Friday, 27 May, 2022
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UP के ब्राह्मणों को हैं ‘शिकायतें’, BJP ने 2022 चुनाव में उन्हें लुभाने के लिए बनाया 4 सदस्यों का पैनल  

समिति बनाने का फैसला रविवार को भाजपा के उत्तर प्रदेश चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान के साथ राज्य में पार्टी के ब्राह्मण नेताओं की बैठक में लिया गया.

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नई दिल्ली: भाजपा ने उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों को लुभाने के लिए रविवार को राज्य में 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले चार सदस्यीय समिति का गठन किया है, दिप्रिंट को इसकी जानकारी मिली है. पार्टी सूत्रों ने कहा कि समिति को राज्य के सभी 403 विधानसभा क्षेत्रों में ब्राह्मण आउटरीच कार्यक्रम आयोजित करने का काम सौंपा गया है.

समिति में शामिल सदस्य मोदी सरकार में पूर्व राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ला, सांसद महेश शर्मा, पार्टी नेता अभिजीत मिश्रा और राज्यसभा सदस्य रामभाई मोकारिया हैं.

सूत्रों ने कहा कि अजय मिश्रा टेनी, जिन्हें कुछ महीने पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल में ब्राह्मण चेहरे के तौर पर शामिल किया गया था- और जिनके बेटे पर लखीमपुर खीरी में उनकी कार से किसानों को कुचलने का आरोप है– भी आउटरीच कार्यक्रम में शामिल होंगे.

सूत्रों ने कहा कि समिति को गठित करने का फैसला रविवार को भाजपा के यूपी चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान के साथ राज्य में पार्टी के ब्राह्मण नेताओं की बैठक में लिया गया. दिल्ली में बैठक में यूपी के डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा, राज्य के कैबिनेट मंत्री श्रीकांत शर्मा, जितिन प्रसाद, बृजेश पाठक और सांसद रीता बहुगुणा जोशी शामिल रहे.

बैठक में मौजूद रहे भाजपा के एक सीनियर नेता ने कहा, ब्राह्मण आउटरीच कमेटी का गठन ‘पार्टी द्वारा प्राप्त इनपुट को फॉलो करना है जिसको लेकर राज्य में ब्राह्मणों के बीच पार्टी के खिलाफ कुछ शिकायतें हैं, जिन पर ध्यान देने की जरूरत है.’

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नेता ने कहा, ‘हालांकि भाजपा सरकार ने समाज के हर वर्ग के लिए अथक प्रयास किया है, लेकिन वोट के बेहतर ढंग से ट्रांसफर के लिए ब्राह्मणों के बीच अधिक आक्रामक तरीके से प्रचार करने की जरूरत महसूस की गई.’

हालांकि, प्रधान ने रविवार की बैठक के बाद मीडिया से कहा था कि समाज या जाति का कोई भी वर्ग भाजपा से नाराज नहीं है. उन्होंने कहा, ‘उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार में कई ब्राह्मण मंत्री हैं और पार्टी समाज के सभी वर्गों को आगे ले जाने का काम करती है.’


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‘क्या बीजेपी राम मंदिर, काशी विश्वनाथ के काम को गिनाएगी’

ब्राह्मणों की संख्या यूपी की कुल आबादी का 16 फीसदी है और पूर्वी यूपी में उनका काफी प्रभाव है. इस क्षेत्र ने भाजपा की 2017 के विधानसभा चुनाव की जीत में एक बड़ी भूमिका निभाई थी, यही वजह है कि पार्टी ने यहां इस जाति को लुभाने के लिए कई नेताओं को लगाया है.

जब इस साल की शुरुआत में यूपी में बीजेपी सरकार ने कैबिनेट में फेरबदल किया, तो मंत्रालय में एक अतिरिक्त जितिन प्रसाद शामिल हुए, जिन्होंने पहले योगी सरकार पर राज्य में ब्राह्मणों के प्रति ‘सौतेला’ व्यवहार करने का आरोप लगाया था. यह तब की बात है जब वह कांग्रेस के सदस्य थे और तब तक बीजेपी में शामिल नहीं हुए थे. सीएम योगी आदित्यनाथ एक ठाकुर हैं.

ऊपर जिक्र किए गए भाजपा के वरिष्ठ नेता ने ब्राह्मणों को लेकर पार्टी के आउटरीच कार्यक्रम के हिस्से के तौर पर कहा, ‘समुदाय के नेता ब्राह्मण सम्मेलनों और बैठकों के आयोजन जैसे कई तरीकों से ब्राह्मण समुदाय तक पहुंचेंगे, जहां उन्हें अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण काशी विश्वनाथ मंदिर का पुनर्विकास और बाकी काम जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किए गए हैं, को लेकर पार्टी के प्रयासों के बारे में बताया जाएगा.

यूपी चुनाव में जाति ने हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और अन्य दल भी 2022 के चुनावों के लिए ब्राह्मणों को लुभाते रहे हैं. वहीं जहां बहुजन समाज पार्टी ब्राह्मण सम्मेलन आयोजित करती रही है, समाजवादी पार्टी ने प्रबुद्ध सम्मेलन (‘बौद्धिक बैठकें’) आयोजित किए हैं जो मुख्य रूप से ब्राह्मणों पर केंद्रित रहा है.

कहा जा रहा है कि कांग्रेस भी एक ब्राह्मण मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार को पेश करने का विकल्प खोज रही है.

(इस ख़बर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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