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Wednesday, 14 October, 2026
होमरिपोर्ट‘वंचितों और गरीबों की आवाज बने रामनाथ कोविंद’, आत्मकथा के विमोचन पर बोले सीएम योगी

‘वंचितों और गरीबों की आवाज बने रामनाथ कोविंद’, आत्मकथा के विमोचन पर बोले सीएम योगी

कार्यक्रम में बोलते हुए आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के परौंख गांव में कोविंद के शुरुआती जीवन और शिक्षा व जनसेवा के जरिए मुश्किलों का सामना करने के उनके संकल्प का जिक्र किया.

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा ‘ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माय लाइफ, माय स्ट्रगल्स’ के विमोचन के मौके पर उन्हें सम्मानित किया. इस दौरान योगी ने कोविंद के साधारण परिवार से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने के सफर को याद किया.

कार्यक्रम में बोलते हुए आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के परौंख गांव में कोविंद के शुरुआती जीवन और शिक्षा व जनसेवा के जरिए मुश्किलों का सामना करने के उनके संकल्प का जिक्र किया.

उन्होंने कहा, “मुझे कई बार रामनाथ कोविंद की जन्मभूमि परौंख जाने का मौका मिला है. प्रधानमंत्री भी उस गांव में गए थे. परौंख गांव में उनका जन्म एक बेहद गरीब परिवार में हुआ था. बचपन में ही उन्होंने अपनी मां को खो दिया था. लेकिन उन्होंने कभी अपनी गरीबी और मुश्किलों को जीवन से भागने या अपने लिए कुछ मांगने का बहाना नहीं बनाया. उन्होंने गांव के स्कूल में पढ़ाई की और उच्च शिक्षा हासिल की.”

मुख्यमंत्री ने वकील के तौर पर कोविंद के सफर और सार्वजनिक जीवन में उनकी भूमिकाओं का भी जिक्र किया. इनमें राज्यसभा सांसद, बिहार के राज्यपाल और भारत के राष्ट्रपति के तौर पर उनका कार्यकाल शामिल है.

योगी ने कहा, “एक वकील के तौर पर वह वंचितों और गरीबों की आवाज बने. उन्होंने भारत के राष्ट्रवादी मिशन को अपने संघर्ष का हिस्सा बनाया. पहले बीजेपी के सदस्य और पदाधिकारी के तौर पर, फिर राज्यसभा सांसद, उसके बाद बिहार के राज्यपाल और आखिर में भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंचकर उन्होंने देश के सबसे लोकप्रिय राष्ट्रपतियों में से एक के रूप में अपनी पहचान बनाई.”

रामनाथ कोविंद ने जुलाई 2017 से जुलाई 2022 तक भारत के 14वें राष्ट्रपति के तौर पर काम किया. राष्ट्रपति बनने से पहले वह 2015 से 2017 तक बिहार के राज्यपाल थे.

कोविंद का जन्म 1 अक्टूबर 1945 को उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के परौंख गांव में हुआ था. उन्होंने वाणिज्य और कानून की पढ़ाई की. इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में वकील के तौर पर काम किया.

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