scorecardresearch
Thursday, 13 June, 2024
होमचुनावमध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव'मुख्यमंत्री पद छोटी बात है', चुनाव जीतने के बाद शिवराज चौहान बोले- हम वही करते हैं जो पार्टी कहती है

‘मुख्यमंत्री पद छोटी बात है’, चुनाव जीतने के बाद शिवराज चौहान बोले- हम वही करते हैं जो पार्टी कहती है

ऐसा माना जा रहा है कि मध्य प्रदेश के 5 बार के सीएम की लाडली बहना योजना ने राज्य में सत्ता विरोधी लहर को कम करने में मदद की, लेकिन शिवराज जीत का श्रेय पीएम मोदी और 'डबल इंजन' शासन को देते हैं.

Text Size:

भोपाल: मध्य प्रदेश के चार बार के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विधानसभा चुनाव में बीजेपी की जीत का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देते हुए कहा है कि भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए मुख्यमंत्री पद एक “छोटी बात” है, वे वही करते हैं जो पार्टी उनसे कहती है.

चौहान की लाडली बहना योजना को राज्य में सत्ता विरोधी लहर को कम करने में मदद करने वाले प्रमुख कारकों में से एक माना जा रहा है. अपनी पार्टी द्वारा एमपी की 230 सीटों में से 163 सीटों पर जीत हासिल करने के एक हफ्ते से भी कम समय में दिप्रिंट के साथ एक विशेष इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि मोदी का तीसरी बार पीएम बनना न केवल भारत के लिए बल्कि “दुनिया के लिए भी” महत्वपूर्ण है.

“डबल इंजन सरकार” एक शब्द है जिसका उपयोग भाजपा केंद्र और राज्य स्तर पर अपनी सरकार का वर्णन करने के लिए करती है.

भाजपा के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले चौहान ने दिप्रिंट को बताया, “ये (सीएम का पद) हमारे लिए छोटी चीजें हैं. हम खुद को केंद्र में रखकर काम नहीं करते. पार्टी हमें काम देती है और हम उसे करते हैं. वहां कौन होगा (अगला सीएम) और कौन नहीं, यह निर्दिष्ट समिति (भाजपा संसदीय बोर्ड) को देखना है. ये बातें हमारे सोचने के लिए नहीं हैं. हम उन पर टिप्पणी नहीं करते.”

यह पूछे जाने पर कि अगर पार्टी उनसे कहे तो क्या वह पांचवें कार्यकाल के लिए सहमत होंगे, उन्होंने कहा कि “पार्टी मुझे जहां भी रखेगी और जो कुछ भी करने के लिए कहेगी, मैं करूंगा.”

अच्छी पत्रकारिता मायने रखती है, संकटकाल में तो और भी अधिक

दिप्रिंट आपके लिए ले कर आता है कहानियां जो आपको पढ़नी चाहिए, वो भी वहां से जहां वे हो रही हैं

हम इसे तभी जारी रख सकते हैं अगर आप हमारी रिपोर्टिंग, लेखन और तस्वीरों के लिए हमारा सहयोग करें.

अभी सब्सक्राइब करें

चौहान की टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब माना जा रहा है कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व उन्हें एक और कार्यकाल के लिए मुख्यमंत्री नामित करने के लिए अनिच्छुक है और पार्टी “नए चेहरे की तलाश” में है.

उनके नेतृत्व में चुनाव लड़ने की पार्टी की अनिच्छा के बावजूद, जैसा कि पहले किया गया था, चौहान – जो राज्य भर में ‘मामा’ (चाचा) के नाम से लोकप्रिय हैं – ने चुनाव से पहले 160 से अधिक सार्वजनिक बैठकें और रोड शो किए.

हालांकि सरकार की लाडली बहना योजना, जिसके तहत वह पात्र महिलाओं को 1,250 रुपये का मासिक वजीफा देने का वादा करती है, को व्यापक रूप से चुनाव में गेम चेंजर के रूप में देखा गया है, चौहान का मानना है कि यह एक सामूहिक प्रयास था.

उन्होंने कहा, ”हमने सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ा. हमारे हर एक नेता ने अपने कर्तव्यों को पूरा किया और इसका श्रेय सभी को जाता है. दिन-रात काम करना मेरा भी कर्तव्य था.”

उन्होंने कहा, राज्य के सीएम के तौर पर वह बीजेपी को जीत दिलाना चाहते थे. चौहान ने कहा, “इससे भी अधिक क्योंकि हम मध्य प्रदेश में विकास और राज्य के लोगों के कल्याण के लिए जो चीजें शुरू की थीं, उन्हें आगे बढ़ाना चाहते थे. जब आप किसी लक्ष्य के बारे में इतनी दृढ़ता से सोचते हैं तो ईश्वर आपको वह शक्ति भी देता है कि आपको भूख-प्यास नहीं लगती, जो कि मेरे साथ हुआ. मैंने दिन-रात काम किया.”


यह भी पढ़ें: मध्य प्रदेश में असली सवाल: क्या राजनीतिक परिवर्तन प्रदेश में सामाजिक बदलाव की राह खोलेगा?


अगला कदम – सभी 29 संसदीय सीटें जीतना

चौहान के मुताबिक, जीत का श्रेय केवल लाडली बहना योजना को नहीं दिया जा सकता.

महिला-केंद्रित केंद्रीय योजनाएं जैसे कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसे अभियान, और राज्य सरकार की अन्य योजनाओं के साथ मिलकर महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक तिहाई आरक्षण प्रदान करने का मोदी सरकार के निर्णय को भी श्रेय जाता हैं. उन्होंने कहा कि लाडली लक्ष्मी योजना और कन्यादान योजना ने महिलाओं के वोटों को मजबूत करने में मदद की.

उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री की लोकप्रियता, लोगों का उन पर भरोसा और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना और आयुष्मान भारत योजना जैसी केंद्र की योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन का जीत पर प्रभाव पड़ा.”

पार्टी की भारी जीत के बाद, कई भाजपा सांसद और नेता केंद्रीय नेतृत्व से मिलने के लिए दिल्ली पहुंचे. लेकिन चौहान मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रमुख कमल नाथ के गढ़ छिंदवाड़ा में एक सार्वजनिक बैठक को संबोधित करने गए, जहां भाजपा सभी सात विधानसभा सीटें हार गई. यहां, मुख्यमंत्री ने ‘मिशन 29’ लॉन्च किया, जो राज्य की सभी 29 संसदीय सीटों को जीतने के लिए पार्टी का मिशन है.

वह दिल्ली की बजाय छिंदवाड़ा क्यों गए? उन्होंने कहा, दिल्ली जाने वाले ज्यादातर लोग सांसद थे.

उन्होंने कहा, “अगर कोई केंद्रीय मंत्री या सांसद है, तो वे दिल्ली में होंगे जो स्वाभाविक है. दूसरी ओर, मेरा मिशन सभी 29 लोकसभा सीटें जीतना और नरेंद्र मोदी को एक बार फिर प्रधानमंत्री बनाने में योगदान देना है.”

उन्होंने कहा कि मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से प्रगति कर रहा है.

उन्होंने कहा, “देश पहले ही कई चीजों में नंबर 1 बन चुका था. मेरा मानना है कि उनके नेतृत्व में भारत सर्वश्रेष्ठ देश बनेगा और विश्व का नेतृत्व करेगा. नरेंद्र मोदी का प्रधानमंत्री बनना न केवल देश के लिए बल्कि दुनिया के लिए भी महत्वपूर्ण है.”

(संपादन: अलमिना खातून)
(इस ख़बर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


यह भी पढ़ें: MP के ‘मामा’ शिवराज सिंह चौहान ने कैसे भितरखाने घिरे होने पर भी BJP के लिए बदल दिए हालात


 

share & View comments