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Monday, 18 May, 2026
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नए और प्रमोट किए गए मंत्रियों को नहीं मिले बड़े विभाग, योगी ने UP प्रशासन पर अपनी पकड़ बनाए रखी

ताज़ा फेरबदल में दोनों डिप्टी सीएम के हाथ कुछ नहीं लगा. योगी ने गृह और PWD जैसे अहम विभाग अपने पास रखकर अगले साल के चुनाव से पहले अपनी पकड़ और मजबूत कर ली.

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी सरकार ने रविवार देर रात नए मंत्रियों के विभागों का बंटवारा कर दिया. विभागों के इस बंटवारे से साफ हो गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासन पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी है. उन्होंने कई अहम विभाग अपने पास ही रखे, जिन पर उनके दोनों डिप्टी सीएम, केशल प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक की नज़र थी.

10 मई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छह नए मंत्रियों को शपथ दिलाई थी. इनमें दो कैबिनेट मंत्री और चार राज्य मंत्री शामिल थे. इसके अलावा दो मौजूदा राज्य मंत्रियों को स्वतंत्र प्रभार दिया गया. बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और समाजवादी पार्टी के बागी नेता मनोज पाण्डेय को कैबिनेट मंत्री बनाया गया. वहीं अजीत पाल सिंह और सोमेंद्र तोमर को स्वतंत्र प्रभार के साथ राज्य मंत्री बनाया गया.

चार नए राज्य मंत्रियों में कृष्णा पासवान, सुरेंद्र दिलेर, हंसराज विश्वकर्मा और कैलाश राजपूत शामिल हैं.

माना जा रहा है कि यह मंत्रिमंडल फेरबदल बीजेपी की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके जरिए पार्टी अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधना चाहती है.

बीजेपी के अंदर करीब एक हफ्ते तक इस बात को लेकर चर्चा और अटकलें चलती रहीं कि डिप्टी सीएम के विभागों में बदलाव हो सकता है.

सूत्रों के मुताबिक दोनों नेता अपने मौजूदा विभागों से खुश नहीं थे और उन्होंने कई बार अधिकारियों के कामकाज को लेकर मुख्यमंत्री से नाराज़गी जताई थी. बताया जा रहा है कि हाल के महीनों में उन्होंने यह मुद्दा पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के सामने भी उठाया था.

फिलहाल योगी आदित्यनाथ सीधे तौर पर 25 से ज्यादा विभाग संभाल रहे हैं. इनमें गृह, लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), कानून, सूचना और राजस्व जैसे अहम मंत्रालय शामिल हैं.

2024 में जीतिन प्रसाद के पीलीभीत से लोकसभा सांसद चुने जाने के बाद भी योगी ने उनके विभाग किसी और को नहीं दिए और अपने पास ही रखे.

बीजेपी सूत्रों के अनुसार, दोनों डिप्टी सीएम और भूपेंद्र चौधरी खासतौर पर पीडब्ल्यूडी जैसे अहम विभाग चाहते थे, लेकिन मुख्यमंत्री ने इन्हें अपने पास ही रखा.

विभागों के बंटवारे को अंतिम रूप देने से पहले योगी आदित्यनाथ ने नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन से भी मुलाकात की.

मुख्यमंत्री कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में कई मंत्रियों ने बयानबाजी और रणनीतिक तरीके से खबरें लीक कर दबाव बनाने की कोशिश की थी, लेकिन अंतिम विभाग बंटवारे से साफ हो गया कि राज्य सरकार में मुख्यमंत्री की पकड़ अब भी मजबूत है.

जब उनसे पूछा गया कि मुख्यमंत्री ने अहम विभाग अपने पास क्यों रखे, तो उन्होंने कहा, “अहम चुनावों से पहले कोई खुद को कमजोर क्यों दिखाना चाहेगा? यूपी में गृह विभाग के बाद पीडब्ल्यूडी को दूसरा सबसे ताकतवर मंत्रालय माना जाता है और मुख्यमंत्री अब भी दोनों विभाग खुद संभाल रहे हैं.”

नए कैबिनेट मंत्रियों में भूपेंद्र चौधरी को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (MSME) विभाग दिया गया है, जबकि मनोज पांडेय को खाद्य एवं रसद विभाग सौंपा गया है.

स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री अजीत पाल सिंह को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग मिला है. वहीं सोमेंद्र तोमर को सैनिक कल्याण, प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) और राजनीतिक पेंशन विभाग दिया गया है.

चार नए राज्य मंत्रियों में कृष्णा पासवान को पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग, सुरेंद्र दिलेर को राजस्व विभाग, हंसराज विश्वकर्मा को MSME विभाग और कैलाश राजपूत को ऊर्जा एवं अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत विभाग से जोड़ा गया है.

बीजेपी के प्रदेश पदाधिकारियों का कहना है कि कई दिनों की चर्चाओं, अंदरूनी खींचतान और दबाव की राजनीति के बावजूद किसी भी मंत्री को बड़ा “हेवीवेट” विभाग नहीं मिला.

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि अंतिम विभाग बंटवारा पूरी तरह मुख्यमंत्री की पसंद के मुताबिक, हुआ और पार्टी नेतृत्व की सहमति के बाद ही एक हफ्ते की देरी से विभाग तय किए गए.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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