अगर व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पड़ोसी देशों को सहयोगी बनाए रखने के लिए जरूरी हैं, तो एक-दूसरे की सीमाओं का सम्मान करना इस रिश्ते का सबसे अहम हिस्सा होता है.
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के लगभग 20 साल के कार्यकाल में, जो 5 अगस्त 2024 को खत्म हुआ, बांग्लादेश भारत का एक अहम रणनीतिक सहयोगी था, भले ही दिल्ली और ढाका के बीच कुछ मतभेद रहे हों. लेकिन हसीना ने यह सुनिश्चित किया कि भारत की सुरक्षा सीमाओं का कभी उल्लंघन न हो.
मार्च में पश्चिम बंगाल में युवा बांग्लादेशी नेता उस्मान हादी के कथित हत्यारों को गिरफ्तार करके, दिल्ली ने BNP के तारिक रहमान के नेतृत्व वाली नई सरकार की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया है. ढाका को भी इस दोस्ती का जवाब देना चाहिए.
एक राजनीतिक हत्या और उसके बाद का असर
12 दिसंबर 2025 को, 32 साल के उस्मान हादी, जो 2024 के छात्र आंदोलन के प्रमुख नेता और “इंकिलाब मंचा” के प्रवक्ता थे, ढाका में अज्ञात हमलावरों द्वारा गोली मार दिए गए. उन्हें इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया, लेकिन बांग्लादेश में बढ़ती हिंसा के बीच उनकी मौत हो गई.
हादी, जो भारत के आलोचक थे, उनकी मौत के बाद भारत के खिलाफ नफरत बढ़ी और यह अफवाह फैली कि उनके हत्यारों को भारत ने शरण दी है.
भीड़ ने बांग्लादेश में भारतीय दूतावासों पर हमला किया और अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया. 18 दिसंबर को एक हिंदू कपड़ा मजदूर, दीपु चंद्र दास, की बेरहमी से हत्या कर दी गई, जिससे पूरी दुनिया स्तब्ध रह गई.
लेकिन भारत विरोधी माहौल पहले से ही बन रहा था, जिसमें मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के बयान और कदम भी एक कारण थे. यूनुस के “चीनी अर्थव्यवस्था के विस्तार” वाले बयान और भारत के पूर्वोत्तर को “लैंडलॉक्ड” बताने से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया.
अक्टूबर 2025 में यूनुस ने पाकिस्तान के सैन्य अधिकारी जनरल साहिर शमशाद मिर्जा को “आर्ट ऑफ ट्रायम्फ” नाम की एक पेंटिंग दी, जिसमें बांग्लादेश की सीमाएं भारत के कुछ इलाकों तक बढ़ती हुई दिखाई गई थीं. भारत ने इसे उकसाने वाला कदम माना और सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई.
16 फरवरी 2026 को अपने विदाई भाषण में भी यूनुस ने भारत के पूर्वोत्तर का जिक्र किया और कहा कि बांग्लादेश समुद्री रास्तों के जरिए इस क्षेत्र को आर्थिक अवसर दे सकता है.
उन्होंने कहा, “हमारा खुला समुद्र सिर्फ सीमा नहीं है, बल्कि दुनिया की अर्थव्यवस्था से जुड़ने का रास्ता है. यह क्षेत्र, नेपाल, भूटान और सेवन सिस्टर्स के साथ मिलकर बहुत आर्थिक क्षमता रखता है.”
यूनुस के जाने के बाद, भारत ने तारिक रहमान की नई सरकार के साथ काम करने की इच्छा दिखाई है. हादी के कथित हत्यारे राहुल उर्फ फैसल करीम मसूद और आलमगीर हुसैन, जो बांग्लादेशी नागरिक हैं, को पश्चिम बंगाल पुलिस ने बॉन्गांव से गिरफ्तार किया. पुलिस ने कहा कि वे बांग्लादेश में अपराध करने के बाद अवैध रूप से भारत आए थे और मौका मिलने पर वापस भागने की कोशिश कर रहे थे.
इन गिरफ्तारियों से यह साफ होता है कि भारत अपने पड़ोसी के खिलाफ गतिविधियों के लिए अपनी जमीन का इस्तेमाल नहीं होने देगा और रहमान सरकार के साथ गंभीरता से काम करना चाहता है.
हसीना सरकार में सूचना मंत्री रहे मोहम्मद अली अराफात ने दिप्रिंट से कहा कि भारत हमेशा बांग्लादेश के साथ दोस्ती बनाए रखेगा, खासकर उस सरकार के साथ जो “बांग्लादेश के हित में काम करे.”
उनके अनुसार, जब तक बांग्लादेश की सरकार 1971 के मुक्ति युद्ध की भावना पर कायम रहेगी, तब तक भारत के साथ दोस्ती बनी रहेगी.
उन्होंने कहा, “अगर कोई सरकार 1971 के सिद्धांतों से हटकर पाकिस्तान समर्थक हो जाती है, तो इससे भारत-बांग्लादेश संबंधों पर नकारात्मक असर पड़ेगा.”
नए सिरे से शुरुआत की जरूरत
भारत-बांग्लादेश संबंध तभी बेहतर हो सकते हैं जब दोनों देश नए सिरे से शुरुआत करें. 2004 में, जब तारिक रहमान की मां खालिदा जिया प्रधानमंत्री थीं, तब दोनों देशों के रिश्ते खराब थे.
अप्रैल 2004 में चिटगांव में 10 ट्रकों में भरे हथियार पकड़े गए थे, जो ULFA और अन्य उग्रवादी संगठनों के लिए थे, ताकि भारत को अस्थिर किया जा सके.
भारत की डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी के अधिकारी मेजर जनरल गगनजीत सिंह ने 2023 में एक इंटरव्यू में यह जानकारी दी थी.
उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य भी इस साजिश में शामिल थे और पाकिस्तान की ISI भी इसमें शामिल थी.
सबसे बड़ी चिंता की बात यह थी कि ये हथियार BNP और जमात-ए-इस्लामी के गठबंधन का फायदा उठाकर बांग्लादेश से भेजे जा रहे थे.
आज फिर बांग्लादेश में BNP की सरकार है. हालांकि उसका जमात-ए-इस्लामी से गठबंधन नहीं है, लेकिन सीमावर्ती इलाकों में इस पार्टी की जीत से भारत की सुरक्षा चिंताएं बढ़ी हैं.
भारत और बांग्लादेश की 4096 किलोमीटर लंबी सीमा है, जो दुनिया की सबसे लंबी सीमाओं में से एक है, और इसके कई हिस्सों में बाड़ नहीं है.
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय खुफिया एजेंसियों का मानना है कि जमात सीधे हमले के निर्देश नहीं देगी, लेकिन इसका बढ़ता प्रभाव ऐसा माहौल बना सकता है जहां नए लोग भर्ती हो सकें और प्रशासन सख्ती से कार्रवाई करने में हिचके.
वरिष्ठ पत्रकार और लेखक मानस घोष ने दिप्रिंट से कहा कि हादी के हत्यारों की गिरफ्तारी से भारत ने फिर साबित किया है कि वह अपराधियों के लिए सुरक्षित जगह नहीं बनेगा.
उन्होंने कहा, “मोदी सरकार पहले भी ऐसा कर चुकी है. गैंगस्टर सुब्रत बाइन और शेख मुजीबुर रहमान के हत्यारे कैप्टन अब्दुल माजेद को भी भारत ने बांग्लादेश को सौंपा था. अब बांग्लादेश की बारी है कि अगर भारतीय अपराधी वहां छिपते हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई करे.”
उन्होंने यह भी कहा कि खालिदा जिया के समय ULFA प्रमुख परेश बरुआ को बांग्लादेश से भारत के खिलाफ गतिविधियां चलाने में मदद मिली थी.
“अब यह तारिक रहमान सरकार पर है कि वह पुराने रास्ते से हटकर भारत के साथ अच्छे संबंध बनाए रखे,” घोष ने कहा.
हसीना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच अच्छे संबंध होने के बावजूद, दोनों देशों के बीच पानी के बंटवारे जैसे मुद्दों पर मतभेद रहे.
हसीना ने 4 सितंबर 2022 को ANI को दिए इंटरव्यू में कहा था कि भारत को जल-बंटवारे के मामले में कुछ उदारता दिखानी चाहिए. अक्टूबर 2021 में, हसीना ने मोदी सरकार से भारत में सांप्रदायिक हिंसा को रोकने की अपील भी की थी।
उन्होंने कहा था, “भारत को ध्यान रखना चाहिए कि वहां ऐसी घटनाएं न हों, क्योंकि इसका असर बांग्लादेश पर पड़ता है और यहां हिंदुओं पर हमले होते हैं.”
इन मतभेदों के बावजूद, दोनों देशों की दोस्ती इसलिए बनी रही क्योंकि वे एक-दूसरे की सुरक्षा सीमाओं का सम्मान करते थे. ढाका की नई सरकार को भी ऐसा ही करना चाहिए.
दीप हल्दर एक लेखक हैं और दिप्रिंट में कंट्रीब्यूटिंग एडिटर हैं. वे @deepscribble पर ट्वीट करते हैं. विचार निजी हैं.
(इस लेख को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
यह भी पढ़ें: खाड़ी युद्ध ने भारत की कमजोरियां उजागर कीं, अब राष्ट्रीय हित में आत्ममंथन का वक्त है
