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Thursday, 20 August, 2026
होमदेश‘RSS ने तय कर लिया है कि वह 1.5 अरब लोगों का सच जानता है’: राहुल गांधी का विचारधारा थोपने का आरोप

‘RSS ने तय कर लिया है कि वह 1.5 अरब लोगों का सच जानता है’: राहुल गांधी का विचारधारा थोपने का आरोप

राहुल गांधी ने BJP और RSS पर अलग-अलग समुदायों में खुद को अलग-थलग महसूस करने की भावना पैदा करने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि इससे “भारत माता” को नुकसान पहुंच रहा है.

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नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर तीखा वैचारिक हमला किया. उन्होंने आरोप लगाया कि RSS भारत के 1.5 अरब लोगों पर अपने ‘सच’ की सोच थोपने की कोशिश कर रहा है. राहुल ने कहा कि हर व्यक्ति को अपनी जिंदगी और अपना रास्ता खुद तय करने का अधिकार है.

राष्ट्रीय राजधानी में ‘हरा भरा स्वराज: राजीव गांधी के विजन को श्रद्धांजलि’ कार्यक्रम में बोलते हुए राहुल गांधी ने RSS की विचारधारा की तुलना महात्मा गांधी के ‘स्वराज’ के विचार से की.

राहुल गांधी ने कहा, “गांधी जी कह रहे थे कि हर जीवित व्यक्ति एक अलग इंसान है और उसका अपना सच तक पहुंचने का रास्ता है. मैं आपको नहीं बता सकता कि आपका सच क्या है. आज भारत में वैचारिक लड़ाई इसी बात को लेकर है. यह मूल रूप से पर्यावरण, राजनीति या स्वतंत्र मीडिया को लेकर नहीं है—ये सिर्फ इसके लक्षण हैं. असली लड़ाई यह है कि लोगों के एक छोटे से समूह ने, क्योंकि उनके पास व्यवस्था का नियंत्रण है, यह तय कर लिया है कि वे इस देश में हर व्यक्ति का सच जानते हैं.”

उन्होंने कहा, “RSS के साथ मेरी समस्या यही है कि RSS ने तय कर लिया है कि वह 1.5 अरब लोगों का सच जानता है. और मैं कहता हूं, नहीं. सिर्फ 1.5 अरब लोग ही अपना सच जान सकते हैं.”

राहुल ने आगे कहा कि वह भी किसी दूसरे व्यक्ति का सच नहीं जान सकते. उन्होंने कहा, “अगर मैं यह मानने लगूं कि मैं आपका सच जानता हूं, तो मैं पागल हो जाऊंगा. क्योंकि मैं आप नहीं हूं. मैंने वह नहीं झेला है जो आपने झेला है, मैंने वह नहीं देखा है जो आपने देखा है, मैंने वह नहीं झेला है जिससे आप गुजरे हैं. मेरे माता-पिता, मेरे दोस्त या मेरी जिंदगी भी आपके जैसी नहीं है. तो मैं कैसे कह सकता हूं कि मैं आपका सच जानता हूं?”

महात्मा गांधी की आत्मकथा का नाम ‘My Experiments with Truth’ होने का जिक्र करते हुए राहुल ने कहा कि इसका नाम ‘The Truth’ या ‘My Understanding of the Truth’ नहीं था.

उन्होंने कहा, “कृपया ध्यान दें, गांधी जी की किताब का नाम ‘द ट्रुथ’ या ‘माय अंडरस्टैंडिंग ऑफ द ट्रुथ’ नहीं था. इसका नाम था ‘माय एक्सपेरिमेंट्स विद ट्रुथ’. मैं अपने सच के साथ प्रयोग करता हूं, आप अपने सच के साथ प्रयोग करते हैं.”

राहुल गांधी ने BJP और RSS पर अलग-अलग समुदायों में खुद को अलग-थलग महसूस करने की भावना पैदा करने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि इससे “भारत माता” को नुकसान पहुंच रहा है.

उन्होंने कहा, “सोचिए कि BJP और RSS ने क्या किया है. सोचिए, अगर मैं इस कमरे में आकर आपमें से 15-17 प्रतिशत लोगों से—मुसलमानों, ईसाइयों, सिखों से—कहूं कि ‘आपका कोई अस्तित्व नहीं है और अगर आपने आवाज उठाई तो देखिए आपके साथ क्या होता है.’ फिर 10 प्रतिशत आदिवासियों से कहूं, ‘जब हम चाहेंगे आपकी जमीन ले लेंगे और अगर आपने विरोध किया तो आपको गोली मार देंगे.’ और दलितों से कहूं, ‘आप बेवजह शिकायत कर रहे हैं, जाति व्यवस्था में सब ठीक है.’ यही हमारी मातृभूमि के साथ किया जा रहा है.”

उन्होंने कहा कि देश के हर व्यक्ति को, चाहे उसका धर्म, समुदाय या लिंग कुछ भी हो, यह महसूस होना चाहिए कि वह इस देश का हिस्सा है और यहां स्वतंत्र रूप से रह सकता है.

राहुल ने कहा, “मैं यहां का हूं. मैं इस देश में आजादी से चल सकता हूं. यहां लोग मुझसे प्यार करते हैं, मेरा सम्मान करते हैं और मेरी कद्र करते हैं और मेरे सच की तलाश इस देश के लिए मायने रखती है.”

राहुल गांधी ने अमेरिकी ‘फ्रीडम’ और भारतीय ‘स्वराज’ की अवधारणा के बीच अंतर बताते हुए डोनाल्ड ट्रंप और महात्मा गांधी का उदाहरण दिया.

उन्होंने कहा, “‘स्वराज’ को अक्सर पश्चिमी शब्द ‘फ्रीडम’ से जोड़ दिया जाता है. लोग सोचते हैं कि स्वराज का मतलब आजादी है, स्वतंत्रता है. नहीं—स्वराज का मतलब खुद पर शासन करना है (स्व पर राज/खुद पर शासन).”

उन्होंने कहा, “अगर आप अमेरिका जाकर पूछें कि ‘क्या ट्रंप एक स्वतंत्र व्यक्ति हैं?’ तो हर कोई कहेगा, बिल्कुल. लेकिन अगर आप पूछें, ‘क्या ट्रंप खुद पर शासन करते हैं?’ तो साफ जवाब होगा, नहीं. वहीं 80 साल पहले जेल में बंद गांधी जी कहते कि ‘मैं स्वतंत्र नहीं हूं, लेकिन मैं खुद पर शासन करता हूं. यही स्वराज है.’”

राहुल ने कहा कि स्वराज एक भारतीय अवधारणा है और इसमें बड़ी जिम्मेदारी शामिल है. यह सोचने का तरीका और हर व्यक्ति का अपना व्यक्तिगत प्रयास है.

उन्होंने कहा, “मैं आपको स्वराज नहीं दे सकता. पश्चिमी अर्थ में मैं यह कहकर आपको आजादी दे सकता हूं कि ‘आप जेल में नहीं हैं, मैंने आपको आजादी दे दी.’ लेकिन मैं आपको स्वराज नहीं दे सकता. क्योंकि स्वराज का ब्रह्मांड के साथ आपका व्यक्तिगत संबंध है. स्वराज हर व्यक्ति का अपना रास्ता है. और गांधी जी के स्वराज के विचार का मतलब था कि इस देश के हर व्यक्ति को इस रास्ते पर चलना चाहिए.”

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