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Saturday, 27 June, 2026
होमराजनीतिविजय की फिल्म के निर्माता को दिल्ली में नई जिम्मेदारी, कर्नाटक की जड़ों को लेकर तमिलनाडु में विवाद

विजय की फिल्म के निर्माता को दिल्ली में नई जिम्मेदारी, कर्नाटक की जड़ों को लेकर तमिलनाडु में विवाद

विजय के करीबी सहयोगी और 'जना नायगन' के प्रोड्यूसर वेंकटा नारायण को तमिलनाडु का दिल्ली प्रतिनिधि नियुक्त किए जाने पर विपक्ष ने उनकी योग्यता, पहचान और हितों के टकराव (कॉन्फ्लिक्ट ऑफ़ इंटरेस्ट) को लेकर सवाल उठाए हैं.

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चेन्नई: तमिलनाडु सरकार ने KVN प्रोडक्शंस के संस्थापक और मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की फिल्म ‘जना नायकन’ के निर्माता वेंकट नारायण के. को नई दिल्ली में राज्य का विशेष प्रतिनिधि नियुक्त किया है. इस फैसले के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है. आलोचकों का कहना है कि वेंकट नारायण के पास न प्रशासनिक अनुभव है, न राजनीतिक अनुभव. साथ ही वे कर्नाटक के रहने वाले हैं.

वेंकट नारायण के. बेंगलुरु के कारोबारी और फिल्म निर्माता हैं. वह KVN ग्रुप के संस्थापक और चेयरमैन हैं. यह रियल एस्टेट और मनोरंजन के क्षेत्र में काम करने वाला एक बड़ा समूह है. इससे पहले वह देश की बड़ी रियल एस्टेट कंपनी प्रेस्टिज ग्रुप के CEO रह चुके हैं. उन्होंने कंपनी के कारोबार को पूरे भारत में फैलाने में अहम भूमिका निभाई थी.

2020 में उन्होंने KVN प्रोडक्शंस की शुरुआत की. यह फिल्म निर्माण और वितरण कंपनी है, जिसने कम समय में कई भाषाओं की बड़ी फिल्मों का निर्माण किया. कंपनी ने यश समेत कई बड़े सितारों की फिल्मों का समर्थन किया है. वेंकट नारायण चार्टर्ड अकाउंटेंट, कॉस्ट अकाउंटेंट, कंपनी सेक्रेटरी हैं और कानून की पढ़ाई भी कर चुके हैं.

वेंकट नारायण का तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से करीबी पेशेवर रिश्ता KVN प्रोडक्शंस के जरिए शुरू हुआ. इसी कंपनी ने विजय की राजनीतिक एक्शन फिल्म ‘जना नायकन’ बनाई थी, जिसका निर्देशन एच. विनोथ ने किया था. इस फिल्म को राजनीति में पूरी तरह आने से पहले विजय की आखिरी फिल्म बताया गया था. इसके बाद वेंकट विजय के करीबी लोगों में शामिल हो गए और कई आधिकारिक दौरों पर विजय और तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के नेताओं के साथ दिखाई दिए.

23 जून 2026 को तमिलनाडु सरकार ने उन्हें एक साल के लिए नई दिल्ली में राज्य का विशेष प्रतिनिधि नियुक्त किया. यह नियुक्ति उनके कार्यभार संभालने की तारीख से लागू होगी. इस पद की जिम्मेदारी प्रशासनिक और नीतिगत मामलों में राज्य और केंद्र सरकार के बीच समन्वय बनाने की है.

मुख्यमंत्री की व्यक्तिगत पसंद मानी जा रही इस नियुक्ति का विरोध हो रहा है. विरोध करने वालों का कहना है कि उनके पास न राजनीतिक और न प्रशासनिक अनुभव है. साथ ही वह कर्नाटक से हैं, जबकि तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच कावेरी जल विवाद लंबे समय से चल रहा है.

विपक्षी दलों ने भी इस नियुक्ति की आलोचना की है. उनका कहना है कि केंद्र में तमिलनाडु के हितों की पैरवी करने जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी ऐसे व्यक्ति को नहीं दी जानी चाहिए, जिसके पास जरूरी अनुभव न हो और जो ऐसे पड़ोसी राज्य से आता हो, जिसके साथ तमिलनाडु का लंबे समय से जल विवाद चल रहा है.

DMK नेता कनिमोझी ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की और सवाल उठाया कि क्या तमिलनाडु में इस जिम्मेदारी के लिए कोई योग्य व्यक्ति नहीं था.

उन्होंने कहा, “दिल्ली में तमिलनाडु के अधिकारों की पैरवी करने वाले सरकारी पद पर केंद्र सरकार ने कर्नाटक के एक व्यक्ति को मंत्री के बराबर जिम्मेदारी वाले पद पर नियुक्त किया है. क्या केंद्र सरकार में इस जिम्मेदारी के लिए तमिलनाडु का एक भी योग्य व्यक्ति नहीं है? तमिलनाडु के अधिकारों से जुड़े मामलों में, जिनमें मेकेदातु बांध का मुद्दा भी शामिल है, क्या चुना गया व्यक्ति तमिलनाडु का प्रतिनिधित्व करेगा? या अपने गृह राज्य कर्नाटक का प्रतिनिधित्व करेगा?”

सरकार ने वेंकट नारायण की नियुक्ति का बचाव करते हुए कहा कि यह एक रणनीतिक फैसला है, जिससे उनके कॉरपोरेट नेटवर्क का इस्तेमाल बेहतर तालमेल और निवेश के अवसर बढ़ाने के लिए किया जाएगा. TVK के मंत्री के. ए. सेंगोट्टैयन ने कहा कि यह सरकार का नीतिगत फैसला है. उन्होंने शनिवार को मीडिया से कहा, “वेंकट नारायण को दिल्ली का विशेष प्रतिनिधि नियुक्त करना सरकार का नीतिगत फैसला है. दिल्ली में तमिलनाडु के अधिकारों की पैरवी करने वाले सरकारी पद पर उनकी नियुक्ति में कुछ भी गलत नहीं है.”

DMK सांसद पी. विल्सन ने भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने अपने गोपनीयता की शपथ का उल्लंघन किया है. उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश के उनके करीबी सहयोगियों को सरकार की उच्च स्तरीय बैठकों में शामिल होने दिया गया. उन्होंने सवाल उठाया कि जॉन अरोकियासामी और विष्णु रेड्डी मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की कैबिनेट बैठकों, समीक्षा बैठकों और दूसरी उच्च स्तरीय सरकारी बैठकों में किस अधिकार से शामिल हो रहे हैं.

उन्होंने X पर लिखा, “थिरु जॉन अरोकियासामी और थिरु विष्णु रेड्डी, दोनों आंध्र प्रदेश से हैं और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के करीबी सहयोगी और मित्र हैं. यह साफ नहीं है कि सरकार में उनका आधिकारिक पद क्या है, लेकिन उन्हें सचिवालय में मुख्यमंत्री के कक्ष के पास एक कमरा दिया गया है. अगर वे सरकारी कर्मचारी नहीं हैं, तो वे उन अत्यंत गोपनीय बैठकों में किस हैसियत से शामिल हो रहे हैं, जहां गोपनीय दस्तावेज बांटे जाते हैं?”

उन्होंने आगे आरोप लगाया कि इन लोगों की भागीदारी से संवैधानिक नियमों, कार्य संचालन नियमों और मुख्यमंत्री की गोपनीयता की शपथ के पालन को लेकर गंभीर सवाल उठते हैं. उन्होंने पूछा, “मुख्यमंत्री बताएं कि इन दोनों व्यक्तियों के आधिकारिक पद क्या हैं और वे किस अधिकार के तहत कैबिनेट बैठकों में शामिल हो रहे हैं और अधिकारियों को निर्देश दे रहे हैं.”

DMDK की प्रेमलता ने भी वेंकट नारायण की नियुक्ति की आलोचना की. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या ऐसा प्रतिनिधि अपने गृह राज्य के बजाय वास्तव में तमिलनाडु के हितों की रक्षा कर पाएगा. प्रेमलता ने कहा कि यह नियुक्ति तमिलनाडु के अधिकारों के खिलाफ है और उन्होंने द्रविड़ विचारधारा और तमिल पहचान का हवाला देते हुए इस फैसले की आलोचना की.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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