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Tuesday, 3 March, 2026
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गोल्फ रैंकिंग में खामियों के कारण 2028 ओलंपिक में एशियाई खिलाड़ियों का कम होगा प्रतिनिधित्व

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नयी दिल्ली, 24 नवंबर (भाषा) अनुभवी गोल्फ खिलाड़ी शिव कपूर को इस बात की चिंता है कि विश्व रैंकिंग प्रणाली के ‘त्रुटिपूर्ण’ होने के कारण भारत और एशिया के खिलाड़ियों के लिए 2028 लास एंजिलिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करना मुश्किल होगा।

आधिकारिक विश्व गोल्फ रैंकिंग (ओडब्ल्यूजीआर) को और अधिक व्यवहारिक बनाने के लिए पिछले साल अगस्त में संशोधित किया गया था, लेकिन टाइगर वुड्स सहित कई शीर्ष खिलाड़ियों ने इसकी आलोचना की थी।

कपूर ने ‘पीटीआई-भाषा’ को दिये साक्षात्कार में कहा, ‘‘ देखिए, मुझे लगता है कि इस समय विश्व रैंकिंग प्रणाली में बड़ी खामी है। पीजीए टूर के अलावा अन्य सभी टूर को काफी कम अंक मिल रहे हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ इसका एक अच्छा उदाहरण टेलर गूच है। वह ‘एलआईवी’ पर वर्ष का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी है, लेकिन एलआईवी का शीर्ष खिलाड़ी दुनिया में 278वें स्थान पर है। मेरा मतलब है, यह विश्व रैंकिंग प्रणाली का सच्चा प्रतिबिंब नहीं है।’’   

 सऊदी अरब समर्थित एलआईवी गोल्फ की शुरुआत जून 2022 में हुई थी। इसमें प्रतिस्पर्धा करने वाले खिलाड़ियों को रैंकिंग अंक नहीं मिलते क्योंकि ओडब्ल्यूजीआर 48 खिलाड़ियों के 54-होल के खेल को लेकर अपनी चिंता जता चुका है।

ओलंपिक क्वालीफिकेशन ओडब्ल्यूजीआर पर निर्भर है, जिसमें जून 2024 तक शीर्ष 60 (रैंकिंग) में शामिल खिलाड़ी पेरिस ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करेंगे। भारत के शीर्ष गोल्फर शुभंकर शर्मा और अनिर्बान लाहिड़ी वर्तमान में क्रमशः 47वें और 48वें स्थान पर हैं।

दो बार के यूरोपीय चैलेंज टूर चैंपियन कपूर का मानना है कि एलआईवी गोल्फ में भी प्रतिस्पर्धा करने वाले लाहिड़ी को पेरिस के लिए जगह पक्की करने में कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा, लेकिन अन्य एशियाई खिलाड़ियों की राह मुश्किल हो सकती है।

उन्होंने कहा, ‘‘मौजूदा रैंकिंग को देखते हुए मुझे लगता है कि 2024 ओलंपिक तक चीजें ठीक रहेंगी। मुझे लगता है कि पेरिस ओलंपिक के लिए वह जगह बनाने में सफल रहेंगे।’’

इस खिलाड़ी ने कहा, ‘‘ आगे चलकर भारत और अन्य एशियाई देशों के खिलाड़ी इसका प्रभाव महसूस करेंगे। नयी रैंकिंग प्रणाली 2022 में लागू हुई। इसलिए, चक्र को पूरा होने में दो साल लगते हैं। ऐसे में हम 2024 में शायद ओलंपिक में टीम उतारने में सक्षम होंगे। लेकिन मुझे 2028 की चिंता है। मुझे लगता है कि उस समय तक, आप ओलंपिक में बेहद कम एशियाई प्रतिनिधित्व देखेंगे।’’

भाषा आनन्द आनन्द पंत

पंत

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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