लखनऊ: योगी सरकार ने पिछले साढ़े नौ वर्षों में प्रदेश की प्रमुख जल संरचनाओं के पुराने और जर्जर गेटों को बदलने का काम किया है. इसके तहत बैराज, बांध, हेड रेगुलेटर और अन्य जल संरचनाओं के गेट बदले गए हैं, ताकि सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण व्यवस्था बेहतर हो सके.
सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के मुताबिक, लखनऊ के गोमती बैराज के सभी 10 गेट बदल दिए गए हैं. पीलीभीत के चुक्का हेड रेगुलेटर के चारों गेट भी बदले जा चुके हैं. वहीं, नरौरा बैराज के 61 में से 13 गेट बदले गए हैं और बाकी 48 गेटों का काम जारी है.
सरकार के मुताबिक, प्रदेश में पहली बार 60 से 70 फीट की गहराई में पानी के भीतर स्थित गेटों को भी आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ गोताखोरों की मदद से बदला गया है. माताटीला बांध, मेजा-जरगो लिंक रेगुलेटर और कचनौदा बांध में इस तरह का काम किया गया है.
आपात स्थिति से निपटने के लिए कई प्रमुख बैराज और बांधों में स्पेयर गेट भी तैयार रखे गए हैं. विभाग का कहना है कि इससे गेट खराब होने की स्थिति में उसे तुरंत बदला जा सकेगा और किसानों को सिंचाई के पानी की आपूर्ति प्रभावित नहीं होगी.