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Friday, 23 January, 2026
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जीपीबीएल के टलने से उभरते हुए बैडमिंटन खिलाड़ियों को होगा आर्थिक नुकसान

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… अमित कुमार दास…

नयी दिल्ली, 27 अगस्त (भाषा) अनुभवी एचएस प्रणय के विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक पर भारत में खुशी का माहौल है तो वहीं दूसरी तरफ ग्रैंड प्रिक्स बैडमिंटन लीग (जीपीबीएल) के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने के बाद देश के 60 से अधिक शटलर अपने कौशल दिखाने और कुछ जरूरी पैसे कमाने के अवसर से वंचित हो गए हैं। दो सप्ताह तक चलने वाली इस लीग में 15 अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी भी भाग लेने वाले थे जिसका आगाज रविवार (27 अगस्त) को होना  था। भारतीय बैडमिंटन संघ (बीएआई) ने हालांकि लीग के संचालन के लिए आवश्यक अनुमति नहीं दी। इस वजह से कई खिलाड़ी टूर्नामेंट से हट गये जिसके बाद इसे अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया। बीएआई का प्रमुख आयोजन प्रीमियर बैडमिंटन लीग (पीबीएल) कोविड-19 महामारी के बाद से नहीं हो रहा है ऐसे में देश के दूसरी और तीसरी पंक्ति के खिलाड़ियों के लिए जीपीबीएल कमाई का अच्छा मौका था। इस कमाई से खिलाड़ी दुनिया भर के अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में भाग लेने के साथ अपने खेल में सुधार करने के लिए निवेश कर सकते थे। देश के एक सीनियर खिलाड़ी ने गोपनीयता की शर्त पर कहा, ‘‘ मैं यह समझ नहीं पा रहा हूं कि बीएआई इतना खेल विरोधी क्यों है और खेल के प्रसार को प्रतिबंधित क्यों कर रहा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘युवा खिलाड़ियों के लिए अपने सपनों को जीवित रखना बहुत मुश्किल है। शीर्ष खिलाड़ियों को बीएआई द्वारा वित्त पोषित किया जा रहा है और यह बहुत अच्छी बात है लेकिन बाकी खिलाड़ियों का क्या होगा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ अभी बहुत सारे अखिल भारतीय रैंकिंग टूर्नामेंट हैं। लेकिन विजेता को टैक्स के बाद बहुत कम रकम मिलती है। ऐसी प्रतियोगिताओं में प्रवेश शुल्क 2000 रुपये है, युगल में उपविजेता को 9000 रुपये और विजेता को 15000 रुपये मिल रहे हैं जबकि एकल विजेता को संभवतः 35000 रुपये मिल रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अगर वे सभी टूर्नामेंट जीतते हैं, तो भी उन्हें महज दो लाख रुपये ही मिलेंगे। यह पुरस्कार राशि बहुत कम है। एक खिलाड़ी को टूर्नामेंट में भाग लेने के लिए आवास, टिकट, फिजियो, अच्छे आहार आदि पर खर्च करना पड़ता है। दुर्भाग्य से, बैडमिंटन एक ऐसा खेल जहां माता-पिता और खिलाड़ी सिर्फ पैसा गवां रहे है।’’ उन्होंने समझाते हुए कहा कि एक एकल खिलाड़ी को एक वर्ष में 10 से 15 बीडब्ल्यूएफ टूर्नामेंट खेलने के लिए न्यूनतम 15 से 20 लाख रुपये खर्च करने पड़ते हैं, जबकि जीपीबीएल में दो सप्ताह के कार्यकाल के लिए मिथुन मंजूनाथ जैसे खिलाड़ी को 14.5 लाख रुपये मिलते। अगर कोई खिलाड़ी केवल एशिया में खेलना चाहता है, तो उसे भी एक प्रतियोगिता के लिए कम से कम 60,000 रुपये से 80,000 रुपये की आवश्यकता होगी। चोट के कारण संघर्ष कर रहे पूर्व विश्व नंबर 11 समीर वर्मा जैसे खिलाड़ी को जीपीबीएल से 8.5 लाख रुपये मिलते। विश्व रैंकिंग में शीर्ष 10 में रहे बी साई प्रणीत वर्तमान में फॉर्म से जूझ रहे हैं और 68वें स्थान पर खिसक गए हैं।  विश्व चैंपियनशिप (2019) का यह कांस्य पदक विजेता जीपीबीएल में दो सप्ताह के दौरान 10 लाख रुपये कमा सकता था। इसके कुछ और उदाहरण के तौर पर आप आर. मारिस्वामी, शिखा गौतम, तान्या हेमंत और पूर्वा बर्वे जैसे कई खिलाड़ी फ्रेंचाइजी द्वारा भुगतान किए गए पैसे के साथ कुछ और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में भाग ले सकते थे।   जीपीबीएल कुल मिलाकर खिलाड़ियों को दो से 15 लाख रुपये तक अमीर बना सकता था। भाषा आनन्द पंतपंत

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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