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Friday, 26 June, 2026
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राम मंदिर दान चोरी मामला: चंपत राय पर लगे आरोपों की भी जांच होगी—VHP प्रमुख आलोक कुमार

'दिप्रिंट' को दिए एक इंटरव्यू में आलोक कुमार ने कहा, 'किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा. पुलिस जिसे भी दोषी पाएगी, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.'

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नई दिल्ली: विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और किसी को बचाने की कोशिश नहीं की जाएगी. उन्होंने शुक्रवार को दिप्रिंट को दिए इंटरव्यू में कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव और VHP के उपाध्यक्ष चंपत राय के खिलाफ लगे आरोपों की भी पुलिस जांच करेगी.

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट भारत सरकार द्वारा बनाया गया एक स्वायत्त निकाय है, जो अयोध्या में राम मंदिर का प्रबंधन करता है.

उन्होंने कहा, “मैं फिर दोहराता हूं कि पुलिस के पास किसी भी व्यक्ति के खिलाफ लगे आरोपों की जांच करने का अधिकार भी है और जिम्मेदारी भी. और क्योंकि आपने खास तौर पर चंपत राय जी का नाम लिया है, इसलिए मैं कहूंगा कि पुलिस चंपत जी के खिलाफ लगे आरोपों की भी जांच करेगी, अनिल मिश्रा के खिलाफ भी करेगी, गोपाल जी के खिलाफ भी करेगी. किसी को भी नहीं छोड़ा जाएगा. कानून की नजर में सभी बराबर हैं. किसी भी व्यक्ति को बचाने की कोई कोशिश नहीं होगी.”

दान चोरी का कथित मामला 7 जून को सामने आया था. इसके बाद मामला काफी चर्चा में आया और उत्तर प्रदेश सरकार ने जांच के लिए तीन सदस्यीय SIT बनाई. SIT को 15 दिन में अपनी रिपोर्ट देने की जिम्मेदारी दी गई थी. इस मामले में गुरुवार को FIR दर्ज की गई.

आलोक कुमार ने कहा कि राम मंदिर पर फैसला आने और ट्रस्ट बनने के बाद VHP ने ट्रस्ट को आधिकारिक तौर पर पत्र लिखकर धन जुटाने में मदद की पेशकश की थी.

उन्होंने कहा, “हमने 40 दिन का अभियान चलाकर चंदा इकट्ठा किया. मुझे साल याद नहीं है. ट्रस्ट बनने के कुछ समय बाद की बात है. यह एक बड़े स्तर का अभियान था. हम 12.5 करोड़ घरों तक पहुंचे. अगर हर घर में औसतन पांच लोग मानें, तो हमने 65 करोड़ लोगों से 3,300 करोड़ रुपये का दान इकट्ठा किया और उसे मंदिर बनाने वाले ट्रस्ट को सौंप दिया. उस पूरे संग्रह का ऑडिट हुआ और सभी खातों की जांच की गई. आज तक इस पर कोई आरोप नहीं लगा कि उस चंदे में कोई गड़बड़ी हुई.”

उन्होंने कहा, “हमने अपने कार्यकर्ताओं से कहा था कि एक रुपया भी नकद नहीं लेना है. सारा पैसा चेक के जरिए लिया गया. ऐसी व्यवस्था थी कि हर शाम हमें पूरे दिन में जमा हुए पैसे की जानकारी मिल जाती थी और वह बैंक में जमा हो जाता था. आज भी उस सिस्टम के जरिए हर लेनदेन की पहचान की जा सकती है. उस समय जो पैसा इकट्ठा हुआ, उसकी पूरी जवाबदेही है. अभियान के दौरान जमा किए गए हर एक रुपये का हिसाब मौजूद है.”

उन्होंने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट को भी इसी तरह की व्यवस्था अपनानी चाहिए.

उन्होंने कहा, “पैसा इकट्ठा करने, उसकी गिनती करने और बैंक में जमा करने के लिए पूरी तरह सुरक्षित और भरोसेमंद व्यवस्था होनी चाहिए.”

जब उनसे पूछा गया कि चंपत राय की वरिष्ठ जिम्मेदारी और उनके ड्राइवर का नाम सामने आने के कारण क्या उनकी भी कोई भूमिका या लापरवाही हो सकती है, तो उन्होंने कहा, “संभव है. लेकिन मैं जांच नहीं कर रहा हूं. पुलिस जांच कर रही है. पुलिस को जांच करने दीजिए. जो भी दोषी मिले, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, चाहे वह किसी भी पद पर हो. मैं इस बात पर जोर देता हूं. हां, पुलिस जिसे दोषी पाए, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.”

‘फास्ट ट्रैक जांच की जरूरत’

आलोक कुमार ने कहा कि अयोध्या राम मंदिर के दान में कथित गड़बड़ी की खबर से हिंदुओं की भावनाएं आहत हुई हैं. उन्होंने कहा कि इस मामले की फास्ट ट्रैक जांच होनी चाहिए और राम मंदिर के रोजमर्रा के कामकाज को संभालने के लिए एक पेशेवर मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया जाना चाहिए.

जब उनसे पूछा गया कि SIT की सिफारिश पर उत्तर प्रदेश पुलिस की FIR में सिर्फ जूनियर कर्मचारियों के नाम आने की धारणा बन रही है, तो उन्होंने कहा कि SIT ने अपने पास मौजूद सबूतों के आधार पर कुछ लोगों के नाम दिए हैं और वही FIR में शामिल हैं.

उन्होंने कहा, “लेकिन उन आठ नामों के बाद लिखा है, ‘और अन्य अज्ञात व्यक्ति’. मेरी समझ में यह FIR पुलिस को सिर्फ इन आठ लोगों तक सीमित नहीं करती. पुलिस को पूरे अपराध की पूरी और व्यापक जांच करनी होगी.”

उन्होंने कहा कि ट्रस्ट में किसी भी व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जांच होगी, चाहे उसका पद कुछ भी हो.

उन्होंने कहा, “पुलिस की जिम्मेदारी है कि ट्रस्ट में किसी भी व्यक्ति के खिलाफ लगे सभी आरोपों की पूरी जांच करे.”

‘अखिलेश FIR क्यों नहीं दर्ज कराते?’

VHP प्रमुख ने कहा कि जिसके पास किसी अपराध की जानकारी है, वह FIR दर्ज करा सकता है.

उन्होंने कहा, “अखिलेश यादव कहते हैं कि उनके पास सबूत हैं. तो फिर अखिलेश यादव FIR क्यों नहीं दर्ज कराते? और मैं फिर दोहराता हूं कि ट्रस्ट की ओर से दर्ज FIR पुलिस को सिर्फ इन आठ लोगों से पूछताछ तक सीमित नहीं करती. पुलिस की जिम्मेदारी है कि पूरे मामले और वरिष्ठ लोगों तक के खिलाफ लगे सभी आरोपों की जांच करे.”

आलोक कुमार ने कहा कि ट्रस्ट को बेहतर और ज्यादा प्रभावी तरीके से काम करना चाहिए था. उन्होंने धन के गबन की घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताया.

उन्होंने कहा, “मैं मानता हूं कि इससे हिंदुओं की भावनाएं आहत हुई हैं. और अगर यह काफी समय से चल रहा था, तो मामला और भी गंभीर है. मैं अभी मामले के तथ्यों पर टिप्पणी नहीं करूंगा. मैं सिर्फ इतना कहूंगा कि हम चाहते हैं कि पुलिस पूरे मामले की जांच करे और जिन लोगों ने कानून तोड़ा है, उन्हें चार्जशीट में शामिल करे.”

उन्होंने यह भी कहा कि ट्रस्ट को एक CEO नियुक्त करने पर विचार करना चाहिए. ऐसा वरिष्ठ व्यक्ति, जिसे इस तरह के बड़े संस्थानों को चलाने का अनुभव हो.

उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि हर काम के लिए तय प्रक्रिया होनी चाहिए और उसका पालन होना चाहिए. मेरा मानना है कि आधुनिक उपकरण, तकनीक और सिस्टम लगाए जाने चाहिए ताकि रामजी के फंड का एक रुपया भी कहीं और नहीं जा सके.”

उन्होंने कहा कि CEO की नियुक्ति ट्रस्ट को करनी चाहिए, सरकार को नहीं.

‘हिंदू बहुत आहत हैं’

आलोक कुमार ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं कि हिंदू श्रद्धालु इस मामले से दुखी हैं और उन्होंने इस घटना पर अफसोस जताया.

उन्होंने कहा, “हां, हम सब दुखी हैं. हमें इस पर अफसोस है. लेकिन यह भरोसा फिर से लौट सकता है, अगर ईमानदारी से जांच हो, पूरी मेहनत से जांच हो, तय समय में जांच पूरी हो, चार्जशीट फास्ट ट्रैक कोर्ट में दाखिल हो, रोज सुनवाई हो और जल्द फैसला आए.”

उन्होंने कहा, “मैं चाहता हूं कि चार से पांच महीने के भीतर सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद दोषी लोग जेल पहुंचें और उन्हें सजा मिले.”

उन्होंने कहा, “लोगों का भरोसा वापस लाने का यही एक तरीका है. दूसरा, जैसा मैंने कहा, पूरी तरह सुरक्षित व्यवस्था बनाई जानी चाहिए. अगर ये दोनों काम हो जाएं, तो इस घटना के बावजूद लोगों का भरोसा फिर से बहाल हो सकता है.”

दान में मिले सोने और चांदी के गहनों के गायब होने की आशंका को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि ट्रस्ट ने मिले हुए सभी उपहार सार्वजनिक तौर पर दिखाए थे और मीडिया को भी उन्हें देखने के लिए बुलाया था.

उन्होंने कहा, “यह ऐसा समय है जब कोई भी कुछ भी आरोप लगा सकता है. लेकिन वे कलश, वे मुकुट, सब वहीं मौजूद हैं.”

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले विपक्ष इस मामले को लेकर बीजेपी सरकार पर लगातार सवाल उठा रहा है.

लेकिन आलोक कुमार ने कहा कि इस मुद्दे का राजनीतिक इस्तेमाल भी किया जा रहा है.

उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और कुछ अन्य दल इसे 2027 के विधानसभा चुनाव के अभियान की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं.”

‘लोगों की आस्था बरकरार है’

उन्होंने कहा, “मैंने एक अजीब बयान देखा. क्योंकि केजरीवाल जी को आज राम मंदिर जाना था, इसलिए कल FIR दर्ज हुई. इन दोनों बातों का क्या संबंध है? और जिन लोगों पर खुद चार्जशीट है, वही हमें ईमानदारी का पाठ पढ़ा रहे हैं. यह 2027 के चुनाव का अभियान है, जिसमें बढ़ा-चढ़ाकर बातें कही जा रही हैं, गालियां दी जा रही हैं, बिना सबूत के आरोप लगाए जा रहे हैं और गैर-जिम्मेदाराना बयान दिए जा रहे हैं. हो सकता है कि जांच पूरी होने के बाद, जिन लोगों ने बिना किसी सबूत के गंभीर आरोप लगाए हैं, उनके खिलाफ भी आगे क्या कार्रवाई की जाए, इस पर विचार किया जाए.”

विवाद के बावजूद आलोक कुमार ने कहा कि लोगों की आस्था पूरी तरह कायम है और अगर भविष्य में मथुरा या काशी के लिए भी इसी तरह दान अभियान चलाया गया तो इस विवाद का उस पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

उन्होंने कहा, “मुझे ऐसा नहीं लगता कि लोग दान नहीं देंगे. लोगों का भगवान राम के प्रति विश्वास कायम है. लोगों का कृष्ण जन्मभूमि के प्रति विश्वास कायम है. आम हिंदुओं का काशी विश्वनाथ के प्रति विश्वास भी कायम है. इसलिए मुझे नहीं लगता कि इस घटना का उस पर असर पड़ेगा. और आज इसकी चिंता करने की जरूरत भी नहीं है. भगवान कृष्ण के जन्मस्थान पर मंदिर निर्माण और वहां शिव मंदिर के निर्माण के लिए धन की कोई कमी नहीं होगी.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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