नई दिल्ली: अमेरिका के नागरिक मैथ्यू वैनडाइक, जो म्यांमार स्थित जातीय सशस्त्र समूहों को ट्रेनिंग देने के लिए म्यांमार जाने के आरोप में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) द्वारा गिरफ्तार किए गए सात विदेशी नागरिकों में शामिल हैं, ने दिल्ली की एक विशेष अदालत में जमानत के लिए अर्जी दी है. NIA द्वारा उसके और छह यूक्रेनी नागरिकों के खिलाफ इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट के तहत चार्जशीट दाखिल किए जाने के एक हफ्ते बाद यह अर्जी दी गई है. एजेंसी ने इस मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) नहीं लगाया है.
वैनडाइक ने अपनी हिरासत 180 दिनों से ज्यादा होने और उस पर UAPA, 1967 की धाराएं नहीं लगाए जाने का हवाला देते हुए अदालत से राहत मांगी है.
अदालत ने जमानत अर्जी पर NIA से जवाब मांगा है.
सातों आरोपियों में वैनडाइक, हुर्बा पेट्रो, स्लिवियाक तारास, इवान सुखमानोव्स्की, स्टेफनकिव मारियन, होन्चारुक मैक्सिम और कामिंस्की विक्टर शामिल हैं. NIA ने इस साल की शुरुआत में इन्हें अलग-अलग जगहों से गिरफ्तार किया था. NIA ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश पर इस मामले की जांच शुरू की थी. हालांकि, एजेंसी द्वारा पिछले हफ्ते दाखिल की गई पहली चार्जशीट में इनमें से किसी पर भी UAPA के तहत आरोप नहीं लगाए गए.
इसके बजाय, उन पर इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 की धारा 21 और 23 के तहत आरोप लगाए गए हैं. ये दोनों अपराध फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर के स्तर पर समझौते के जरिए खत्म किए जा सकते हैं. ये धाराएं अवैध तरीके से भारत में प्रवेश करने और वीजा नियमों के उल्लंघन से जुड़ी हैं.
गिरफ्तारी के बाद से सभी सात आरोपी दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं.
म्यांमार जाने और ट्रेनिंग देने का आरोप
NIA ने अपनी चार्जशीट में आरोप लगाया है कि सातों लोग पिछले साल दिसंबर में वैध दस्तावेजों के साथ भारत आए थे. इसके बाद वे जरूरी संरक्षित क्षेत्र परमिट (पीएपी) या प्रतिबंधित क्षेत्र परमिट (आरएपी) लिए बिना गुवाहाटी और मिजोरम के रास्ते म्यांमार चले गए. इमिग्रेशन नियमों के तहत इन परमिट को लेना जरूरी था.
एजेंसी के मुताबिक, वे आखिरकार विक्टोरिया कैंप पहुंचे. पिछले कुछ सालों से यह कैंप म्यांमार में विद्रोही सेना के सैन्य मुख्यालय के तौर पर काम कर रहा है. NIA ने आरोप लगाया कि इस समूह ने वहां जातीय सशस्त्र समूहों के लिए पहले से तय ट्रेनिंग आयोजित की. इसमें ड्रोन वॉरफेयर, ड्रोन ऑपरेशन, ड्रोन असेंबली और जैमिंग टेक्नोलॉजी की ट्रेनिंग शामिल थी. इसके बाद वे मार्च के पहले हफ्ते में भारत लौट आए. हालांकि, भारत से बाहर जाने वाली फ्लाइट पकड़ने से पहले उन्हें अलग-अलग एयरपोर्ट पर रोक लिया गया.
एजेंसी ने कहा है कि उनकी ट्रेनिंग और भारत के खिलाफ काम करने वाले जातीय सशस्त्र समूहों से जुड़े मामले की जांच अभी जारी है. अगर आतंकवाद से जुड़े आरोप लगाने के लिए पर्याप्त सबूत मिलते हैं, तो इन अपराधों को लेकर सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की जाएगी.
एजेंसी ने अपनी चार्जशीट में कहा है, “UA(P) Act, 1967 के तहत किए गए अपराधों को लेकर आगे की जांच का एक बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है. आगे की जांच जारी है और UA(P)A के तहत अपराधों के बारे में सही और पूरी जानकारी पता करने और उसकी पुष्टि करने के लिए और समय की जरूरत है. भारत के रास्ते बड़ी संख्या में ड्रोन और उनके सामान लाए जाने और बड़ी संख्या में डिजिटल डिवाइस जब्त किए जाने के कारण ऐसा किया जा रहा है. इन डिजिटल डिवाइस की जांच अभी चल रही है.” अदालत इस चार्जशीट पर 1 अक्टूबर को विचार करेगी.
वैनडाइक के वकीलों ने NIA पर सवाल उठाए
अदालत में वैनडाइक की ओर से वकील रोहित दांद्रियाल और रोहित गौर पेश हुए. उन्होंने NIA की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि गिरफ्तारी के समय एजेंसी ने जो आरोप लगाए थे, वे रिमांड और चार्जशीट में लगाए गए आरोपों से अलग हैं. वकीलों ने कहा कि इससे एजेंसी के तरीके पर सवाल उठता है.
इससे पहले NIA के सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया था कि अब तक की जांच में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है, जिससे यह आरोप साबित हो कि इन लोगों ने भारत के खिलाफ काम करने वाले जातीय सशस्त्र समूहों को ट्रेनिंग दी थी. अधिकारियों ने कहा था कि इसी वजह से उन पर UAPA के तहत आरोप नहीं लगाए गए.
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