नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले स्थित बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में व्यावसायिक हीरा खनन की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड (एनसीएल) के निदेशक मंडल ने नई दिल्ली में हुई बैठक में लार्ज डायमीटर ड्रिलिंग शुरू करने को मंजूरी दी है. इस प्रक्रिया से किम्बरलाइट पाइप में मौजूद हीरे के वास्तविक भंडार का वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा. इसके बाद व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार होगी, जिसके आधार पर व्यावसायिक खनन पर अंतिम फैसला लिया जाएगा.
एनसीएल, एनएमडीसी लिमिटेड और छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन का संयुक्त उपक्रम है. कंपनी ने स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग, भू-भौतिकीय सर्वेक्षण और लक्षित ड्रिलिंग के जरिए क्षेत्र में किम्बरलाइट पाइप की पहचान की थी. करीब 200 टन बल्क सैंपल के परीक्षण में 1.22 कैरेट वजन के पांच प्राकृतिक हीरे मिले, जिससे क्षेत्र में हीरा युक्त भू-संरचना की पुष्टि हुई.
बैठक में बैलाडीला डिपॉजिट-4 और डिपॉजिट-13 की लौह अयस्क परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई. साथ ही वैज्ञानिक खनन, पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और स्थानीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया. छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह ने कहा कि बलौदा-बेलमुंडी परियोजना राज्य को देश के प्रमुख हीरा उत्पादक राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में ऐतिहासिक साबित हो सकती है.