नई दिल्ली: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को देहरादून स्थित वीर माधो सिंह भण्डारी उत्तराखण्ड प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में हिमालय दिवस के अवसर पर आयोजित ‘हिमालयो नाम नगाधिराजः’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया. उन्होंने हिमालय परिषद में मूलभूत सुविधाओं और संसाधनों के लिए 1 करोड़ रुपये देने की घोषणा की. साथ ही हिमालय संरक्षण और सतत विकास में उल्लेखनीय योगदान देने वालों को हर साल ‘हिमालय विभूति सम्मान’ देने का ऐलान किया.
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय उत्तराखंड की पहचान, संस्कृति और अस्तित्व का आधार है. जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग से ग्लेशियर, जल स्रोत और हिमालयी पारिस्थितिकी प्रभावित हो रही है. अतिवृष्टि, भूस्खलन, वनाग्नि और अचानक आने वाली बाढ़ जैसी घटनाएं भी नई चुनौतियां पैदा कर रही हैं.
उन्होंने कहा कि राज्य में विकास का मॉडल भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप होना चाहिए. सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार की जरूरतों के साथ पर्यावरण संरक्षण का संतुलन जरूरी है. उन्होंने कहा कि ऐसा विकास होना चाहिए जिसमें जंगल भी बचें, नदियां स्वच्छ रहें और पर्यटन के साथ पहाड़ों की धारण क्षमता का ध्यान रखा जाए.
धामी ने मिशन लाइफ, नमामि गंगे और अन्य केंद्र सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि हिमालय संरक्षण में जनभागीदारी महत्वपूर्ण है. उन्होंने पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान और तकनीक से जोड़ने तथा स्थानीय रोजगार और पर्यावरण अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर दिया.