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Wednesday, 14 January, 2026
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NC सांसद मेहदी ने आर्टिकल 370 खत्म करने के ‘नॉर्मलाइजेशन’ को लेकर अपनी ही सरकार पर क्यों साधा निशाना

नेशनल कॉन्फ्रेंस के श्रीनगर सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने कहा है कि उनकी पार्टी अपने मुख्य चुनावी वादे को पूरा करने में नाकाम रही है, और उसने विरोध करने के बजाय केंद्र के साथ 'आरामदायक' रिश्ता चुना है.

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नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनावों में जनता ने जो अभूतपूर्व जनादेश दिया था, उसे नेशनल कॉन्फ्रेंस नेतृत्व ने केंद्र में मोदी सरकार के साथ सहयोग करके धोखा दिया है. यह आरोप पार्टी के श्रीनगर से सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी ने लगाया है.

दिप्रिंट को दिए इंटरव्यू में मेहदी ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अनुच्छेद 370 को हटाने के खिलाफ सक्रिय रूप से लड़ने का वादा किया था, लेकिन उमर अब्दुल्ला के जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री बनने के बाद पार्टी इस वादे पर खरी नहीं उतरी.

उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार का जिक्र करते हुए मेहदी ने कहा कि अगर बीजेपी के साथ अच्छे रिश्ते रखने का मकसद सिर्फ रोजमर्रा का शासन चलाना या ज्यादा फंड हासिल करना था, तो फिर बीजेपी के लिए जम्मू कश्मीर में चुनाव जीतने के रास्ते खोल देने चाहिए थे.

मेहदी ने कहा, “अगर बात सिर्फ राज्य का दर्जा बहाल करने की होती, तो हमें जम्मू और कश्मीर में बीजेपी को सरकार बनाने का रास्ता देना चाहिए था. अगर जम्मू और कश्मीर में उनकी अपनी सरकार होती, तो वे राज्य का दर्जा बहाल कर सकते थे और कर भी देते. लेकिन हम इसमें विश्वास नहीं करते. हम इस बात में विश्वास करते हैं कि अगर हम अपनी राजनीतिक लड़ाई सिर्फ राज्य का दर्जा बहाल करने तक रोक देते हैं. अगर हम अपनी लड़ाई रोक देते हैं या अपने एजेंडे को रूटीन गवर्नेंस में बदल देते हैं. तो इसका मतलब मौजूदा स्थिति को सही ठहराना होगा. और यह हमारा मकसद नहीं है.”

श्रीनगर के सांसद मेहदी कई मुद्दों पर अपनी ही पार्टी के नेतृत्व से टकराव में रहे हैं, जिनमें नई आरक्षण नीति भी शामिल है.

पिछले साल दिसंबर में उन्होंने पार्टी लाइन से हटकर उमर अब्दुल्ला के आवास के बाहर कश्मीरी छात्रों के साथ प्रदर्शन का नेतृत्व किया था. एनसी के बडगाम उम्मीदवार आगा सैयद महमूद मेहदी के रिश्तेदार हैं. विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी ने राज्य का दर्जा बहाल करने, पब्लिक सेफ्टी एक्ट को खत्म करने और अनुच्छेद 370 और 35ए के तहत विशेष संवैधानिक दर्जा बहाल करने का वादा किया था.

मेहदी ने कहा कि उन्होंने किसी व्यक्ति के खिलाफ व्यक्तिगत रूप से कुछ नहीं कहा है. वह सिर्फ जम्मू कश्मीर के लोगों से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं. उन्होंने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस का हमेशा यह रुख रहा है कि ऐसे हालात में जो भी सिर्फ रोजमर्रा के शासन की बात करता है, वह बीजेपी की भाषा बोल रहा है और नए सामान्य हालात यानी घटे हुए दर्जे को वैध ठहराना चाहता है.

उन्होंने कहा कि हम मौजूदा हालात को सामान्य और वैध नहीं बनाना चाहते थे. इसलिए हमने कहा था कि जम्मू कश्मीर के अन्य राजनीतिक दल बीजेपी के इशारे पर काम कर रहे हैं. हमने कहा था कि हम यथास्थिति को सक्रिय रूप से चुनौती देंगे. लेकिन पिछले डेढ़ साल में, विधानसभा चुनाव जीतने के बाद, हमने संस्थागत स्तर पर इतना संघर्ष नहीं किया कि अपने वादों को लागू करा सकें या अनुच्छेद 370 हटाने के खिलाफ प्रभावी लड़ाई लड़ सकें.

मेहदी ने कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि पार्टी के पास इच्छाशक्ति और वादों को पूरा करने का स्पष्ट रोडमैप होगा.

उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति के रूप में उनके पास अधिकारों और सुरक्षा की बहाली का रोडमैप है. समस्या यह है कि उनकी अपनी पार्टी में इच्छा और मंशा की कमी है, जो सरकार को भी मदद पहुंचा रही है. अगर मंशा और इच्छा दिखती, तो वह चर्चा कर सकते थे. लेकिन जब वह पार्टी से वादे पूरे करने की बात करते हैं, तो उन्हें घेर लिया जाता है. पार्टी ने कभी उनसे यह नहीं पूछा कि रोडमैप क्या है या कैसे लड़ना चाहिए.

मेहदी ने कहा कि वह सार्वजनिक रूप से केवल पार्टी की नीतियों, एजेंडे और वादों के क्रियान्वयन पर ही बात कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि लोगों से सबसे अहम वादा यह था कि पार्टी अनुच्छेद 370 को हटाने के खिलाफ सक्रिय रूप से लड़ेगी और इसे बहाल कराएगी. यही मुख्य एजेंडा था.

मेहदी ने कहा कि उन्होंने चुनाव प्रचार को रोजमर्रा के शासन के वादों पर आधारित नहीं किया था.

जब उनसे कहा गया कि अनुच्छेद 370 की बहाली केंद्र का विषय है और जम्मू कश्मीर सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता, और यह भी कि उमर अब्दुल्ला विकास के लिए केंद्र से अच्छे रिश्ते बना रहे हैं, तो मेहदी ने तर्क दिया कि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे कई राज्य केंद्र सरकार से वैचारिक लड़ाई लड़ रहे हैं.

उन्होंने कहा कि संविधान राज्यों को यह अनुमति देता है कि वे केंद्र सरकार से वैचारिक लड़ाई लड़ते हुए भी सामान्य रूप से काम कर सकते हैं, चाहे केंद्र में कोई भी सरकार हो.

उन्होंने कहा कि राज्य का दर्जा या ज्यादा फंड पाने के बदले भाजपा के साथ नरम रुख अपनाना राजनीतिक एजेंडे और जनता के जनादेश को छोड़ने जैसा है. यह जम्मू कश्मीर के लोगों के साथ विश्वासघात है.

मेहदी ने कहा कि उन्होंने ये मुद्दे पार्टी के भीतर उठाए, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. आखिरकार उन्हें वर्किंग कमेटी जैसी अहम बैठकों में बुलाया ही नहीं गया.

लोकसभा सांसद ने कहा कि पार्टी ने चुनाव से पहले किए गए वादों के ठीक उलट रास्ता चुन लिया है और जो भी उस लाइन से बाहर की बात करता है, वह पार्टी को खटकता है.

उन्होंने कहा कि पार्टी को लगता है कि वह खुद एक परेशानी हैं. पार्टी वही लाइन अपनाना चाहती है, जिसके खिलाफ उसने चुनाव लड़ा था. इसलिए पार्टी सुधार या चर्चा की जरूरत महसूस नहीं करती. वह इस स्थिति में कुछ नहीं कर सकते. कई लोग उनसे सहमत हैं, लेकिन कितने लोग खुलकर सामने आएंगे, यह साफ नहीं है.

मेहदी ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू कश्मीर के लोग खुश नहीं हैं. उन्होंने यह भी कहा कि यह तर्क गलत साबित हुआ है कि संवैधानिक व्यवस्था हटाने से उग्रवाद खत्म होगा.

उन्होंने कहा कि उग्रवाद आज भी मौजूद है. बल्कि आतंक की घटनाएं पहले से ज्यादा गंभीर हुई हैं. उन्होंने पहलगाम का जिक्र किया, जिसे उन्होंने आतंक की सबसे गंभीर घटनाओं में से एक बताया. इसके अलावा जम्मू के उन इलाकों में भी हिंसा हुई, जहां पहले ऐसी घटनाएं नहीं होती थीं.

उन्होंने कहा कि अगर कुछ था, तो अनुच्छेद 370 ही अलगाववाद और आतंकवाद के खिलाफ एक तर्क था.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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