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Tuesday, 30 June, 2026
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मोदी के ‘नितिन नवीन मेरे बॉस हैं’ वाले बयान पर पूछे गए सवाल पर BJP अध्यक्ष ने PM की तुलना सचिन से की

हैदराबाद में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नवीन ने यह भी कहा कि दूसरे देशों के Gen Z आंदोलनों की नकल कर युवाओं को भड़काने की कोशिश करने वालों को समझना चाहिए कि भारतीय युवा व्यवस्था-विरोधी नहीं हैं.

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना क्रिकेट के दिग्गज खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर से करते हुए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार को कहा कि मोदी का यह कहना कि नवीन उनके “बॉस” हैं, दरअसल पार्टी की टीम भावना और वर्क कल्चर को दिखाता है.

तेलंगाना में आयोजित विकसित भारत स्टूडेंट कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए नवीन ने कहा, “हम एक टीम की तरह काम करते हैं. जब मोदी जी ने ऐसा कहा था, तब वह बीजेपी की भावना और संस्कृति को व्यक्त कर रहे थे. उनका संदेश था कि एक प्रधानमंत्री भी बतौर कार्यकर्ता पार्टी संगठन और उसके अध्यक्ष के मार्गदर्शन में काम करते हैं. यही हमारी व्यवस्था की ताकत है.”

इस साल जनवरी में मोदी ने कहा था कि पार्टी के मामले में नितिन नवीन ही “बॉस” हैं. उन्होंने यह टिप्पणी तब की थी जब 45-वर्षीय बिहार के नेता ने जे.पी. नड्डा की जगह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभाला था.

नवीन से प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनके कामकाजी संबंध और खास तौर पर “बॉस” वाली टिप्पणी को लेकर सवाल पूछा गया.

उन्होंने जवाब दिया, “यह क्रिकेट की तरह है. सचिन तेंदुलकर एक महान खिलाड़ी थे, लेकिन फिर भी उन्होंने अलग-अलग कप्तानों के नेतृत्व में पूरे अनुशासन और टीम भावना के साथ खेला. उसी तरह बीजेपी में हर व्यक्ति, चाहे वह कितना भी वरिष्ठ क्यों न हो, संगठन के प्रति प्रतिबद्धता, अनुशासन और सम्मान के साथ काम करता है.”

बीजेपी अध्यक्ष ने आगे कहा कि जब भारत ने क्रिकेट विश्व कप जीता, तब टीम में कई अच्छे खिलाड़ी थे, लेकिन कप्तान वह होता है जो पूरी टीम को एकजुट रखता है.

उन्होंने कहा, “हमने सचिन तेंदुलकर को भी देखा है और उनकी कप्तानी भी देखी है. मेरा मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी का साफ संदेश था कि पार्टी अध्यक्ष वह नेता होता है जो सभी को साथ जोड़कर रखता है और मेरा मानना है कि मोदी जी ने टीम स्पिरिट का मतलब समझाया कि देश का प्रधानमंत्री भी पार्टी अध्यक्ष के साथ एक टीम सदस्य के रूप में काम कर सकता है. उन्होंने इस सोच को स्पष्ट किया.”

नवीन ने आगे कहा, “यानी अगर सचिन तेंदुलकर भी…जब भारत ने विश्व कप जीता, तब सौरव गांगुली और महेंद्र सिंह धोनी का शानदार नेतृत्व था और वही नेतृत्व टीम भावना का उदाहरण था. मोदी जी ने सभी लोगों को साफ संदेश दिया कि कप्तान दिशा देता है और उसके पास नेतृत्व की शक्ति होती है. टीम में चाहे कितने भी खिलाड़ी हों, सभी को एक दिशा में आगे बढ़ना होता है, तभी टीम सफल होती है.”

हैदराबाद के घाटकेसर स्थित विज्ञाना भारती इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में आयोजित विकसित भारत स्टूडेंट कॉन्क्लेव में तेलंगाना BJP अध्यक्ष एन. रामचंदर राव, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार, सांसद अरुणा डी.के., सांसद रेखा शर्मा और राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल भी मौजूद थे.

‘Gen Z को गुमराह करने की कोशिश करने वालों को समझना होगा…’

बीजेपी अध्यक्ष ने आगे कहा कि कोई यह नहीं पूछ रहा कि Gen Z वास्तव में क्या चाहता है. उन्होंने दावा किया कि कुछ विपक्षी ताकतें दूसरे देशों के तथाकथित Gen Z आंदोलनों की नकल कर युवाओं को भड़काना चाहती हैं.

उन्होंने कहा कि भारतीय युवा व्यवस्था-विरोधी नहीं हैं.

राज्य इकाई द्वारा जारी बयान के अनुसार, नवीन ने कहा, “लेकिन भारतीय युवा व्यवस्था-विरोधी नहीं हैं. भारतीय युवा अराजकता में विश्वास नहीं करते. वे राष्ट्र निर्माण में विश्वास रखते हैं. Gen Z ‘टुकड़े-टुकड़े’ सोच नहीं है. असली Gen Z यहां बैठे युवा भारतीय हैं, जो भारत की प्रगति, नवाचार और भविष्य में योगदान दे रहे हैं.”

उन्होंने आगे कहा कि सरकारें आती-जाती रहती हैं, “लेकिन बड़ा सवाल यह है कि देश को किस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए. जो लोग युवाओं को गुमराह और भड़काने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें समझना चाहिए कि भारतीय युवा कभी भी विदेशी ताकतों या नकारात्मक एजेंडे को भारत का भविष्य तय नहीं करने देंगे.”

कश्मीर का उदाहरण देते हुए नवीन ने कहा कि पहले कश्मीर के युवाओं की छवि पत्थरबाजी से जुड़ी हुई थी, लेकिन अब यह बदल चुकी है.

उन्होंने कहा, “लेकिन मोदी युग में कश्मीर के युवा शिक्षा, खेल और राष्ट्रीय सेवा में आगे बढ़ रहे हैं. आज कश्मीर के युवा क्रिकेट मैदान में जीत हासिल कर रहे हैं, रणजी में खेल रहे हैं और देश का नाम रोशन कर रहे हैं. यही असली Gen Z है — पत्थरबाज नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माता.”

इससे पहले नवीन ने कहा था कि अगर Gen Z की ऊर्जा को रचनात्मक दिशा दी जाए तो उसमें अपार संभावनाएं हैं. उन्होंने यह बात इसी महीने नेपाल की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के अध्यक्ष रबि लामिछाने के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान कही थी.

जून में उत्तराखंड दौरे के दौरान भी नवीन ने कहा था कि कुछ लोग Gen-Z को व्यवस्था-विरोधी या नकारात्मक शब्दों में परिभाषित करने की कोशिश करते हैं, लेकिन भारत जैसे विशाल देश में ऐसी नकारात्मक सोच का कोई स्थायी प्रभाव नहीं पड़ेगा.

उन्होंने कहा, “भारत के युवा नकारात्मक दिशा में नहीं जाएंगे, क्योंकि वे जानते हैं कि क्या सही है और क्या गलत.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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