा को इस साल नवंबर ने इन खेलों के आगामी सत्र की मेजबानी की जिम्मेदारी दी गयी है। आईओए के संयुक्त सचिव और कार्यवाहक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) कल्याण चौबे ने रविवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘ राष्ट्रीय खेल आईओए की मुख्य संपत्ति है। अगर शीर्ष खिलाड़ी इसमें में भाग नहीं लेंगे तो इसके आयोजन का क्या फायदा। अगर वे (शीर्ष एथलीट) भाग लेते हैं, तो राष्ट्रीय खेलों से टेलीविजन का राजस्व बढ़ जाएगा, लोग प्रतिभावान खिलाड़ियों को देखेंगे।’’ आईओए की शनिवार को हुई वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में गोवा को नवंबर में होने वाले इस खेलों के 37वें सत्र के मेजबानी की पुष्टि की गयी। आईओए अध्यक्ष पी टी उषा ने शनिवार को ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नवंबर में गोवा में खेलों का उद्घाटन करने का अनुरोध किया जाएगा। राज्य को 2016 में ही इन खेलों की मेजबानी करनी थी लेकिन इसमें कई बार देरी हुई। यह देरी मुख्य रूप से बुनियादी ढांचे से संबंधित समस्याओं के कारण हुई। चौबे ने कहा, ‘‘ हम चाहते हैं कि एनएसएफ (राष्ट्रीय खेल महासंघ) अपने शीर्ष खिलाड़ियों को राष्ट्रीय खेलों में भाग लेने के लिए भेजें। कई बार एनएसएफ अपने दूसरे या तीसरे स्तर के खिलाड़ियों को भेजते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके शीर्ष खिलाड़ी सिर्फ एशियाई और ओलंपिक खेलों में हिस्सा लेगें। उन्होंने कहा, ‘‘ शीर्ष खिलाड़ी अगर राष्ट्रीय खेलों में खेलते हैं, तो इससे इन खेलों का महत्व बढ़ेगा। इससे दूसरे खिलाड़ियों को सीखने का मौका मिलेगा। वे बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित होंगे, जो दूसरे स्तर के खिलाड़ियों को बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित करेगा। इसलिए, हम एनएसएफ के साथ इस पर चर्चा करना चाहते हैं और हम उनका सहयोग चाहते हैं।’’ आईओए एजीएम ने शनिवार को 2019-20 और 2020-21 के लेखा बयान (ऑडिटेड स्टेटमेंट) को भी इस शर्त पर पारित किया कि इसमें किसी भी गलती या वित्तीय अनियमितताओं के लिए पिछला निकाय जिम्मेदार होगा। उन्होंने कहा, ‘‘ अगर हम इसे पारित नहीं करते हैं तो आगे का काम प्रभावित होगा। हमने पिछले लेखा बयान को इस शर्त के साथ पारित किया है कि इसमें किसी भी वित्तीय अनियमितताओं के लिए वर्तमान निकाय जिम्मेदार नहीं होगा।’’ भाषा आनन्द नमितानमिता
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