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Sunday, 16 June, 2024
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150 करोड़ के भूमि बकाए वाले 14 राजनीतिक दलों को राहत देगी मोदी सरकार, BJP पर सबसे अधिक बकाया

संभावना है कि कैबिनेट 2000 से 2017 के बीच दिल्ली में राजनीतिक दलों के लिए भूमि आवंटन की श्रेणी में बदलाव के प्रस्ताव को पास कर सकती है, जिसे संस्थागत से केंद्र सरकार- से- सरकार ट्रांसफर में बदलकर दरों को घटाया जा सकता है.

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नई दिल्ली: दिप्रिंट को पता चला है कि मोदी सरकार ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) समेत उन 14 राजनीतिक दलों को राहत देने के लिए एक प्रस्ताव तैयार किया है, जिनपर केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के कुल 150 करोड़ रुपए बकाया है, जिसने उन्हें दिल्ली में अपने दफ्तरों के लिए जमीन आवंटित की थी.

इन पार्टियों को, जिनमें बीजेपी, कांग्रेस, भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), तृणमूल कांग्रेस, जनता दल (युनाइटेड) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम आदि शामिल हैं, 2000 से 2017 के बीच सरकार द्वारा निर्धारित संस्थागत दरों पर जमीन आवंटित की गई थी, जो बाजार भाव से बहुत कम थीं.

बीजेपी पर, जिसे दीन दयाल उपाध्याय मार्ग पर 4 एकड़ से कुछ अधिक के तीन प्लॉट्स आवंटित किए गए थे, आवास मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले भूमि एवं विकास कार्यालय के सबसे अधिक 70 करोड़ रुपए बकाया हैं, जबकि कोटला मार्ग पर 2 एकड़ जमीन के प्लॉट के लिए कांग्रेस पर कुल बकाया राशि 20 करोड़ रुपए है.

मंत्रालय ने अब राजनीतिक दलों के लिए आवंटन श्रेणी को संशोधित करने का प्रस्ताव दिया है- जिसे संस्थागत से केंद्र सरकार-से-सरकार ट्रांसफर में बदल दिया जाएगा. सरकार-से-सरकार श्रेणी में भूमि की दरें संस्थागत दरों की अपेक्षा तीन-से चार गुना कम हैं, जो पर निर्भर करती है कि आवंटित की गई जगह किस क्षेत्र में है.

इन पार्टियों को 2000 के दशक से पहले की संस्थागत दरों पर जमीन आवंटित की गई थी (क्योंकि मंत्रालय 2000-2017 के बीच दरों को संशोधित नहीं कर सका), इस शर्त के साथ कि जब और जैसे जमीन की दरों में संशोधन होगा, राजनीतिक पार्टियों से उसी तिथि से (आवंटन के समय की जमीन की दरों तथा संशोधित दरों में) अंतर वसूला जाएगा.

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एक सरकारी सूत्र ने दिप्रिंट को बताया, ‘प्रस्ताव को एक बार कैबिनेट से मंजूरी मिल जाए, तो न सिर्फ इन 14 राजनीतिक पार्टियों की बकाया राशि कम हो जाएगी, बल्कि ये भी सुनिश्चित हो जाएगा कि भविष्य में राजनीतिक दलों को होने वाले सभी भूमि आवंटन, सरकार-से-सरकार श्रेणी के अंतर्गत किए जाएंगे, जिसकी दरें संस्थागत श्रेणी के मुकाबले कम हैं’.

प्रस्ताव को जल्द ही कैबिनेट से मंजूरी मिल जाने की संभावना है.

लेकिन, आवास तथा शहरी मामलों के मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने, जो अपना नाम नहीं बताना चाहते थे, प्रस्तावित संशोधनों पर ये कहते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि ये मामला कैबिनेट के विचाराधीन है.

दिप्रिंट ने फोन और ईमेल के जरिए बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता अनिल बलूनी, बीजेपी कोषाध्यक्ष राजेश अग्रवाल और बीजेपी राष्ट्रीय कार्यालय सचिव महेंद्र कुमार से संपर्क करने का प्रयास किया लेकिन इस खबर के प्रकाशित होने तक उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली थी. उनका जवाब मिलने पर खबर को अपडेट कर दिया जाएगा.

दिप्रिंट ने कांग्रेस के संचार प्रमुख जयराम रमेश से भी उनकी प्रतिक्रिया लेने के लिए संपर्क किया लेकिन इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने तक, उनकी ओर से भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली थी. उनका जवाब मिलने पर इस कॉपी को अपडेट कर दिया जाएगा.

इस बीच सीपीआई(एम) पोलितब्यूरो सदस्य नीलोत्पल बासु ने दिप्रिंट से कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है.

राजनीतिक दलों को संसद में उनकी संख्या के आधार पर दिल्ली में ज़मीन आवंटित की जाती है. 2006 में यूपीए सरकार द्वारा राजनीतिक दलों के लिए तैयार किए गए आवंटन नियमों के अनुसार, दोनों सदनों (लोकसभा तथा राज्यसभा) में 101 से 200 के बीच सदस्यों वाली पार्टी दो एकड़ की हकदार होती है. संसद में 200 से अधिक सदस्य होने पर, पार्टी को चार एकड़ जमीन मिल सकती है.


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राजनीतिक दलों की कुल बकाया राशि 150 करोड़ रुपए कैसे हो गई

सरकारी सूत्रों ने बताया कि दलों को अपने पार्टी कार्यालय बनाने के लिए, आवास मंत्रालय द्वारा 2000 से 2007 के बीच निर्धारित संस्थागत दरों पर, मुख्य रूप से मध्य दिल्ली में भूमि आवंटित की गई थी.

लेकिन सूत्रों ने आगे कहा कि आवास मंत्रालय, जिसे विभिन्न श्रेणियों के लिए हर दो साल पर ज़मीन की दरों को संशोधित करना होता है, बहुत से नौकरशाही कारणों के चलते 2000 से 2017 के बीच, करीब 17 साल तक ऐसा नहीं कर सका और इस अवधि के दौरान जिन 14 पार्टियों को जमीन आवंटित की गई, उन्हें वो 2000 से पहले की संस्थागत दरों पर मिल गई.

सूत्रों के अनुसार, आवास मंत्रालय (जिसे पहले शहरी विकास मंत्रालय कहा जाता था) ने आवंटन पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा था कि जब और जैसे भूमि की दरें संशोधित की जाएंगी, राजनीतिक पार्टियों से उसी तिथि से (आवंटन के समय की जमीन की दरों तथा संशोधित दरों में) अंतर वसूला जाएगा.

सूत्रों ने कहा, ‘आवंटन के लिए ये एक पूर्व शर्त थी. सभी 14 पार्टियों ने लिखकर अपनी सहमति दी थी कि जब और जैसे जमीन की दरों में संशोधन होगा, वो उसके अंतर की राशि का भुगतान करेंगे’.

काफी समय तक आगे-पीछे होने के बाद, जून 2017 में आख़िरकार आवास मंत्रालय ने भूमि की दरों में संशोधन का एक नोटिफिकेशन जारी किया, जो 2000 से प्रभावी होना था.

ऊपर जिक्र किए गए सूत्र ने कहा कि उसके बाद सभी पार्टियों को जिन्हें 2000 और 2017 के बीच जमीन आवंटित की गई थी, जमा हो गई बकाया राशि अदा करने के लिए मांग नोटिस जारी कर दिए गए.

सूत्र ने आगे कहा कि हालांकि आवंटित की गई जमीन के बाजार मूल्य के मुकाबले, वृद्धि करने के बाद भी संस्थागत दरें कहीं अधिक सस्ती थी, लेकिन राजनीतिक पार्टियां जमा हो गई बकाया राशि के भुगतान के लिए आगे नहीं आईं.

सूत्र ने कहा कि ‘ऐसा आवंटन के समय भुगतान के लिए सहमत होने के बावजूद था. पार्टियों का कहना था कि जमा हो चुकी बकाया राशि बहुत अधिक थी’.

दोनों सूत्रों ने आगे कहा कि ये 150 करोड़ रुपए की बकाया रकम अदा करने की राजनीतिक दलों की अनिच्छा ही थी, जिसने सरकार को आवंटन नियमों पर फिर से ग़ौर करने के लिए मजबूर किया.

सरकार में एक दूसरे सूत्र ने बताया, ‘कई दौर की बैठकों के बाद तय किया गया, कि राजनीतिक पार्टियों के साथ केंद्र सरकार जैसा ही सलूक किया जाना चाहिए, और संस्थागत दरों की बजाय उन्हें सरकार-से सरकार वाली दरों पर ज़मीन आवंटित की जानी चाहिए’.

दूसरे सूत्र ने आगे कहा कि संस्थागत श्रेणी में भूमि आवंटन की दरें, सरकार-से-सरकार श्रेणी की दरों के मुकाबले कम से कम 10 गुना अधिक हैं.

दूसरे सूत्र ने कहा, ‘मसलन, 2000 में अस्थायी आवंटन दर, जिस पर राजनीतिक पार्टियों को संस्थागत श्रेणी में जमीन आवंटित की गई थी, 88 लाख रुपए प्रति एकड़ थी. भूमि की दरों में संशोधन किए जाने के बाद, 2007 में संस्थागत आवंटन दर 698 लाख रुपए प्रति एकड़ हो गई, जबकि सरकार-से-सरकार श्रेणी में ये दर 74 लाख प्रति एकड़ थी’.

मध्य दिल्ली में, जहां राजनीतिक दलों को जमीन आवंटित की गई, वहां जमीन की बाजार दरें कहीं अधिक हैं. रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार, दीन दयाल उपाध्याय मार्ग जहां बीजेपी को अपना राष्ट्रीय मुख्यालय स्थापित करने के लिए, अगस्त 2014 में दो एकड़ जमीन (8095.80 वर्ग मीटर) का एक प्लॉट 1864 लाख रुपए प्रति एकड़ की संस्थागत दर पर आवंटित किया गया, वहां एक एकड़ जमीन की बाज़ार क़ीमत 200 करोड़ रुपए प्रति एकड़ से अधिक है.

2015 में बीजेपी को दो एकड़ का एक दूसरा प्लॉट आवंटित किया गया जो 2014 में पार्टी को आवंटित पहले प्लॉट से सटा हुआ था.

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अखिल भारतीय कांग्रेस समिति को, नवंबर 2007 में कोटला मार्ग पर 1.99 एकड़ (8093 ववर्ग मीटर) जमीन का एक प्लॉट, 2 करोड़ रुपए से भी कम में आवंटित किया गया. उस समय के दौरान जमीन का प्रचलित बाजार मूल्य 100 करोड़ रुपए से अधिक था.

इसी तरह, सीपीआई(एम) को मार्च और मई 2014 में, कोटला मार्ग और डीडीयू मार्ग पर, क्रमश: 0.45 एकड़ (1849 वर्ग मीटर) और 0.21 एकड़ (868 वर्ग मीटर) के दो अपेक्षाकृत छोटे प्लॉट आवंटित किए गए.

(इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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