Friday, 27 May, 2022
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बेटे विजयेंद्र ने कहा-येदियुरप्पा BJP के बिना कुछ नहीं, BJP भी येदियुरप्पा के बिना नहीं चल सकती है

कर्नाटक भाजपा के उपाध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र का कहना है कि येदियुरप्पा और भाजपा दोनों एक-दूसरे के पूरक है, मुख्यमंत्री अपना कार्यकाल और उन वादों को पूरा करेंगे जो उन्होंने लोगों से किए हैं.

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बेंगलुरु: कर्नाटक भाजपा के उपाध्यक्ष और मुख्यमंत्री बी.एस. येदियुरप्पा (बीएसवाई) के पुत्र बी.वाई विजयेंद्र ने दिप्रिंट को दिए एक खास इंटरव्यू में काफी भावुक होकर कहा, ‘येदियुरप्पा भाजपा के बिना कुछ नहीं हैं, ठीक वैसे ही जैसे भाजपा भी येदियुरप्पा के बिना नहीं चल सकती है.’ उनका पूरी दृढ़ता के साथ मानना है कि उनके पिता मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बने रहेंगे और उनके निष्कासन की अफवाहों में ‘रत्ती भर भी’ सच्चाई नहीं है.

एक साल से अधिक समय से कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें लगाई जा रही हैं. भाजपा के वरिष्ठ विधायक बासनगौड़ा पाटिल यतनाल ने भी दावा किया है कि जहां तक उन्हें जानकारी है, येदियुरप्पा को इसी साल मई तक पद छोड़ने के लिए कह दिया जाएगा.

विजयेंद्र ने कहा, ‘ऐसे लोग हैं जो महसूस करते हैं कि यदि वे येदियुरप्पा पर हमला करते हैं, तो परोक्ष रूप से भाजपा की छवि को नुकसान पहुंचा रहे होंगे. येदियुरप्पा और भाजपा एक-दूसरे के पूरक हैं और अब तक उन्हें या पार्टी को बदनाम करने की हर कोशिश नाकाम रही है. मुझसे लिखाकर ले लीजिए, येदियुरप्पा जी अपना पूरा कार्यकाल पूरा करेंगे और उन्होंने लोगों से जो वादे किए थे, उन्हें पूरा करेंगे.’

राज्य भाजपा उपाध्यक्ष इस समय पिछले एक पखवाड़े से उत्तरी कर्नाटक में डेरा डाले हुए, जहां दो विधानसभा सीटों—बासवकल्याण और मस्की—और बेलगावी लोकसभा सीट के लिए 17 अप्रैल को उपचुनाव होने हैं. दोनों सीटें कांग्रेस का गढ़ हैं.

मस्की सीट पूर्व कांग्रेस विधायक प्रतापगौड़ा पाटिल के इस्तीफा देने और भाजपा में शामिल हो जाने के कारण 2018 से खाली पड़ी है और बासवकल्याण सीट सितंबर 2020 में कांग्रेस विधायक नारायण राव के निधन के बाद रिक्त हो गई थी. राज्य भाजपा इकाई ने यहां के लिए अपनी रणनीति बनाई है. दोनों जगह स्थानीय भाजपा नेताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच मतभेद पार्टी की संभावनाओं को धूमिल कर रहे थे. इन मतभेदों को दूर करने के लिए विजयेंद्र सड़कों पर उतरे और पार्टी के लिए हर दिन 12 से 14 घंटे प्रचार कर रहे हैं.

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उन्हें पूरा विश्वास है कि भाजपा मस्की और बासवकल्याण दोनों उपचुनाव जीतेगी.


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ईश्वरप्पा के साथ टकराव पर

मस्की से फोन पर बात करते हुए विजयेंद्र ने कहा, ‘यह उसी तरह है जैसे अगर आप येदियुरप्पा पर पत्थर फेंकते हैं तो इसका मतलब आप भाजपा को पत्थर मार रहे हैं.’

राज्य में नेतृत्व बदलने संबंधी यतनाल की टिप्पणियों पर एक सवाल के जवाब में विजयेंद्र ने कहा कि न तो राज्य इकाई और न ही केंद्र के पार्टी नेताओं ने येदियुरप्पा से पद छोड़ने को कहा है.

उन्होंने कहा, ‘हर किसी की अपनी राय होती है. भाजपा में अंतिम निर्णय हाईकमान ही लेता है और सभी को एकजुट रहना चाहिए और इसका पालन करना चाहिए. हालांकि, हमें हर तरह की राय सुनने को तैयार रहना चाहिए, लेकिन साथ ही यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पार्टी नेता हमें जो बताएं, उसका पालन हो.

हाल ही में के.एस. ईश्वरप्पा और येदियुरप्पा के बीच हुए टकराव के बारे में विजयेंद्र ने कहा कि इस मुद्दे को चर्चा के जरिये हल किया जा सकता था. राज्य के ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री ईश्वरप्पा ने मुख्यमंत्री पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया था.

उन्होंने कहा, ‘इससे बचा जा सकता था. बातचीत की मेज पर बैठकर इस मुद्दे को सुलझाया जा सकता था. दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ. शर्मिंदगी की स्थिति आने से बचा जा सकता था. दोनों ही पार्टी के कद्दावर नेता हैं और इन्होंने साथ मिलकर ही भाजपा को खड़ा किया है.

ईश्वरप्पा और येदियुरप्पा के बीच संबंध कई दशकों से ही तनावपूर्ण बने रहे हैं. ईश्वरप्पा 2009 के लोकसभा चुनाव में शिवमोगा सीट से येदियुरप्पा के बड़े बेटे बी.वाई राघवेंद्र को भाजपा प्रत्याशी बनाए जाने सहित तमाम मुद्दों पर पहले भी मुख्यमंत्री से असहमति जताते रहे है. हालांकि, 31 मार्च को ईश्वरप्पा की तरफ से कर्नाटक के राज्यपाल वजुभाई वाला को सौंपा गया पत्र, जिसमें येदियुरप्पा पर दखलंदाजी करने और तानाशाही पूर्ण रुख अपनाने का आरोप लगाया गया था, भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को असहज करने वाला रहा है.

तमाम लोगों ने एक राज्य मंत्री की तरफ से इस तरह राज्यपाल से मुख्यमंत्री के खिलाफ शिकायत किए जाने को अभूतपूर्व बताया. यद्यपि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने सार्वजनिक रूप से यह पत्र लिखे जाने की आलोचना की लेकिन पार्टी के भीतर ऐसी आवाजें भी उठीं कि ‘येदियुरप्पा की ज्यादतियों को उजागर किए जाने’ की जरूरत है.

साथ ही ऐसी अटकलें भी लगाई गईं कि ईश्वरप्पा ऐसा कोई पत्र केंद्रीय नेतृत्व की तरफ से कोई संकेत मिले बिना नहीं लिख सकते थे.

पिता पर भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर क्या बोले

येदियुरप्पा अपने खिलाफ भ्रष्टाचार के दो मामले दर्ज होने को लेकर भी मुसीबत में घिरे हैं.

इस साल मार्च में कर्नाटक हाई कोर्ट ने 2019 में जनता दल-एस के विधायक नागनगौड़ा कांडकुर के बेटे शरणगौड़ा को भाजपा में आने के लिए कथित तौर पर धन और मंत्री पद की पेशकश किए जाने के मामले में मुख्यमंत्री के खिलाफ दर्ज एक आपराधिक मामले में स्थगनादेश रद्द कर दिया था. यह आरोप साबित करने के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने शरणगौड़ा की मौजूदगी में एक ऑडियो टेप जारी किया था.

उसी महीने में राज्य हाई कोर्ट ने येदियुरप्पा के खिलाफ एक और पुराने मामले को भी खोलने का आदेश दिया, जो 2008 और 2012 के बीच भूमि को डिनोटिफाई करने में कथित भ्रष्टाचार से जुड़ा है, जब भाजपा सत्ता में थी.

येदियुरप्पा ने जनवरी में सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में गिरफ्तारी पर स्थगन आदेश हासिल कर लिया था. मुख्यमंत्री ने यह सवाल भी उठाया था कि क्या ‘अदालत पूर्व अनुमति के बिना एक लोक सेवक के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत कार्यवाही आगे बढ़ा सकती है कि जबकि उन पर जिस कार्यालय के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है, वह कथित तौर पर इसके दायरे से बाहर है.’

विजयेंद्र को लगता है कि उनके पिता के खिलाफ दर्ज हर मामला चाहे वो रिश्वतखोरी से जुड़ा हो या फिर भ्रष्टाचार और अवैध खनन से, ‘राजनीति प्रेरित’ रहा है, और अगर बतौर मुख्यमंत्री उनके द्वारा लिए गए हर फैसले को एक आपराधिक केस बना दिया जाएगा तो राजनेता तो 500 मामले लड़ते रहेंगे.

उन्होंने कहा, ‘वह अब तक 30 केस से बाहर आ चुके हैं. यदि हर प्रशासनिक आदेश को एक आपराधिक केस के तौर पर चुनौती दी जाती रहेगी तो वह तो 500 या इससे भी ज्यादा केस लड़ रहे होंगे. अगर हर फैसले पर सवाल उठाया जाने लगेगा तो हर सीएम कोर्ट में केस लड़ता ही नजर आएगा. येदियुरप्पाजी के खिलाफ एजेंडा छेड़ने वालों ने 2011 में उन्हें हटा दिया था. उन्होंने भाजपा को कमजोर करने की कोशिश की. इस समय भी ठीक उसी तरह की रणनीति अपनाई जा रही है. लेकिन यह किसी काम नहीं आएगी.’

इस पर कि जवाब देते हुए कि क्या उनके पिता राजनीतिक तौर पर थक चुके हैं—मुख्यमंत्री फरवरी में 79 वर्ष के हो गए हैं—विजयेंद्र ने जोर देकर कहा कि उनके पिता बतौर राजनेता अभी कई और साल काम करने में सक्षम हैं और कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने रहने के लिए उनके पास पूरा धैर्य, दृढ़ संकल्प, क्षमता और समर्थन है.


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खुद अपने राजनीतिक भविष्य पर

कर्नाटक भाजपा उपाध्यक्ष ने खुद को एक समर्पित कार्यकर्ता बताया, जो अपने पिता की तरह ही पार्टी को आगे बढ़ाना चाहता है.

उन्होंने कहा, ‘जब मेरे पिता ने कर्नाटक में भाजपा के साथ शुरुआत की थी तो उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि वह एक बार नहीं बल्कि चार बार राज्य के मुख्यमंत्री बनेंगे. मैं भी पार्टी को मजबूत करने और इसे और अधिक ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए काम करना चाहता हूं.’

भाजपा बासवकल्याण-मस्की क्षेत्र में लिंगायत समुदाय की एक शाखा पंचमशाली के आंदोलन जैसे मुद्दों से जूझ रही है. इस समुदाय की मांग है कि येदियुरप्पा उन्हें ओबीसी का दर्जा देने का अपना वादा पूरा करें.

अभी तक ऐसा करने में नाकाम रहने से यहां कुछ हद तक भाजपा का उपचुनाव अभियान प्रभावित हो रहा है.

हालांकि, विजयेंद्र को जीत का पूरा भरोसा है.

विजयेंद्र ने कहा, ‘पंचमशाली आंदोलन उपचुनावों को प्रभावित नहीं करेगा. मस्की और अन्य स्थानों पर पूरे लिंगायत और ओबीसी समुदाय भाजपा के साथ हैं.’

इन सीटों पर न केवल पार्टी बल्कि विजयेंद्र का भी काफी कुछ दांव पर लगा है, जो कि भाजपा में काफी तेजी से सफलता की सीढ़ियां चढ़ते जा रहे हैं और केंद्रीय नेतृत्व का ध्यान आकर्षित करने में सफल रहे हैं. दिसंबर 2019 के उपचुनावों में मैसूर क्षेत्र की केआर पेट सीट जनता दल-सेक्युलर (जेडी-एस) से छीन लेने को उनके राजनीतिक करियर में एक मील का पत्थर माना जा रहा है.

बहरहाल, विजयेंद्र ने जोर देकर कहा कि वह व्यक्तिगत सफलता के बारे में नहीं सोच रहे हैं.

उन्होंने दिप्रिंट से कहा, ‘मुझे इसकी कोई परवाह नहीं है कि मुझे विधायक या सांसद बनने का टिकट मिलता है या नहीं. मैं बस अपने पिता की तरह ही काम करना चाहता हूं.’

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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