लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के कुछ हिस्सों में जारी बाढ़ और जलभराव के बीच राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है. साथ ही ‘मिशन सेफ फ्यूचर’ अभियान के तहत स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूल वाहनों की जांच और उनके ड्राइवरों के चरित्र सत्यापन का काम भी तेज किया गया है.
यूपी परिवहन विभाग ‘मिशन सेफ फ्यूचर’ समेत दूसरे अभियानों के तहत स्कूल वाहनों की जांच कर रहा है और उनके ड्राइवरों के चरित्र का सत्यापन किया जा रहा है.
प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, सरकार ने बाढ़ प्रभावित जिलों में राहत और बचाव अभियान भी तेज किया है. लखीमपुर खीरी और अयोध्या पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. अलग-अलग जिलों में NDRF की टीमें भी तैनात की गई हैं. प्रयागराज में डूबने की घटनाओं के बाद खोज और बचाव अभियान चलाया जा रहा है.
दोनों अभियानों का उद्देश्य आपात स्थिति में सुरक्षा, तैयारी और समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करना है.
परिवहन विभाग के 13 अगस्त तक के आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में 19,680 स्कूल हैं. इनमें स्कूलों के नाम पर 74,337 वाहन पंजीकृत हैं, जबकि 8,022 अन्य वाहन स्कूलों ने किराये पर लिए हैं. इस तरह राज्य में स्कूलों के लिए चलने वाले वाहनों की कुल संख्या 82,259 है.
परिवहन विभाग पूरे उत्तर प्रदेश में चलाए जा रहे अभियानों के तहत इन वाहनों की फिटनेस की जांच कर रहा है.
अपर परिवहन आयुक्त (प्रवर्तन) केडी सिंह गौर ने कहा कि ‘मिशन सेफ फ्यूचर’ और दूसरे अभियानों के तहत स्कूल वाहनों की फिटनेस जांच और बच्चों को ले जाने वाले ड्राइवरों के सत्यापन को प्राथमिकता दी जा रही है.
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि स्कूली बच्चों को सुरक्षित परिवहन मिले और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों और ड्राइवरों के खिलाफ कार्रवाई की जाए.
प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, जांच में बड़ी संख्या में ऐसे वाहन मिले जो जरूरी फिटनेस मानकों को पूरा नहीं कर रहे थे. अलग-अलग अभियानों के तहत जांच में कुल 6,066 स्कूल वाहन अनफिट पाए गए. इन वाहनों के खिलाफ नोटिस जारी किए गए.