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Thursday, 5 February, 2026
होमखेलजूनियर खिलाड़ियों पर ज्यादा अभ्यास से थकान हावी, रिले दौड़ में वैकल्पिक खिलाड़ियों की कमी: नायर

जूनियर खिलाड़ियों पर ज्यादा अभ्यास से थकान हावी, रिले दौड़ में वैकल्पिक खिलाड़ियों की कमी: नायर

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…. फिलेम दीपक सिंह …

भुवनेश्वर, 15 जून (भाषा) महिलाओं की चार गुणा 400 मीटर रिले में 2002 से 2018 तक लगातार पांच स्वर्ण जीतने वाली भारतीय टीम आगामी एशियाई खेलों के लिए छह सदस्यीय टीम के चयन के लिए संघर्ष कर रही है। मुख्य कोच राधाकृष्णन नायर ने इसके लिए जूनियर एथलीटों से विकल्पों की कमी को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि विकल्पों की यह कमी ‘कम उम्र में जरूरत से ज्यादा अभ्यास’ से होने वाली ‘थकान’ है। नायर ने कहा कि हांगझोऊ एशियाई खेलों (23 सितंबर से आठ अक्टूबर) में भारत स्वर्ण पदक जीतने के लिए संघर्ष करेगा क्योंकि कुछ होनहार 400 मीटर के कुछ होनहार जूनियर स्तर पर बहुत अच्छा प्रदर्शन करने के बाद बाहर हो गए। नायर ने राष्ट्रीय अंतरराज्यीय एथलेटिक्स चैंपियनशिप से इतर पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘हमें जूनियर स्तर के खिलाड़ियों से सीनियर स्तर का विकल्प नहीं मिल रहा है।’’ उन्होंने हरियाणा की रूपल चौधरी का उदाहरण दिया। रूपल ने कोलंबिया में पिछले साल विश्व अंडर-20 चैंपियनशिप में रजत जीतने वाली चार गुणा 400 मीटर रिले का हिस्सा होने के अलावा 51.85 सेकंड के प्रभावशाली समय के साथ व्यक्तिगत 400 मीटर कांस्य पदक जीता था। उन्होंने इसके साथ ही प्रिया मोहन और रेजोआना मलिक हिना का भी उदाहरण दिया। नायर ने कहा ‘‘ आपने रूपल (चौधरी) को देखा होगा, वह कहाँ है? उसने पिछले साल कैली, कोलंबिया (विश्व अंडर-20 चैंपियनशिप) में पांच दौड़ लगाई थी। आखिरी दौड़ में, उसने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। लेकिन वह आयु वर्ग से आगे नहीं बढ़ी। वह कम उम्र से ही जरूरत से ज्यादा अभ्यास करती थी। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘ प्रिया मोहन के साथ भी ऐसी हो रहा है। मुझे डर है, उनके प्रदर्शन में गिरावट आ रही है।  रेजोआना के मामले में भी यही बात है। वह सिर्फ 16 साल की है। इस उम्र में उसे अभ्यास के थकान से बचने के लिए ठीक से प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। हमें 14 या 15 साल की उम्र में किसी एथलीट को 400 मीटर में विशेषज्ञ नहीं बनाना चाहिए। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘ महिलाओं में एशियाई खेलों में यह 400 मीटर स्पर्धा काफी लोकप्रिय है। हमने एशियाई खेलों में चार गुणा 400 मीटर रिले में कई बार स्वर्ण पदक जीते है। इससे पुरस्कार राशि के तौर पर बड़ी रकम और अर्जुन पुरस्कार मिलने की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में 100 मीटर या 200 मीटर स्पर्धा में अच्छा करने वाले धावकों को भी अधिकांश कोच 400 मीटर दौड़ में डाल देते है। ’’ उन्होंने कहा कि यह सभी होनहार जूनियर एथलीटों के राष्ट्रीय शिविर में शामिल होने का सवाल नहीं है, बल्कि यह उचित प्रशिक्षण के बारे में है। भाषा आनन्द मोनामोना

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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