नई दिल्ली: NEET-UG, CUET और UGC-NET परीक्षाओं के संचालन में अनियमितताओं और खामियों की ओर इशारा करते हुए अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP), जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की छात्र इकाई है, ने एक प्रस्ताव पास किया है. इसमें कहा गया कि ऐसी समस्याएं प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं. ABVP ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) का नाम लेकर कहा कि ये संस्थाएं छात्रों, अभिभावकों और आम जनता में नियामक ढांचे के प्रति अविश्वास पैदा कर रही हैं.
यह टिप्पणी ABVP की राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद की बैठक में पारित प्रस्ताव में की गई, जो 29 से 31 मई के बीच ओडिशा में हुई.
राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद ने सर्वसम्मति से ‘शैक्षिक सुधारों को सफल बनाने के लिए प्रभावी जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन आवश्यक है’ शीर्षक वाला प्रस्ताव अपनाया.
इसमें कहा गया कि शिक्षा प्रणाली को पारदर्शी, गुणवत्ता-उन्मुख और छात्र-केंद्रित बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुधार लागू किए गए हैं, लेकिन नेशनल असेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन काउंसिल (NAAC) और नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रेडिटेशन (NBA) जैसे नियामक और मान्यता देने वाले निकायों की कार्यप्रणाली भी जांच के दायरे में आई है.
NTA और शिक्षा मंत्रालय दोनों को NEET-UG 2026 परीक्षा में अनियमितताओं, पेपर लीक और अव्यवस्था को लेकर भारी सार्वजनिक आक्रोश का सामना करना पड़ा है. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने NEET और CBSE से जुड़ी विवादों को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि सरकार जिम्मेदारी स्वीकार करती है और खामियों को दोबारा न होने देने के लिए काम कर रही है.
ABVP के बयान में कहा गया, “नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को विभिन्न प्रवेश और भर्ती परीक्षाओं में बार-बार अनियमितताओं और खराब प्रबंधन के लिए गंभीर आलोचना का सामना करना पड़ा है. प्रतिष्ठित मानी जाने वाली NEET-UG परीक्षा पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं जैसे गंभीर विवादों से प्रभावित रही है, जिससे छात्रों में व्यापक अविश्वास पैदा हुआ है.”
इसमें आगे कहा गया कि CUET परीक्षा प्रणाली ने छात्रों के लिए व्यावहारिक कठिनाइयां पैदा की हैं, जिनमें अंतिम समय में परीक्षा केंद्रों में बदलाव, अलग-अलग विश्वविद्यालयों के लिए अलग आवेदन शुल्क, दाखिले की देरी, और एकीकृत प्रवेश प्रणाली को लागू करने में विफलता शामिल है.
ABVP ने कहा कि UGC/CSIR-NET परीक्षा भी अनियमितताओं से प्रभावित रही है. इन समस्याओं का कारण प्रशासनिक खामियां, अपर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था, खराब बुनियादी ढांचा और संस्थागत जवाबदेही की कमी है, जिससे परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठते हैं.
ABVP ने 13 मई को नई दिल्ली में NTA मुख्यालय के बाहर सहित देशभर में प्रदर्शन भी किए.
बयान में कहा गया कि मूल्यांकन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता की कमी, रैंकिंग और मान्यता डेटा में संस्थागत हेरफेर के आरोप, भ्रष्टाचार की घटनाएं और मूल्यांकन में देरी ने उच्च शिक्षा की गुणवत्ता आश्वासन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. इससे छात्रों, अभिभावकों और आम जनता में अविश्वास बढ़ रहा है.
इसमें यह भी कहा गया कि नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 में फॉर ईयर अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम (FYUGP), एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC), मल्टीपल एंट्री मल्टीपल एग्जिट (MEME), एकेडमिक फ्लेक्सिबिलिटी और मल्टीडिसिप्लिनरी एजुकेशन जैसे सुधारों की कल्पना की गई थी. लेकिन संस्थागत तैयारी की कमी, अपर्याप्त शैक्षणिक योजना, कमजोर डिजिटल ढांचा और स्पष्ट कार्यान्वयन दिशानिर्देशों की अनुपस्थिति ने छात्रों और शिक्षकों के बीच भ्रम पैदा किया है.
क्रेडिट ट्रांसफर, डिग्री समानता, शैक्षणिक निरंतरता और रोजगार से जुड़ी चिंताओं ने भी कार्यान्वयन प्रक्रिया को जटिल बना दिया है. कई संस्थानों में ये सुधार बिना पर्याप्त जागरूकता, शिक्षक प्रशिक्षण और प्रशासनिक समन्वय के लागू किए गए, जिससे उनका प्रभाव कम हो गया है.
बयान में कहा गया कि शैक्षणिक संस्थानों में प्रबंधन की खामियों ने निर्णय प्रक्रिया, प्रशासनिक जवाबदेही और समग्र शैक्षणिक माहौल को प्रभावित किया है.
इसमें यह भी कहा गया कि NEP 2020 के तहत प्रस्तावित पाठ्यक्रम सुधार कई संस्थानों में आवश्यक संरचनात्मक बदलावों के बिना लागू किए गए हैं, जिससे उनकी शिक्षा गुणवत्ता पर अपेक्षित प्रभाव नहीं पड़ा.
इसके अलावा कहा गया, “कई विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में फीस वृद्धि ने आम जनता में NEP 2020 को लेकर भ्रम और चिंता पैदा की है. भर्ती प्रक्रियाओं में देरी ने योग्य युवाओं और शिक्षकों का मनोबल भी गिराया है.”
ABVP की राष्ट्रीय कार्यकारी परिषद ने केंद्र और राज्य सरकारों से आग्रह किया कि शिक्षा समवर्ती सूची में होने के कारण दोनों की समान जिम्मेदारी है कि वे शैक्षिक सुधारों को प्रभावी ढंग से लागू करें.
इसमें कहा गया कि नीतिगत प्रतिबद्धता जरूरी है, लेकिन व्यावहारिक कार्यान्वयन की चुनौतियों को हल करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. यदि समय पर ये सुधार जमीन पर लागू नहीं होते, तो विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान जैसी भविष्य की पहलों का उद्देश्य प्रभावित होगा.
इसलिए परिषद ने केंद्र और राज्य सरकारों से आग्रह किया कि वे अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभाएं, पर्याप्त संसाधन सुनिश्चित करें और यह सुनिश्चित करें कि सुधारों का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे.
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