scorecardresearch
Sunday, 29 March, 2026
होमखेलएआईएफएफ कार्यकारी समिति ने वाणिज्यिक अधिकारों के लिए प्राप्त बोलियों का मूल्यांकन किया

एआईएफएफ कार्यकारी समिति ने वाणिज्यिक अधिकारों के लिए प्राप्त बोलियों का मूल्यांकन किया

Text Size:

नयी दिल्ली, 29 मार्च (भाषा) अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) की कार्यकारी समिति ने रविवार को यहां प्रमुख प्रतियोगिताओं के वाणिज्यिक अधिकारों के लिए प्राप्त बोलियों का मूल्यांकन सहित प्रशासनिक और शासन से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।

इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) और फेडरेशन कप के लिए फैनकोड और जीनियस स्पोर्ट्स जबकि भारतीय महिला लीग और आईडब्ल्यूएल-2 के लिए कैप्री स्पोर्ट्स से प्राप्त तीनों बोलियां कार्यकारी समिति के समक्ष रखी गईं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार जीनियस स्पोर्ट्स ने 20 वर्षीय चक्र के लिए पांच प्रतिशत वार्षिक वृद्धि के साथ 2,129 करोड़ रुपये की बोली लगाई है। वहीं, ड्रीम स्पोर्ट्स समूह का हिस्सा फैनकोड ने इसी अवधि के लिए 1,190 करोड़ रुपये (या सालाना लगभग 36 करोड़ रुपये) की अपेक्षाकृत कम बोली प्रस्तुत की।

महिला फुटबॉल के लिए कैप्री स्पोर्ट्स एकमात्र बोलीदाता रहा, जिसकी बोली 20 वर्षों के चक्र के लिए 150 से 160 करोड़ रुपये के बीच रही।

एआईएफएफ ने एक बयान में कहा, “विस्तृत विचार-विमर्श के बाद कार्यकारी समिति ने निर्णय लिया कि केपीएमजी बोलियों की व्यवहार्यता, वित्तीय संरचना और प्रमुख तकनीकी पहलुओं का मूल्यांकन करने के लिए विस्तृत तुलनात्मक ब्योरा तैयार करेगा।”

प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और स्पष्टता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित प्रतियोगिताओं से जुड़े क्लब भी बोलीदाताओं के साथ सीधे संवाद करेंगे, ताकि वाणिज्यिक और संचालन संबंधी पहलुओं पर प्रश्नों का समाधान किया जा सके और अतिरिक्त जानकारी प्राप्त की जा सके।

तुलनात्मक विश्लेषण तैयार होने के बाद बोलीदाताओं से निर्धारित समयसीमा के भीतर विस्तृत टर्म शीट प्रस्तुत करने को कहा जाएगा। इसके बाद इस मामले को महासंघ के संविधान के प्रावधानों के अनुरूप अंतिम निर्णय के लिए एआईएफएफ की आम सभा के समक्ष रखा जाएगा।

कार्यकारी समिति ने भारत सरकार के निर्देशानुसार प्रस्तावित राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम के क्रियान्वयन पर भी चर्चा की।

बैठक में यह उल्लेख किया गया कि नए नियामक ढांचे को राज्य और जिला फुटबॉल संघों द्वारा अपनाया जाना आवश्यक होगा।

इस परिवर्तन को सुगम बनाने के लिए राज्य संघों को 90 दिनों की अवधि दी जाएगी, ताकि वे कानूनी और संचालन संबंधी प्रभावों का अध्ययन कर सकें और नए प्रशासन मानकों के अनुरूप अपने नियमों में बदलाव की व्यवहार्यता का आकलन कर सकें।

भाषा आनन्द नमिता

नमिता

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments