Wednesday, 5 October, 2022
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‘मोदी के पास बिहार के लिए कोई विजन नहीं’- अब चिराग पासवान क्यों हुए BJP के खिलाफ

एक बदली हुई रणनीति में चिराग ने नरेंद्र मोदी पर यह कहते हुए हमला किया कि प्रधानमंत्री के पास 'बिहार के लिए कोई विजन नहीं' है, जबकि उनके पास दो साल के लिए डबल इंजन सरकार की सुविधा हासिल थी.

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पटना: जमुई के सांसद चिराग पासवान, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के खेमे में हालिया ब्रेक-अप के बाद बिहार में एक बड़ी वापसी पर नजर गड़ाए हुए हैं. वहीं भारतीय जनता पार्टी के एक वर्ग का मानना है कि लोक जनशक्ति पार्टी के दो धड़ों का फिर से एकजुट हो जाना, लोकसभा और राज्य के चुनावों में फायदेमंद हो सकता है.

एक बदली हुई रणनीति में चिराग ने नरेंद्र मोदी पर यह कहते हुए हमला किया कि प्रधानमंत्री के पास ‘बिहार के लिए कोई विजन नहीं’ है, जबकि उनके पास दो साल के लिए डबल इंजन सरकार की सुविधा हासिल थी.

चिराग ने दिप्रिंट को बताया, ‘मोदी के पास बिहार के लिए कोई विजन नहीं है, जैसा कि बिहार में डबल इंजन सरकार के दो साल के कार्यकाल के दौरान हुआ. वे न केवल अपने एजेंडे को लागू करने में विफल रहे, बल्कि नीतीश के लिए कई समझौते भी किए. सीएम ने शर्तें तय कीं, लेकिन आखिरी समय में (भाजपा को) धोखा दे दिया.’

लोजपा (रामविलास) गुट के प्रमुख ने कहा कि उन्हें 2024 के लिए गठबंधन की रूपरेखा तैयार करने की कोई जल्दी नहीं है. उनके मुताबिक ‘चुनाव अभी दूर है और गठबंधन का निर्णय चुनाव के समय ही लिया जाएगा.’

लोकसभा चुनाव के लिए दो साल का समय है. चिराग ने बताया कि फिलहाल उनकी प्राथमिकता जमीन पर पार्टी के आधार को मजबूत करना है ताकि एक पुनर्जीवित लोजपा अपने वरिष्ठ सहयोगी भाजपा से ज्यादा सीटें मांग सके. उन्होंने इस बात से भी इनकार किया कि उनकी भाजपा में शामिल होने या पासवान का चेहरा बनने की कोई योजना है.

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उनके कट्टर विरोधी नीतीश कुमार के एनडीए खेमे से बाहर होने के बाद भाजपा को प्रमुख हिंदी भाषी राज्यों में से एक में नए सहयोगियों की तलाश करने की संभावना का सामना करना पड़ रहा है. एनडीए विभाजन का एक और स्पिन-ऑफ यह है कि भाजपा को चिराग और उनके संकटग्रस्त चाचा पशुपति कुमार पारस को एक साथ हाथ मिलाने के लिए मजबूर करना पड़ सकता है. पारस अपनी ही पार्टी में बगावत का सामना कर रहे हैं.


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एक नया पुनर्गठन

जनता दल (यूनाइटेड) के एक वरिष्ठ नेता ने दिप्रिंट से पुष्टि की कि लोजपा के तीन सांसद- कैसर अली, वीना सिंह और चंदन सिंह– पाला बदलने के लिए जद (यू) नेतृत्व के संपर्क में थे. अगर ये क्रॉसओवर होता है तो पारस के पास उनके और बेटे समेत सिर्फ दो ही सांसद रह जाएंगे.

पारस के कमजोर होने का मतलब चिराग के लिए वरदान मिलने जैसा है क्योंकि तब वह अपने समुदाय की सहानुभूति अर्जित करने के लिए अपने पिता रामविलास पासवान की विरासत पर भरोसा कर सकते हैं.

इसी तरह एक भाजपा नेता ने माना कि नए समीकरणों पर काम करने के लिए नेतृत्व वापस काम में जुट गया है. नेता ने कहा, ‘अगर हम बिहार को जीतना चाहते हैं तो बीजेपी को अपना गठबंधन बनाने के लिए छोटे दलों के एक समूह की जरूरत होगी ताकि 2024 और 2025 में एक दुर्जेय महागठबंधन से मजबूती के साथ लड़ा जा सके.’

कम से कम कागज पर तो महागठबंधन, मुस्लिम-यादव गठबंधन के राष्ट्रीय जनता दल के समर्थन आधार और अत्यंत पिछड़े वर्गों के बीच नीतीश की लोकप्रियता के साथ ठोस आधार पर खड़ा नजर आ रहा है.

सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया कि लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा चिराग और पारस को पासवान वोटों में किसी भी तरह के विभाजन को रोकने के लिए फिर से एकजुट होने के लिए मजबूर कर सकती है.

अपने नए अवसर को भांपते हुए, जहां उनकी सौदेबाजी की शक्ति बढ़ सकती है, चिराग ने दोहराया कि उन्हें राजनीतिक पुनर्गठन के लिए ‘कोई जल्दी नहीं’ है. उन्होंने दिप्रिंट को बताया, ‘मैं किसी गठबंधन में जाने की जल्दी में नहीं हूं…मैं जमीनी स्तर पर आधार का विस्तार करने के लिए काम करना जारी रखूंगा. मेरी प्राथमिकता चुनाव से पहले संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करना है. मैं सबसे पहले बिहार के लिए काम कर रहा हूं. जब समय आएगा, मार्गदर्शन के लिए अपने लोगों से सलाह लूंगा.’

यह पूछे जाने पर कि वह भाजपा में शामिल होने और पासवान चेहरा बनने पर विचार क्यों नहीं कर रहे हैं, चिराग ने कहा कि उनका बड़ा एजेंडा बिहार के लोगों की ओर से बोलना है.

उन्होंने दिप्रिंट को बताया, ‘मैं केवल एक ही जाति का नेता क्यों बनूं? मैं 13 करोड़ लोगों की बात कर रहा हूं. मुझे बिहार के लिए किसी भी गठबंधन के बारे में सोचने से पहले भाजपा के दृष्टिकोण को समझने की जरूरत है. हमने 2017 में भाजपा को सलाह दी थी कि नीतीश एक वफादार सहयोगी नहीं है और वह फिर से धोखा देगा, लेकिन भाजपा 2020 विधानसभा चुनाव के लिए नीतीश जी के साथ गठबंधन में आगे बढ़ी.’

भाजपा ने चिराग के उस अनुरोध को भी ठुकरा दिया था, जिसमें उन्होंने अपनी मां रीना पासवान को उनके पिता की मौत के बाद खाली हुई राज्य सभा सीट दिए जाने के लिए कहा था.

उन्होंने कहा, ‘मैंने बीजेपी को अपने एजेंडे को लागू करने और नीतीश को ज्यादा फायदा नहीं उठाने की सलाह दी. लेकिन उन्होंने नहीं सुनी. मुझे बीजेपी से शिकायत है. मौजूदा परिस्थिति में, जब तक मैं उनके बिहार के एजेंडे के बारे में विश्वास हासिल नहीं कर लेता, मैं किसी गठबंधन को लेकर उत्साहित नहीं हूं… जो भी मेरे ‘बिहार पहले, बिहारी पहले’ के एजेंडे को प्राथमिकता देगा, मैं उसके साथ जुड़ने पर विचार करूंगा’. उन्होंने यह भी कहा कि उनका ध्यान बिहार के गौरव को बहाल करने पर होगा.


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नीतीश पर चौतरफा हमला

चिराग नीतीश को नापसंद करते हैं. उनका आरोप है कि वह लोजपा में फूट डालने के लिए उनके चाचा पारस को उकसा रहे हैं.

उन्होंने दिप्रिंट को बताया, ‘पिछले आठ सालों में बिहार में क्या बदला है? 2015 में नीतीश ने बिहार के लिए सात निश्चय (प्रतिबद्धताओं) की घोषणा की थी. 2017, 2020 और 2022 में वादा दोहराया गया. मैं पूछ रहा हूं कि पिछले आठ सालों में क्या बदलाव हुए हैं? वह भारत के सबसे बड़े झूठे मुख्यमंत्री हैं…’

चिराग ने कहा, ‘मेरे छोटे भाई तेजस्वी यादव ने दावा किया थी वह फिर से नीतीश कुमार से हाथ नहीं मिलाने के लिए एक हलफनामे पर हस्ताक्षर करेंगे. लेकिन अब वह फिर से उपमुख्यमंत्री बन गए हैं.’

भाजपा अपनी ओर से जमुई सांसद को एक प्रस्ताव भेजने के संकेत दे रही है. एक अन्य भाजपा नेता ने कहा, ‘चूंकि नीतीश ने पाला बदल लिया है, इसलिए चिराग से सुरक्षित दूरी बनाए रखने के लिए हमारे पास कोई राजनीतिक बाध्यता नहीं है. बीजेपी को लोकसभा और विधानसभा चुनावों में पासवान वोटों के बंटवारे को रोकना होगा.’ वह आगे कहते हैं, ‘हम जानते हैं कि दोनों पक्षों में अहंकार की समस्या है. लेकिन भाजपा सही समय पर अपने प्रभाव का प्रयोग करेगी ताकि दोनों गुटों को एकजुट होकर लड़ने के लिए मजबूर किया जा सके.’

भाजपा नेता के मुताबिक, अगर तीन सांसद पारस की पार्टी छोड़ देते हैं, तो उनके लिए केंद्रीय मंत्री के अपने पद को बचाना भी मुश्किल हो जाएगा. वह आगे कहते हैं, ‘उस परिस्थिति में भाजपा को चिराग के साथ पैचअप करने के लिए कहने के लिए अपने प्रभाव का उपयोग करना होगा. यह बिहार के सभी हितधारकों के लिए अच्छा होगा.’

बिहार बीजेपी महासचिव संजीव चौरसिया ने भी माना कि लोजपा के दोनों धड़े एक हो जाएं तो बेहतर होगा. उन्होंने दिप्रिंट को बताया, ‘यह पार्टी के हित में होगा कि दोनों धड़े एकजुट होकर चुनाव लड़ें. उन्हें एकजुट करने का प्रयास जल्द से जल्द शुरू किया जाएगा, लेकिन फोन अमित शाह जी की तरफ से ही आएगा.’

(इस खबर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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