हैदराबाद: पिछले कई हफ़्तों से, आंध्र प्रदेश के IT, इलेक्ट्रॉनिक्स और HRD मंत्री नारा लोकेश एक सोची-समझी जनसंपर्क मुहिम में लगे हुए हैं. वह अपने मंगलागिरी (उंडवल्ली) स्थित आवास पर सत्ताधारी नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) के विधायकों, सांसदों और MLCs से मुलाक़ात कर रहे हैं.
इस मुहिम में मुख्य रूप से चुने हुए प्रतिनिधियों और उनके परिवार के सदस्यों के लिए शानदार डिनर पार्टियों का आयोजन किया जा रहा है. इसमें शामिल हुए कुछ लोगों ने दिप्रिंट को बताया कि इसका मकसद लोकेश की राजनीतिक साख बढ़ाना और लोगों से बेहतर तालमेल बनाना है.
लोकेश की इन कोशिशों से गठबंधन के कुछ सदस्य असहज भी महसूस कर रहे हैं. उन्होंने इस मुहिम को “हद से ज़्यादा” बताया है, जिससे पूरे राज्य के राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं.
हालांकि, लोकेश की अपनी पार्टी TDP (तेलुगु देशम पार्टी) के भीतर इस पर ज़्यादातर बधाई भरे ही रिएक्शन आए हैं. बस कुछ लोग दबी ज़बान में इस मुहिम के नतीजों को लेकर कुछ फुसफुसाहटें कर रहे हैं.
2024 के विधानसभा चुनावों के बाद सरकार बने लगभग दो साल हो चुके हैं. TDP के जो चुने हुए सदस्य लोकेश की इस मुहिम का समर्थन करते हैं, उनका मानना है कि यह “जड़ें जमाने और रिश्ते बनाने” की एक ऐसी कोशिश है, जो सिर्फ़ मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू का बेटा होने की वजह से की गई कोशिश से कहीं ज़्यादा बढ़कर है.
विशाखापत्तनम के पार्टी के एक वरिष्ठ सदस्य ने दिप्रिंट को बताया, “यह CBN के नाम से अलग अपनी पहचान बनाने की एक सोची-समझी कोशिश है. इसका मकसद लोकेश जिस भी चीज़ का प्रतिनिधित्व करते हैं, उस पर ‘मंगलागिरी की छाप’ छोड़ना है.”
TDP, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जन सेना पार्टी (JSP) के कार्यक्रमों में शामिल हुए लोगों का कहना है कि मेहमानों को अपने हाथों से डिनर की प्लेटें देने से लेकर, कई सालों से साथ काम कर रहे साथियों के कंधे पर हाथ रखकर बातचीत शुरू करने तक—हर उम्र के लोगों के साथ लोकेश का प्यार भरा और विनम्र व्यवहार सबसे अलग नज़र आता है. TDP और JSP के गठबंधन ने, BJP के साथ मिलकर, 2024 के आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनावों में जगन की YSR कांग्रेस पार्टी के ख़िलाफ़ ज़बरदस्त जीत हासिल की थी.

कार्यक्रम में शामिल हुए लोगों ने बताया कि हर विधानसभा क्षेत्र से आए विधायकों की पत्नियों और महिला विधायकों को मशहूर ‘मंगलागिरी साड़ियां’ भेंट की गईं. इसके अलावा, जोड़ों को मंगलागिरी के देवता लक्ष्मी नरसिम्हा स्वामी और उनकी पत्नी देवी लक्ष्मी की प्रतिमाएं भी उपहार में दी गईं. राजनीतिक जानकारों ने, जिन्होंने नायडू और उनके बेटे लोकेश के काम करने के तरीकों को समझने में काफी मेहनत की है, बताया कि सीएम का लोगों के साथ काम करने का तरीका बहुत अच्छा और दोस्ताना है, लेकिन आम जनता के साथ उनका कोई निजी जुड़ाव नहीं है.
“हर कोई एक संसाधन है. नायडू ने श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी में एक छात्र नेता से लेकर TDP में एक जानी-मानी हस्ती बनने तक का सफर तय किया है; इसलिए वे हर व्यक्ति को उसकी काबिलियत से पहचानते हैं. और लोग नायडू का सम्मान करते हैं क्योंकि वे एक राजनेता और प्रशासक के तौर पर बहुत ही माहिर हैं. इस नज़रिए से देखें तो, पिता और बेटे के बीच का मुख्य अंतर उनका निजी जुड़ाव ही होगा,” श्री कृष्णदेवराय यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान के पूर्व प्रोफेसर चंद्रशेखर रेड्डी ने दिप्रिंट को बताया.
‘हर कदम सोच-समझकर उठाया गया है’
लोकेश 2017 में MLC चुने गए थे और उसी साल, जब नायडू पहली बार सीएम थे, उन्हें कैबिनेट मंत्री भी बनाया गया था. हालाँकि, उन्होंने अपना पहला चुनाव 2024 में मंगलागिरी से जीता. यह एक मंदिरों वाला शहर है और कपड़ों का भी एक बड़ा केंद्र है. उन्होंने YSRCP की मुरुगुडु लावण्या को 91,413 वोटों के बड़े अंतर से हराया. इस चुनाव क्षेत्र में TDP की जीत का यह अंतर पिछले 39 सालों में सबसे ज़्यादा था.
TDP के जिन अंदरूनी सूत्रों से दिप्रिंट ने बात की, उन्होंने माना कि लोकेश की ईमानदारी देखकर वे हैरान भी हुए और उन्हें खुशी भी हुई. “अगर कोई सचमुच ‘चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुआ’ था, तो वह लोकेश ही थे. 1983 में, जब उनका जन्म हुआ, तब (TDP के संस्थापक) एनटी रामाराव पहले से ही मुख्यमंत्री थे; इसलिए पद का विशेषाधिकार तो उन्हें जन्म से ही मिला हुआ था,” हैदराबाद के एक TDP नेता ने कहा, जो लोकेश को उनके बचपन से जानते हैं.


2019 में लोकेश की हार के बाद, उनकी आलोचना होने लगी थी और यहां तक कि उनके समर्थकों ने भी उन्हें खुद को बेहतर बनाने के लिए सोच-समझकर काम करने की सलाह दी थी. माना जाता है कि 2019 के राज्य चुनावों में TDP की हार और खुद लोकेश की करारी हार ने उन्हें अपनी गलतियों पर सोचने और सुधार करने के लिए प्रेरित किया.
आंध्र प्रदेश के एक BJP विधायक ने दिप्रिंट को बताया, “अपनी बातचीत वाली तेलुगू सुधारने के लिए ट्यूटर रखने से लेकर वज़न कम करने के लिए सख़्त डाइट प्लान अपनाने तक, उनका हर कदम सोच-समझकर उठाया गया है. असल में, जब मैंने उनसे वज़न कम करना रोकने को कहा, तो उन्होंने जवाब दिया कि अपना लक्ष्य पाने के लिए उन्हें अभी दो किलो वज़न और कम करना है.”
लोकेश का यह बदलाव 2023 से ही चल रहा है. जनवरी 2023 में ‘युवा गालम पदयात्रा’ के बाद—जिसमें उन्होंने 400 दिनों तक पैदल यात्रा की और लोगों के बीच रहे—उन्हें यह एहसास हुआ कि सिर्फ़ चुनाव के समय लोगों के सामने आना काफ़ी नहीं है.
TDP के एक वरिष्ठ नेता, जो 1992 से पार्टी के साथ जुड़े हैं, ने कहा, “भले ही इससे शर्मनाक हार से बचा जा सकता है, लेकिन लोगों के साथ एक भावनात्मक जुड़ाव होना भी ज़रूरी है.”
लोकेश की विशाखापट्टनम यात्राएं इस बात का समर्थन करती लगती हैं जो विश्लेषक और उनकी पार्टी के लोग कहते हैं. वह अपनी यात्रा के दौरान हर दिन एक घंटा उन लोगों से याचिकाएँ लेने में बिताने के लिए जाने जाते हैं, जो रोज़मर्रा की समस्याओं का समाधान चाहते हैं.
HRD मंत्री के तौर पर, विशाखापट्टनम, भीमली और चंद्रपालेम में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) का दौरा करना, पार्टी द्वारा तय किए गए औपचारिक कार्यक्रम का हिस्सा नहीं होता. इसके बजाय, वह अधिकारियों या पार्टी के लोगों के साथ जाए बिना, खुद ही क्लासरूम में चले जाते हैं.
लोकेश का आत्मविश्वास राज्य में राजनीतिक नियुक्तियों के चुनाव में भी दिखाई देता है. एमवी प्रणव गोपाल की विशाखापट्टनम मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी के चेयरमैन के तौर पर नियुक्ति इसका एक उदाहरण है, और भी कई अन्य नियुक्तियां हैं.
एनुगाला पेड्डी रेड्डी, जो 1980 के दशक में NTR के समय से ही TDP के साथ जुड़े हुए हैं, ने एक नेता के तौर पर लोकेश के विकास की पुष्टि की.

“पहले, वह सिर्फ़ गणित में अच्छे थे. अब, मैं उन्हें पार्टी की कमान संभालते हुए, दिल्ली में संपर्क बनाते हुए, और राज्य में लोगों के बीच घूमते हुए देखता हूं. लेकिन उन्हें और ज़्यादा मेहनत करने की ज़रूरत है और जगन (YSRCP के संस्थापक और पूर्व CM) की तरह एक स्वतंत्र व्यक्तित्व बनने की ज़रूरत है. हालांकि, उनका PR का तरीका अच्छा है,” उन्होंने कहा.
एक और तारीफ़ एक अप्रत्याशित जगह से आई. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सीएम वाईएस राजशेखर रेड्डी के करीबी केवीपी रामचंद्र राव ने आंध्र प्रदेश में ज़मीन से जुड़े उनके मसले सुलझाने के लिए लोकेश की बहुत तारीफ़ की. असल में, केवीपी ने सोशल मीडिया पर भी उनके काम की तारीफ़ की.
कुछ आशंकाएं
जहां प्रकाश रेड्डी (BJP) जैसे नेताओं का मानना है कि 2029 में जब सरकार की परीक्षा होगी, तो लोकेश के लोगों तक पहुँचने के प्रयासों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाएगा, वहीं कुछ अन्य लोगों को कुछ आशंकाएं हैं.
“अगर लोगों का भरोसा जीतना ही इसका राजनीतिक मकसद है, तो यह कोशिश कामयाब रही है. लेकिन अगर बात CM की कुर्सी पर बैठने की है, तो अभी काफ़ी लंबा सफ़र तय करना बाकी है,” नेल्लोर के एक टीडीपी नेता ने दिप्रिंट को बताया. JSP और BJP के आंध्र प्रदेश के नेताओं ने माना कि वे लोकेश की हर चाल पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं.
NDA गठबंधन का हिस्सा होने के नाते, उन्हें डर है कि उन्हें लोकेश के अधीन काम करना पड़ सकता है. वे मानते हैं कि 2029 में सत्ता में वापसी के लिए TDP का ज़मीनी समर्थन बहुत ज़रूरी है, लेकिन वे नायडू के बेटे की उतनी ही आलोचना भी करते हैं.
यह देखते हुए कि मंडल और ज़िला स्तर की राजनीति और चुनावों में लड़ने या उन्हें व्यवस्थित करने का उनका कोई असली अनुभव नहीं है, वे उन्हें एक “वाइल्ड कार्ड एंट्री” कहते हैं, जो खुशकिस्मत है कि उसे अपने पिता के साथ काम सीखने का मौका मिला. असल में, उनमें से कुछ तो जगन और लोकेश दोनों को ही “बाहरी” तक कह देते हैं. दोनों ही मुख्यमंत्रियों के बेटे हैं, हैदराबाद में पैदा हुए और पले-बढ़े हैं. कहा जाता है कि जब उनकी पार्टियाँ सत्ता में नहीं होतीं, तो वे बेंगलुरु और हैदराबाद में अपनी शहरी-आधुनिक ज़िंदगी में लौट जाते हैं.
लोकेश अपने गठबंधन के साथियों के बारे में अपनी टिप्पणियों में काफ़ी सतर्क रहे हैं, उनके समर्थकों ने कहा.
“वह समझते हैं कि BJP का समर्थन ज़रूरी है. वह (JSP प्रमुख) पवन कल्याण के करिश्मे और ज़मीनी ताक़त को बेमन से ही सही, पर स्वीकार करते हैं. लेकिन वह जानते हैं कि TDP के लिए वह ही ‘TINA’ (उनके अलावा कोई और विकल्प नहीं) फ़ैक्टर हैं.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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