भोपाल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को भोपाल के भौंरी स्थित मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी के परेड ग्राउंड में 44वें-45वें बैच के उप पुलिस अधीक्षकों (डीएसपी) के दीक्षांत समारोह में हिस्सा लिया. उन्होंने परेड की सलामी ली और उसका निरीक्षण किया. उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षु अधिकारियों को शील्ड और प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया.
इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नए अधिकारियों को कर्तव्य के मंत्र भी दिए. उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि सोशल मीडिया के इस दौर में हमारे नए अधिकारी रील से ज्यादा रियल प्रॉब्लम सॉल्व करेंगे. डाकुओं और नक्सलवाद के बाद अब वर्ष 2029 तक ड्रग्स की समस्या का सफाया करना है.
मुख्यमंत्री ने पुलिस प्रशिक्षण अकादमी में 12 करोड़ रुपये की लागत से ऑडिटोरियम बनाने, विद्युत सब स्टेशन स्थापित करने और एक किलोमीटर लंबी एप्रोच रोड बनाने की घोषणा भी की. उन्होंने नक्सलवाद का खात्मा करने वाले 63 पुलिसकर्मियों को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन भी दिया.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज का दिन मध्यप्रदेश और पुलिस के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. प्रदेश को आज 48 नए जनसेवक मिल रहे हैं. इससे आज का दिन गौरवांवित हो रहा है. ये जनसेवक राज्य की सेवा करने के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, “मैं प्रदेश की साढ़े आठ करोड़ जनता की सुरक्षा का दायित्व संभालने जा रहे इन युवाओं को बधाई देता हूं. मैं उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूं.”
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश पुलिस का गौरवशाली अतीत रहा है. जब-जब प्रदेश में चुनौती आई है, तब-तब पुलिस जवानों ने उसका सामना करते हुए नए मानदंड स्थापित किए हैं. आजादी के बाद यह राज्य लंबे समय तक डाकुओं के साये में रहा है. चाहे चंबल अंचल हो या रीवा अंचल, पुलिस ने इन चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया और डाकुओं का सफाया किया. पुलिस ने नई पीढ़ी को पुरानी बीमारी से मुक्ति दिलाई.
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कभी यह कल्पना करना मुश्किल था कि प्रदेश से नक्सलवाद का संकट खत्म होगा. नक्सलियों की वजह से आदिवासी क्षेत्रों में विकास रुक गया था. लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प से असंभव जैसा लगने वाला लक्ष्य तय समय सीमा में पूरा हुआ. मध्यप्रदेश ने इस लक्ष्य को समय सीमा से पहले हासिल कर लिया.
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश वह गौरवशाली प्रदेश है जिसने समय सीमा से पहले नक्सलियों का सफाया कर अपनी दक्षता साबित की.
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नए अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि आपका चयन नई चुनौतियों के बीच हो रहा है. यह सोशल मीडिया का समय है. लेकिन हमारे सामने सोशल मीडिया से ज्यादा सोशल इश्यू हैं. आप सोशल मीडिया पर सक्रिय रहें, लेकिन अपने सोशल इश्यू को भी हल करें.
उन्होंने कहा, “आप समस्याओं के बजाय उनके समाधान पर ध्यान लगाएं. रील बनाने से ज्यादा रियल प्रॉब्लम सुलझाने पर ध्यान दें.”
उन्होंने कहा कि राज्य को उम्मीद है कि नए अधिकारी सोशल मीडिया की लोकप्रियता से आगे बढ़कर समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे. आप ऐसे अधिकारी बनें, जिनका सम्मान सभी वर्गों में समान रूप से हो. आपसे उम्मीद है कि कमजोर वर्ग के लिए आप देवदूत बनें.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बदलते दौर में अपराधों की परिस्थितियां भी बदल गई हैं. हर दिन नई चुनौतियों के बीच आपको संघर्ष करना है. आज की परेड में आपने जो विश्वास दिखाया है, वह अद्भुत है.
उन्होंने कहा कि आपका उत्साह, उमंग और उम्मीदें आसमान को पार करें, लेकिन कर्तव्य के रास्ते पर गंभीरता से चलें. परमात्मा एक ही बार जीवन देता है और मृत्यु सभी की आने वाली है. हम जीवन ऐसा बनाएं कि मृत्यु भी उसे गौरवांवित करे.
उन्होंने कहा कि पुलिस से उम्मीद है कि डाकुओं और नक्सलवादियों की चुनौती के बाद अब ड्रग्स की चुनौती को खत्म करे. वर्ष 2029 तक पुलिस ड्रग्स के खिलाफ निर्णायक भूमिका निभाए.
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के कल्याण की चिंता करना सरकार का कर्तव्य है. राज्य सरकार ने पिछले तीन साल में 17 हजार 710 पदों पर भर्ती की है. कुल 22 हजार 500 पदों पर भर्ती का लक्ष्य है. नवनियुक्त अधिकारी-कर्मचारियों का प्रशिक्षण लगातार जारी है.
उन्होंने कहा कि सरकार ने पुलिस विभाग को भी पदोन्नति का लाभ दिया है. इससे सभी अधिकारी-कर्मचारियों के बीच उत्साह और उमंग का माहौल बना है.
पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने कहा कि वर्दी वाली सेवाओं में पासिंग आउट परेड हमेशा हमारी यादों में जीवंत रहती है. वर्ष 2014 से डीएसपी स्तर के अधिकारियों की ट्रेनिंग भोपाल स्थित भौंरी अकादमी में कराई जा रही है.
उन्होंने कहा कि आज इस अकादमी से कुल 48 पुलिस अधिकारियों ने प्रशिक्षण पूरा किया है. इनमें 20 महिला अधिकारी भी शामिल हैं. अकादमी में पहली बार रेडियो संवर्ग के डीएसपी स्तर के अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया है. ये अधिकारी पुलिस की तकनीकी क्षमताओं और साइबर अपराध से लड़ाई को मजबूत करेंगे. इनमें 22 अधिकारी इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से हैं.
उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग ने फील्ड में तैनात पुलिस अधिकारियों के लिए एसओपी जारी की हैं. सभी अधिकारी इनका पालन सुनिश्चित करें, क्योंकि ड्यूटी के साथ अपनी सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है.
उन्होंने कहा कि प्रदेश में युवा पीढ़ी के बीच नशे का बढ़ता चलन बड़ी चुनौती है. मध्यप्रदेश पुलिस ने ‘नशे से दूरी है जरूरी’ अभियान चलाकर कठोर कार्रवाई की है. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश को 2029 तक नशा मुक्त करने का संकल्प लिया है. इसमें सभी नए पुलिस अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी.
उन्होंने कहा कि साइबर अपराध भी पुलिस के लिए बड़ी चुनौती है. राज्य पुलिस विभाग ने जन जागरूकता के लिए ‘सेफ क्लिक’ अभियान चलाया है. प्रदेश में साइबर क्षमता बढ़ाने की जरूरत है. इसके लिए साइबर थाने, साइबर हेल्प डेस्क, साइबर फॉरेंसिक और साइबर हेल्पलाइन की स्थापना से आम नागरिकों को राहत मिलेगी.