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Saturday, 13 June, 2026
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पंजाब में BJP की नई सिख रणनीति के बीच मंत्री के ‘शहीद’ वाले बयान ने क्यों खड़ा किया विवाद

बीजेपी ने ऑपरेशन के दौरान मारे गए लोगों के लिए सिख धार्मिक संस्थाओं द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली शब्दावली का इस्तेमाल करने से परहेज किया है, खासकर इसलिए क्योंकि उसका इतिहास उग्रवाद के विरोध से ही बना है.

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चंडीगढ़: पिछले हफ्ते महाराष्ट्र के मंत्री गिरीश महाजन ने ऑपरेशन ब्लू स्टार में मारे गए लोगों को “शहीद” कहकर कई लोगों को चौंका दिया. इसे उग्रवाद के प्रति भारतीय जनता पार्टी की जीरो टॉलरेंस नीति से अलग रुख के रूप में देखा जा रहा है.

महाजन ने ये टिप्पणी 6 जून को अमृतसर के पास मेहता चौक में दमदमी टकसाल द्वारा आयोजित ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी के कार्यक्रम में की.

ऑपरेशन ब्लू स्टार को “काला दिन” बताते हुए महाजन ने जून 1984 में स्वर्ण मंदिर के अंदर सेना की कार्रवाई का आदेश देने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और कांग्रेस पार्टी को जिम्मेदार ठहराया. लेकिन इस कार्रवाई में मारे गए लोगों को “शहीद” कहने पर सबसे ज्यादा ध्यान गया.

महाजन ने सभा को संबोधित करते हुए कहा, “बहुत से पुरुष और महिलाएं मारे गए और शहीद हो गए. हम उस दिन को नहीं भूल सकते. वह दिन था जब हमारे पूजा स्थल पर हमला किया गया.”

उन्होंने कहा, “दिल्ली में भी बहुत से पुरुष, महिलाएं, भाई और बहनें मारे गए… ठीक वैसे ही जैसे (अफगान हमलावर) अहमद शाह अब्दाली ने भारत आने पर किया था.” वह इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए सिख विरोधी दंगों का जिक्र कर रहे थे.

300 साल पुराना सिख धार्मिक शिक्षण संस्थान दमदमी टकसाल कभी संत जरनैल सिंह भिंडरावाले के नेतृत्व में था, जिन्होंने 1979 से 1984 तक पंजाब में हिंसक उग्रवादी आंदोलन का नेतृत्व किया था. दमदमी टकसाल से निकलकर उन्होंने स्वर्ण मंदिर को अपनी गतिविधियों का केंद्र बना लिया था.

भिंडरावाले की मौत इंदिरा गांधी द्वारा शुरू कराए गए ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान स्वर्ण मंदिर परिसर में सेना की कार्रवाई में हुई थी. इस अभियान का उद्देश्य उन्हें और अन्य उग्रवादियों को बाहर निकालना था. सिख समुदाय ने इसे बेअदबी और अपने सबसे पवित्र धार्मिक स्थल को अपवित्र करने की घटना माना.

बीजेपी कई वर्षों से ऑपरेशन ब्लू स्टार और उसके बाद हुए सिख विरोधी दंगों के लिए कांग्रेस की आलोचना करती रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सैन्य कार्रवाई को अकाल तख्त पर हमला बता चुके हैं.

हालांकि, बीजेपी आमतौर पर ऑपरेशन में मारे गए लोगों के लिए सिख धार्मिक संस्थानों और पंथक संगठनों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली शब्दावली अपनाने से बचती रही है. इसकी वजह यह भी है कि पंजाब में उसकी अपनी राजनीतिक पहचान उग्रवाद के विरोध पर बनी है.

उग्रवाद के वर्षों में बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नेता और कार्यकर्ता भी निशाने पर थे. पंजाब में पार्टी की संगठनात्मक स्मृति उन वर्षों से गहराई से जुड़ी है, जब RSS स्वयंसेवक, BJP कार्यकर्ता, पत्रकार और हिंदू नेता मारे गए थे.

1989 का मोगा नरसंहार, जिसमें सुबह की एक बैठक के दौरान संघ के 21 स्वयंसेवक मारे गए थे, संगठन पर हुए सबसे घातक हमलों में से एक है. पंजाब केसरी के संस्थापक लाला जगत नारायण और बाद में उनके बेटे रमेश चंदर की हत्या, जो दोनों RSS से करीबी तौर पर जुड़े थे, भी इस संघर्ष के बड़े प्रतीक बन गए.

ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद एल.के. आडवाणी के नेतृत्व वाली बीजेपी ने इंदिरा गांधी के फैसले का समर्थन किया था. अपनी आत्मकथा ‘माय कंट्री, माय लाइफ’ में आडवाणी ने लिखा कि मई 1984 में उन्होंने सरकार द्वारा भिंडरावाले के सामने “लगभग आत्मसमर्पण” करने के खिलाफ बड़ा जन आंदोलन चलाया था. उन्होंने लिखा कि भिंडरावाले और उनकी निजी सेना ने स्वर्ण मंदिर को अपना संचालन मुख्यालय बना लिया था.

आडवाणी ने लिखा कि उन्होंने संसद में सरकार द्वारा अपनी जिम्मेदारी छोड़ने का मुद्दा उठाया था. उन्होंने कहा कि विपक्ष के दबाव के कारण ही इंदिरा गांधी ने स्वर्ण मंदिर को उसके “राष्ट्र विरोधी कब्जाधारियों” से मुक्त कराने के लिए सेना का इस्तेमाल किया.

महाजन ने जो कहा, उसके अलावा कार्यक्रम का स्थान भी खास महत्व रखता था. दमदमी टकसाल सिख युवाओं को सिख धर्म के सबसे शुद्ध रूप में धार्मिक शिक्षा और प्रशिक्षण देता है. इसमें धार्मिक ग्रंथों का सही पाठ, युद्ध कला और कथा-प्रवचन की परंपराएं शामिल हैं.

भिंडरावाले 1977 में इसके 14वें प्रमुख बने और टकसाल उग्रवाद का केंद्र बन गया. भिंडरावाले के अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर में जाने के बाद भी टकसाल उग्रवादियों की तैयार होने की जगह बना रहा. ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान भिंडरावाले के साथ मारे गए 219 लोगों में से ज्यादातर टकसाल के कार्यकर्ता थे.

तब से कई दशकों से टकसाल पंजाब में उग्रवाद के वर्षों में मारे गए उग्रवादियों की याद में हर साल ‘शहीदी समागम’ आयोजित करता रहा है.

दमदमी टकसाल आज भी पंजाब के प्रभावशाली सिख धार्मिक संस्थानों में से एक है और 1980 के दशक की घटनाओं पर होने वाली बहसों में इसकी केंद्रीय भूमिका बनी हुई है.

महाजन की यात्रा ने टकसाल प्रमुख बाबा हरनाम सिंह धुम्मा और बीजेपी नेतृत्व के कुछ वर्गों के बीच संबंधों पर भी नया ध्यान खींचा है. धुम्मा वर्षों से कई बीजेपी नेताओं के संपर्क में रहे हैं और कभी-कभी पार्टी नेताओं के साथ मंच भी साझा करते रहे हैं.

2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले सिख मतदाताओं से बीजेपी को वोट देने की उनकी अपील पर शिरोमणि अकाली दल और कट्टरपंथी सिख नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी. धुम्मा ने यह कहते हुए अपने बयान का बचाव किया कि महाराष्ट्र में बीजेपी ही एकमात्र पार्टी है जो सिखों से जुड़े मुद्दों को सक्रिय रूप से उठा रही है.

धुम्मा ने 2005 में टकसाल की कमान संभाली थी और उन्हें मध्यमार्गी शिरोमणि अकाली दल के करीब माना जाता है. कट्टरपंथी अक्सर इसी बात की आलोचना करते हैं.

ऑपरेशन ब्लू स्टार की सालाना बरसी में कई सिख धार्मिक और राजनीतिक नेता शामिल होते हैं, लेकिन बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं की भागीदारी अपेक्षाकृत कम रही है.

तत्कालीन RSS प्रमुख के.सी. सुदर्शन ने 2000-2001 में दमदमी टकसाल का दौरा किया था और भिंडरावाले के उत्तराधिकारी बाबा ठाकुर सिंह से मुलाकात की थी. यह मुलाकात बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ए.आर. कोहली और रुलदा सिंह ने कराई थी. रुलदा सिंह पंजाब में संघ के सहयोगी संगठन राष्ट्रीय सिख संगत के भी प्रमुख थे. इस यात्रा को कट्टरपंथी सिखों और RSS के बीच कड़वाहट खत्म करने की कोशिश के रूप में देखा गया था.

लेकिन RSS और कट्टरपंथी सिखों के बीच टकराव लगभग लगातार जारी रहा. 2009 में रुलदा सिंह की कथित तौर पर बब्बर खालसा इंटरनेशनल के उग्रवादियों ने हत्या कर दी. 2016 में पंजाब में संघ के दूसरे सबसे बड़े पदाधिकारी ब्रिगेडियर जगदीश गगनेजा (सेवानिवृत्त) की जालंधर में गोली मारकर हत्या कर दी गई. अगले साल लुधियाना में RSS नेता रविंदर गोसाईं की हत्या कर दी गई.

राजनीतिक विश्लेषक महाजन की यात्रा को स्पष्ट राजनीतिक उद्देश्य वाला कदम मानते हैं. इसे शिरोमणि अकाली दल के साथ तीन दशक पुराने गठबंधन टूटने के बाद पंजाब में बीजेपी की राजनीतिक पकड़ बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होने के बावजूद पंजाब में बीजेपी अभी भी अपेक्षाकृत छोटी चुनावी ताकत है. उसे न केवल कांग्रेस और सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी से, बल्कि बंटे हुए अकाली दल से भी चुनौती मिल रही है.

चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज के राजनीति विज्ञान विभाग की प्रोफेसर कंवलप्रीत कौर ने कहा, “दमदमी टकसाल के करीब जाना निश्चित रूप से बीजेपी की रणनीतिक चाल है, क्योंकि वह अगले साल की शुरुआत में होने वाले चुनावों से पहले पंजाब में अपनी मौजूदगी मजबूत करना चाहती है.” उन्होंने कहा कि यह रणनीति पंजाब के लिए उसकी बहुआयामी योजना में अच्छी तरह फिट बैठती है.

उन्होंने कहा, “बीजेपी ने अन्य पार्टियों के सिख नेताओं को शामिल किया है, देश के इतिहास और संस्कृति में सिखों के योगदान को प्रमुखता दी है, सिख विरासत से जुड़े कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया है और 1984 की घटनाओं को लेकर बार-बार कांग्रेस को निशाना बनाया है. महाजन की यात्रा इसी व्यापक संपर्क अभियान का हिस्सा लगती है.”

“लेकिन उनका बयान बीजेपी की उग्रवाद विरोधी राष्ट्रवादी छवि के साथ मेल नहीं खाता. बीजेपी का रुख सिर्फ ऑपरेशन ब्लू स्टार और सिख विरोधी दंगों को लेकर सिखों की पीड़ा को स्वीकार करने तक सीमित रहा है, जबकि वह लगातार उग्रवाद और अलगाववादी राजनीति को खारिज करती रही है.”

पंजाब में मजबूत मौजूदगी बनाने के लिए पार्टी को अपने पारंपरिक शहरी हिंदू समर्थन आधार से आगे बढ़ना होगा. अकाली दल के साथ गठबंधन खत्म होने से वह ऐसे सहयोगी से वंचित हो गई, जो परंपरागत रूप से सिख वोटों के बड़े हिस्से को जुटाता था.

किसान आंदोलन ने भी उसकी स्थिति को और जटिल बना दिया, खासकर ग्रामीण पंजाब में, जहां कुछ इलाकों में पार्टी के खिलाफ नाराजगी अब भी बनी हुई है. सिखों के बीच अपना स्वतंत्र समर्थन आधार बनाने की कोशिश में बीजेपी अब उन मुद्दों पर बात करने लगी है, जिन्हें परंपरागत रूप से सिख धार्मिक और पंथक संगठनों से जोड़ा जाता रहा है.

महाजन की यात्रा इसी दिशा में पार्टी का ताजा कदम है, जिसके जरिए वह सिख धार्मिक संस्थानों के साथ सीधे जुड़ने की कोशिश कर रही है. पिछले कई वर्षों से बीजेपी लगातार ऑपरेशन ब्लू स्टार और इंदिरा गांधी की हत्या के बाद हुए सिख विरोधी दंगों को लेकर कांग्रेस पर हमला करती रही है.

अगस्त 2023 में संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑपरेशन ब्लू स्टार को “अकाल तख्त पर हमला” कहा था, जो सिखों की सर्वोच्च लौकिक संस्था है. उन्होंने कहा, “क्या अपने ही देश में नागरिकों पर वायुसेना से हमला कराना सही है? उस समय कौन शासन कर रहा था—इंदिरा गांधी. अकाल तख्त पर हमला किया गया. यह आज भी हमारी याद में ताजा है. उन्होंने मिजोरम में यह आदत विकसित की थी. और इसलिए वे मेरे अपने देश में अकाल तख्त पर हमला करने तक पहुंच गए और अब हमें उपदेश दे रहे हैं.” वह 1966 में आइजोल पर हुए वायुसेना के हमले का जिक्र कर रहे थे.

दरअसल, पंजाब में पार्टी की राजनीतिक कहानी सिर्फ कांग्रेस के विरोध से नहीं, बल्कि उग्रवाद के विरोध से भी बनी है. उग्रवाद के बाद अकाली दल जैसे अपेक्षाकृत नरम, धर्मनिरपेक्ष पंथक दल के साथ उसका गठबंधन राज्य में सांप्रदायिक शांति लाने की कोशिश माना गया था.

इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में भिंडरावाले की विरासत से जुड़े संस्थानों के साथ बीजेपी की बढ़ती नजदीकी को एक बड़े राजनीतिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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