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Thursday, 17 September, 2026
होमराजनीति'गांवों में लगे QR कोड वाले पोस्टर' :सुखबीर बादल ने CM मान की पत्नी पर साधा निशाना

‘गांवों में लगे QR कोड वाले पोस्टर’ :सुखबीर बादल ने CM मान की पत्नी पर साधा निशाना

विपक्ष के नेताओं ने रेप केस में 5 करोड़ रुपये की कथित मांग के मामले में डॉ. गुरप्रीत कौर पर हमले तेज़ कर दिए हैं, जबकि उन्होंने इन आरोपों से इनकार किया है और कानूनी कार्रवाई भी की है.

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चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा चुनाव अगले साल की शुरुआत में होने की उम्मीद है. ऐसे में विपक्ष ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर हमला तेज कर दिया है और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर उनकी पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर को फिर से निशाने पर लिया है.

निहाल सिंह वाला में ‘पंजाब बचाओ’ रैली के दौरान शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर बादल ने मुख्यमंत्री की पत्नी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने गांवों की दीवारों पर पेमेंट के लिए QR कोड वाले पोस्टर देखे हैं. डॉ. गुरप्रीत कौर पर आरोप है कि उनके एक करीबी रिश्तेदार अमरदीप ग्रेवाल ने रेप के आरोपी गुरिंदर सिंह उर्फ गुरी चहल को मामले में क्लीन चिट दिलाने में मदद करने के लिए 5 करोड़ रुपये मांगे.

पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चरणजीत सिंह चन्नी ने भी मंगलवार को चंडीगढ़ में एक रैली के दौरान डॉ. गुरप्रीत कौर को निशाना बनाया था. चन्नी ने कहा, “रेप के आरोपियों को खुलेआम बच निकलने दिया गया है. भगवंत मान, आपकी पत्नी ने 5-5 करोड़ रुपये लिए हैं.”

कौर ने रेप मामले में किसी भी तरह की भूमिका से साफ इनकार किया है. उन्होंने कहा कि विपक्ष को जब यह समझ आया कि वह दूसरे मुद्दों पर मुख्यमंत्री को निशाना नहीं बना सकता, तो उसने बदनाम करने के लिए ये आरोप लगाए.

उन्होंने पिछले महीने जब पहली बार ये आरोप सामने आए थे, तब मीडिया से कहा था, “मैं कभी किसी चीज से नहीं डरी हूं. और ये झूठे आरोप हैं, जो पूरी तरह बेबुनियाद और निराधार हैं. जो लोग मुझ पर ये आरोप लगा रहे हैं, उन्हें सबूत के साथ तैयार रहना चाहिए, नहीं तो उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा.”

दिप्रिंट ने मुख्यमंत्री आवास के जरिए फोन पर डॉ. गुरप्रीत मान से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन बार-बार कोशिश के बावजूद उनसे संपर्क नहीं हो सका. जवाब मिलने पर इस रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा.

नकली पोस्टर

बुधवार को अकाली दल ने एक बयान में दावा किया कि चुनाव से पहले चलाए गए एक तरह के नकली पोस्टर अभियान के तहत पंजाब के कई गांवों में पोस्टर लगाए गए हैं. पार्टी ने कहा कि ये पोस्टर SAS नगर (मोहाली), लुधियाना, पटियाला, फिरोजपुर, कोटकपूरा, मोगा और पठानकोट में कई इलाकों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और बाजारों में देखे गए.

अकाली दल ने आगे आरोप लगाया कि पोस्टर पर दिए गए QR कोड को स्कैन करने पर डॉ. गुरप्रीत कौर के रिश्तेदार अमरदीप ग्रेवाल और रेप के आरोपी के दोस्त सिमरनजीत सिंह हुंदल के बीच हुई बातचीत की एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग चलती है.

कथित ऑडियो को अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने इस महीने की शुरुआत में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सार्वजनिक भी किया था.

रिकॉर्डिंग में एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को यह भरोसा दिलाते हुए सुनाई देता है कि वह उसके दोस्त के खिलाफ दर्ज पांच मामलों या शिकायतों को सुलझाने में मदद करेगा. बातचीत में दोनों लोग इस मदद के बदले रकम तय करने पर भी चर्चा करते हुए दिखाई देते हैं.

मजीठिया ने आरोप लगाया था कि 5 करोड़ रुपये की “डील” के बाद पुलिस ने चहल के खिलाफ रेप के मामलों को बंद करने की कोशिश की थी. मजीठिया ने इन आरोपों की CBI जांच की मांग की थी.

हुंदल ने इस महीने की शुरुआत में जारी एक वीडियो संदेश के जरिए कहा था कि वह मुख्यमंत्री की पत्नी से कभी नहीं मिला और न ही वह ऐसी किसी डील में शामिल था.

उन्होंने कहा, “यह सब गंदी राजनीति का नतीजा है. अगर राजनेताओं को इस तरह की राजनीति करनी है, तो उन्हें पत्नियों और बेटियों को इसमें नहीं लाना चाहिए.” उन्होंने कहा कि उनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है और अगर किसी ने उन्हें इसमें फंसाने की कोशिश की, तो वह कानूनी रास्ता अपनाएंगे.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने 22 अगस्त को पंजाब के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी किया था. यह नोटिस रेप के मामले को दबाने के लिए 5 करोड़ रुपये मांगने के आरोप को लेकर जारी किया गया था. आयोग ने उन्हें इन आरोपों की जांच कराने और दो हफ्ते के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) आयोग के सामने पेश करने का निर्देश दिया था.

नोटिस में NHRC ने कहा कि उसे लीगल राइट्स ऑब्ज़र्वेटरी (LRO) की ओर से एक शिकायत मिली थी. इसमें पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस रंजीत सिंह ने सार्वजनिक तौर पर आरोप लगाया था कि “5 करोड़ रुपये की मांग की गई थी, जिसका संबंध पंजाब के मुख्यमंत्री की पत्नी से कथित तौर पर जुड़े रेप के मामले से था.”

रिटायर्ड जस्टिस रंजीत सिंह, जो एक गैर-सरकारी संगठन पंजाब ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन (PHRO) के प्रमुख हैं, ने पिछले महीने चंडीगढ़ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी और इस मामले को उठाया था.

उन्होंने मीडिया को बताया था कि एक रेप पीड़िता के पिता ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर की है. इसमें आरोप लगाया गया है कि अमृतसर में दर्ज उनकी बेटी के मामले की पंजाब पुलिस ठीक से जांच नहीं कर रही है और मामले को CBI को सौंपा जाना चाहिए.

इसके बाद डॉ. गुरप्रीत कौर ने जस्टिस रंजीत सिंह, बिक्रम सिंह मजीठिया और कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा के खिलाफ कानूनी मुकदमा दायर किया.

तीनों को उनके खिलाफ गलत जानकारी फैलाने के आरोप में माफी मांगने के लिए कानूनी नोटिस भेजे गए. हालांकि, तीनों ने सार्वजनिक तौर पर कहा है कि वे अदालत में अपने बयानों का बचाव करेंगे और इसके लिए पर्याप्त सबूत भी पेश करेंगे.

मामला

30 जून को अमृतसर के 55 वर्षीय एक व्यक्ति ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. इसमें आरोप लगाया गया था कि उसकी बेटी का गुरिंदर सिंह उर्फ गुरी चहल ने अपहरण किया और उसके साथ रेप किया. चहल मोहाली का रहने वाला है.

पिता ने कहा कि आरोपी ने उसकी बेटी से शादी करने का वादा भी किया था. उन्होंने बताया कि 29 अप्रैल को FIR दर्ज की गई थी और उनकी बेटी 1 मई को मिली थी. उन्होंने आगे आरोप लगाया कि आरोपी के पास उसकी निजी तस्वीरें थीं और वह उसे ब्लैकमेल भी कर रहा था.

अदालत में दायर याचिका में कहा गया कि आरोपी को 13 मई को गिरफ्तार किया गया था, लेकिन पुलिस ने निष्पक्ष और सही तरीके से जांच नहीं की. इसके कारण आरोपी को जेल से छोड़ दिया गया. पीड़िता के पिता ने आरोपी चहल के अलावा हुंदल और ग्रेवाल को भी प्रतिवादी बनाया था.

पीड़िता के पिता ने याचिका में कहा कि प्रतिवादी अमृतसर पुलिस पर मामले को दबाने के लिए दबाव बना रहे थे. उन्होंने कहा कि चहल ने पीड़िता से बताया था कि वह एक गैंगस्टर के करीब है और उसे अपने पास मौजूद हथियार भी दिखाए थे.

पिता ने यह भी दावा किया कि 9 जून को हुंदल ने चहल की ओर से हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी. इसमें आरोप लगाया गया था कि ग्रेवाल, जो खुद को मुख्यमंत्री की पत्नी का रिश्तेदार बताता था, चहल के खिलाफ रेप के झूठे मामलों को दबाने के लिए उनकी ओर से करोड़ों रुपये मांग रहा था.

हुंदल की याचिका, जिसकी एक कॉपी पीड़िता के पिता की ओर से दायर याचिका के साथ लगाई गई थी, में अदालत से जान और आजादी की सुरक्षा और “जबरन वसूली, आपराधिक धमकी, राजनीतिक प्रभाव और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग से जुड़े गंभीर आरोपों” से संबंधित इलेक्ट्रॉनिक सामग्री को सुरक्षित रखने की मांग की गई थी.

हुंदल ने आरोप लगाया था कि वह चहल के मामलों को कानूनी तौर पर देख रहा था. इसी दौरान ग्रेवाल ने उससे संपर्क किया और चहल के खिलाफ मामलों को खत्म कराने के लिए करोड़ों रुपये मांगे. ग्रेवाल ने इसके लिए मुख्यमंत्री के साथ अपनी नजदीकी का हवाला दिया था. हुंदल ने अपनी याचिका के साथ चहल के मामलों से जुड़ी ग्रेवाल के साथ फोन पर हुई दो कथित बातचीत की ट्रांसक्रिप्ट भी लगाई थी.

बाद में हुंदल ने हाई कोर्ट से यह याचिका वापस ले ली थी.

हालांकि, रेप पीड़िता के पिता की ओर से दायर याचिका का निपटारा करते हुए जस्टिस मनदीप पन्नू ने 20 जुलाई को आदेश दिया कि मामले की जांच अमृतसर पुलिस से लेकर स्पेशल डीजीपी वीमन को सौंप दी जाए.

आदेश में कहा गया है, “विशेष पुलिस महानिदेशक अपने पूरे पर्यवेक्षण में जांच करने के लिए एक वरिष्ठ राजपत्रित पुलिस अधिकारी को नियुक्त करेंगे. यह अधिकारी पहले किसी भी स्तर पर इस मामले की जांच से जुड़ा नहीं रहा होना चाहिए.” इस आदेश की एक कॉपी दिप्रिंट के पास है.

24 अगस्त को, NHRC की ओर से पंजाब सरकार को नोटिस जारी किए जाने के दो दिन बाद, रेप के आरोपी चहल ने मामले में सुरक्षा की मांग करते हुए पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट का रुख किया.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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